आत्मसम्मान का सम्मान – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

सुनिए जी … टीना को फोन लगाकर होली में आने का कार्यक्रम पूछिए।इस बार तो मेरा नवासा भी आएगा साथ में …उमंग और उत्साह सुमित्रा की आवाज में छलक रहा था। अभी लगाता हूँ बहुत दिनों से टीना की कोई खबर भी नहीं मिली है कहते हुए सुजीत जी ने फोन लगा दिया। ना टीना … Read more

महिला -दिवस – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

बड़े चाव से अपने इकलौते बेटे मनुज के लिए मानसी को पसंद किया था,सुषमा ने।देखने में सुंदर,और सजातीय तो थी ही, पढ़ी-लिखी भी थी।मानसी की चंचलता ने मन मोह लिया था सुषमा का।मनुज ने तो पहले ही कह दिया था”देख -परख कर आप ही लाना अपनी बहू।बाद में मुझे ना घसीटना दोनों की कलह में।मुझे … Read more

एक फैसला आत्म सम्मान के लिए….. – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” : Moral Stories in Hindi

सुरभि बारहवीं पास करने के बाद अपनी मांँ से बोली…. मांँ मुझे अब आगे नहीं पढ़ना, मुझे नौकरी करनी है। घर वालों ने बहुत समझाया कि वह अभी पढ़ाई कर ले नौकरी करने के लिए सारे जीवन पड़ा हुआ है।  सुरभि के दिमाग में नौकरी ही नौकरी चल रही थी। घर वालों के समझाने का … Read more

आत्मसम्मान – निभा राजीव”निर्वी” : Moral Stories in Hindi

ऋषि दवाइयों की दुकान पर सिरदर्द की दवा लेने पहुंचा। वहां पहले से ही एक छरहरी सी सुंदर युवती खड़ी थी। ऋषि ने जब दवा का नाम कहा तो केमिस्ट ने कहा,-” सॉरी सर, उस दवा की तो हमारे पास एक ही पत्ती थी जो मैंने इन मैडम को दे दी है।”  ऋषि ने थोड़ा … Read more

तुम्हारा पिता हुं , कोई कबाड़ का सामान नहीं !! – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

पापा , हम घर पहुंच चुके हैं ,चलिए आईए कहते हुए छोटे बेटे रोहन ने कार का दरवाजा खोला !! कांतिलाल जी बेटे के साथ घर के अंदर पहुंचे तो घर को टकटकी लगाए देखते रह गए !! बीच में बड़ा सा झूमर , महंगा फर्नीचर , मखमली सोफा , डायनिंग टेबल , एयर कंडीशनर … Read more

एक फैसला आत्मसम्मान के लिए – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

आज मै जो हूँ अपनी माँ की बदौलत हूँ..मेरी माँ ने मेरी खातिर किया.. “एक फैसला आत्मसम्मान के लिए”….मेरे लिए किया था उसने फैसला वो मुझे फर्श से अर्श तक पहुँचा कर रहेगी । आज भले ही वो इस दुनिया में नहीं है….. ये दुनिया उन लोगों को सलाम करती है जो अपने बल पर … Read more

दिखावा – खुशी : Moral Stories in Hindi

रीता और गौरव दोनों बैंक में काम करते थे। बार बार ट्रांसफर होने के कारण रीता को कभी ससुराल में रहने का मौका नहीं मिला।उसे बड़ा लगता मै भी अपनी देवरानी, जेठानी और सास के साथ रहती।नौकरी के कारण वो कभी त्यौहार वार पर ही ससुराल जा पाते। फिर उसे लगता उसके साथ मेहमानों वाला … Read more

एक फैसला आत्मसम्मान के लिए – ऋतु यादव : Moral Stories in Hindi

सम्मान समारोह में जब महिमा ने अपनी सफलता का श्रेय रोशनी को दिया, तबसे रोशनी के आंसू ही नहीं रुक रहे थे।जब सब काम निपटाकर कमरे में आई तो नींद उसकी आंखों से दूर भागकर उसे यादों के झरोखे में ले गई। रोशनी, कहने को दो बच्चों की मां, कमानेवाला पति, सास ससुर,ठीक ठाक सी … Read more

एक फैसला आत्म सम्मान के लिए – विनीता महक गोण्डवी : Moral Stories in Hindi

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस  के सम्मान समारोह में वीमेन अचीवमेंट अवार्ड के लिए अर्पिता के नाम की घोषणा हो रही थी और अर्पिता अपने अतीत में खोई हुई थी मानो पूरा अतीत एक फिल्म की तरह से उसकी आंखों से गुजर रहा था।    अर्पिता के पिता पुलिस विभाग में एक आरक्षी के पद पर तैनात थे। … Read more

औरत के मन की व्यथा – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

शोभना आज फिर जल्दी, जल्दी घर के कामों को निपटाने में लगी हुईं थीं। उसके पति विकास ने हंसते हुए कहा क्या बात है आजकल तो आप अनुशासित जीवन जीने लगीं है मैडम??आज कल तुम मेरे आफिस जाने से पहले ही अपना सारा काम समाप्त कर लेती हो फिर पूरे दिन क्या करतीं हो?दिन में … Read more

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