अंगारे उगलना – सुनीता परसाई ‘चारु’ : Moral Stories in Hindi
हरि का दोस्त मनोहर बाहर से आवाज दे रहा था “अरे ओ हरि! खेलना नहीं है क्या आज? “हांँ-हांँ चलता हूँ” हरि व मनोहर अच्छे दोस्त थे। एक ही मोहल्ले में रहते थे। साथ खेलते साथ ही शाला जाते थे। हरि के पापा एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। उनकी कमाई से घर आसानी … Read more