अस्तित्व – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

आज मधुरा को पार्टी में सुजीत और उसकी मॉ कामिनी जी मिले। तलाक के बाद मधुरा और सुजीत की यह पहली मुलाकात‌ थी। सुजीत ने तो देखकर अनदेखा लेकिन आज मधुरा चुप नहीं रह सकी। गोद में नन्हीं सलोनी को लेकर जाकर खड़ी हो गई उन दोनों के पास – ” पहचाना मिसेज कामिनी देवी?” … Read more

अस्तित्व और प्रभा – अनामिका मिश्रा : Moral Stories in Hindi

प्रभा बचपन से ही संकोची स्वभाव की थी। काफी समझदार और संस्कारी भी। बचपन संयुक्त परिवार में बीता और विवाह भी संयुक्त परिवार में ही हुआ। बचपन से ही त्याग और समर्पण की संयुक्त परिवार में एक स्त्री को उसकी शिक्षा दी जाती है। प्रभा भी वही अनुभव कर रही थी।आज एकांत में बैठी वह … Read more

अस्तित्व – खुशी : Moral Stories in Hindi

राधा दो बेटों और एक बेटी की मां थी।पति कैलाश बैंक में नौकरी करते थे।बेटे विवेक और विराज दोनो कॉलेज में थे और बेटी प्रीति 12 में थी।राधा गृहिणी थीं ऐसा नहीं था कि राधा पढ़ी लिखी नहीं थी।हिंदी में MA।संगीत की अच्छी समझ अच्छा गाती थी। पेंटिंग बहुत अच्छी करती।शादी होकर आई तो सास … Read more

जब बहू ने अंगारे उगले – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

शालिनी की शादी एक प्रतिष्ठित परिवार में हुई थी। पढ़ी-लिखी, आत्मसम्मानी और अपने विचारों पर अडिग रहने वाली लड़की ने जब ससुराल में कदम रखा, तो सबने कहा, “बहू तो बहुत तेज़ है, जुबान से अंगारे उगलती है।” असल में, शालिनी कभी गलत के सामने चुप नहीं रहती थी। जब पहली बार सास ने कहा, … Read more

माँ की इच्छा – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

बेटा.. मुझे कुछ पैसों की जरूरत है जैसे ही सुमित्रा जी अपने बेटे से कहने लगी तभी उनकी बहू नव्या वहां आ गई और सुमित्रा जी कहते कहते चुप हो गई! बेटे ने एक दो बार पूछा भी की मां बताओ कितने पैसे चाहिए और क्यों चाहिए किंतु मां ने कहा.. कोई बात नहीं बेटा … Read more

डिजिटल अंगारे – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

आज वह स्क्रीन से नज़रें नहीं हटा पा रही थी। नेहा के फोन की नोटिफिकेशन बार धधक रहा था – एक के बाद एक टिप्पणियाँ, शेयर, टैग। सब एक ही लिंक की ओर इशारा करते थे – उसके खुद के डिज़ाइन स्टूडियो के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट की गई एक वीडियो रील। रील में … Read more

“अस्तित्व ” – सुदर्शन सचदेवा : Moral Stories in Hindi

असली अस्तित्व  वही होता है , जो हमारे अंदर की पहचान से जुड़ा होता है , न कि बाहर की पहचान से | जैसे पैसा, नाम या नौकरी | कोई कहे मेरा अस्तित्व खत्म हो गया है, यानि मेरी पहचान  मेरी अहमियत समाप्त हो गई है |  अस्तित्व की तलाश : शहर की भागती दौड़ती … Read more

अंगारे उगलना – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

तुम दिन भर घर पर करती ही क्या हो…बच्चे भी स्कूल चले जाते हैं। मैं भी सुबह का गया ऑफिस से शाम को ही लौटता हूं। हमारे जाने के बाद आराम ही तो करती हो और गुस्से में अपनी ऑफिस वाली बैग और टिफिन लेकर निकल पड़ा। यह साहिल की रोजमर्रा की आदत थी । … Read more

” पिता का आशीर्वाद ” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” पापा कब छोड़ेंगे आप अपना गँवार पन , इतनी इज्जत कमाई है मैने अपनी मेहनत के बल, सब मिट्टी मे मिलाने मे लगे हो आप !” मेहमानों के जाते ही अरुण मानो अंगारे उँगलने लगा। ” बेटा मुझे पानी पीना था कमरे मे था नही बस इसलिए रसोई मे पानी लेने जा रहा था … Read more

काश मैं कमजोर न पड़ती – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

गरिमा शाम को अपनी छत पर बैठी शून्य में कुछ ख़ोज रही थी, गरिमा हर शाम छत पर आकर बैठ जाती वो कभी आसमान पर उड़ते पक्षियों को देखती कभी चलते हुए बादलों को कभी वो शून्य में कुछ खोजती जैसे उसका कुछ खो गया हो और वो उसे दोबारा पाना चाहती हो पर जो … Read more

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