सोच बदल गयी – डा० विजय लक्ष्मी : Moral Stories in Hindi

देवकी जी के सीने में उबलते ज्वालामुखी के लावा जैसे धधक रहा था जब उनके बेटे निखिल ने एक दिन घर आकर कहा , “मां, मैंने शादी कर ली है।” “किससे?” “उससे,… कोमल की ओर इशारा करते हुए माँ से कहा  वही ऑफिस वाली।” देवकी जी ने माथा पीट लिया। “हाय राम! पढ़ी-लिखी और ऊपर … Read more

मीठा बोलो- मिश्री घोलो – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

“ मैडम जी, प्लीज मेरा रूम बदल दें, मुझे संगीत के साथ नहीं रहना, सिर्फ नाम की संगीत है, एक भी सुर  सीधा नहीं निकलता”।वेदा ने कालिज आफिस में आकर कहा      “ क्यों क्या हो गया, हरलीन मैडम ने चशमा उपर करते हुए कहा”।      मैडम संगीत और मैं रूम मेट है, अब एक कमरे में … Read more

चुभती बातों का जवाब मुस्कान – मधु पारीक : Moral Stories in Hindi

राजेश एक मध्यमवर्गीय परिवार का जिम्मेदार बेटा था। शहर में नौकरी करता था और महीने में एक बार गाँव अपने माता-पिता से मिलने आता। गाँव के माहौल में अपनापन तो था, लेकिन पड़ोस की चाची, मिसेज शर्मा, हर बात में टांग अड़ाने और जली-कटी सुनाने की उस्ताद थीं।   हर बार राजेश गाँव आता, तो चाची … Read more

अंगारे फूल बन जाएँगे.. – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

” कितनी भी कोशिश कर ले दीपा…तेरे बेटे का कुछ नहीं होने वाला..अंधा है..इसे तो जन्म के समय ही मार…।” ” बस कीजिए दीदी..जैसा भी है..मेरा बेटा है..मेरे शरीर का हिस्सा है..।” अपने छह साल के बेटे के लिए जेठानी मालती की जली-कटी बातें सुनकर दीपा तड़प उठी थी।वह मनु को लेकर कमरे में चली … Read more

अस्तित्व – प्रीति श्रीवास्तवा : Moral Stories in Hindi

शारदा देवी की आँखें मंदिर के सामने बैठे-बैठे भर आई थीं। उनकी हथेलियों में जपमाला थी, पर मन जप में नहीं, अपने बिखरे हुए घर में उलझा हुआ था। हर दिन जैसे एक ही वाक्य उनके होंठों से निकलता – “हाय राम! मेरी तो तक़दीर ही फूट गई जो ऐसी बहू इस घर में आई।” … Read more

अस्तित्व – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

अरे धन्नो फटाफट चार रोटियां सेक दे तेरे जेठजी आ गए है। रमा ने सोफा पर बैठे-बैठे ही कहा। जेठानी रमा की आवाज सुनकर धन्नो ने झाड़ू वहीं किनारे छोड़ दिया और धीमे से बोल उठी।अभी बना देती हूं दीदी और तुरंत रोटी सेकने लगी। जैसे ही धन्नो का रोटी सेकना हो गया। वो फिर … Read more

अस्तित्व – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

संध्या एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थी। वह दिन भर ऑफिस की भागदौड़ और घर की जिम्मेदारियों में खुद को झुलसता महसूस करती, पर फिर भी हिम्मत नहीं हारती। सुबह 6 बजे उठकर बच्चों का टिफिन, सास-ससुर की दवाइयां, पति के नाश्ते की तैयारी… सब कुछ समय पर निपटाकर वह खुद … Read more

अंगारे उगलना! – लक्ष्मी त्यागी : Moral Stories in Hindi

देख रहे हैं ,आज छोटी बिना किसी से कहे ,अपने पति को लेकर फ़िल्म देखने गयी है ,तन्वी ने अपने पति से शिकायत भरे लहज़े में कहा।  विनय ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और चुपचाप अपने कमरे में चला गया पति के इस व्यवहार से वह बुरी तरह तिलमिला गयी। जब वो इस … Read more

अस्तित्व –  लक्ष्मी त्यागी : Moral Stories in Hindi

तुम कहाँ तक पढ़ी हो ?कामायनी जी ने अपने घर में काम कर रही, लड़की से पूछा।  ज्यादा कुछ नहीं ,आठवीं तक पढ़ाई की है।  क्यों, आगे क्यों नहीं पढ़ पाईं ? उन्होंने उत्सुकता से पूछा।  कुछ देर वह चुप रही और पोछा लगाती रही,कामायनी जी ने अपने आपको ही समझाया ,रही होगी इसकी कोई … Read more

अंगारे उगलना – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

दीनानाथ और जानकी गाँव में अकेले रहते गाँव की ताजा आबोहवा खेती बाड़ी कर अपने में ही मस्त रहते परिवार के नाम पर दो बेटे,पढ़ने लिखने में लायक तो स्कालरशिप से आगे बढ़ते गये और एक बेटा कम्पनी के माध्यम से विदेश बस गया दूसरा मुम्बई वहीं शादी कर इतना मस्त हो गया कि भूल … Read more

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