अस्तित्व की गूँज – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi
ऑफिस की चौथी मंजिल पर, अमर की उँगलियाँ कीबोर्ड पर थिरक रही थीं, पर उसका मन कहीं दूर, शायद उसके भीतर की किसी खाली गुफा में भटक रहा था। स्क्रीन पर नंबरों और चार्टों की भीड़ थी। एकाएक, उसकी उँगलियाँ ठिठक गईं। एक विचित्र प्रश्न, जैसे कोई चट्टान टूटकर गिरा हो, उसके मस्तिष्क में आ … Read more