मुझे मौत चाहिए – रवीन्द्र कान्त त्यागी
आँखें खुलीं तो मेंने खुद को हस्पताल की बैड पर पाया। सारे परिजन और डौक्टर व नर्सें मुझे घेरे खड़े थे। “मिष्टर त्यागी, कैसा महसूस कर रहे हैं।” डॉक्टर ने कहा। “क्या हुआ है मुझे। मैं यहाँ? “ऐसा होता है। अगर सर में थोड़ी भी चोट लगे तो इंसान तत्कालीन घटना को भूल जाता है। … Read more