“त्याग की आड़ में” – निधि गुप्ता
** क्या एक माँ का संघर्ष उसके बेटे की खुशियों का ‘आजीवन कारावास’ बन सकता है? क्या अतीत के दुखों की दुहाई देकर वर्तमान की खुशियों का गला घोंटना जायज़ है? जानिये सुमन की कहानी, जिसने ‘फर्ज’ और ‘गुलामी’ के बीच की लकीर खींच दी। — “बेटा! तुम मेरी बहू की उम्र की हो, इसलिए … Read more