खतरा टल गया – गीता वाधवानी
शांतनु अपनी माताजी का अस्थि विसर्जन करने हरिद्वार गए थे। जैसे ही वह कार्य पूरा करके वापस मुड़े सीढियों पर किसी ने उनकी टांगों से लिपट कर कहा -” पापा पापा, आप मुझे छोड़कर कहां चले गए थे, सुबह से आपको ढूंढ रही हूं, अब तो मुझे डर लग रहा है। देखो ना कितनी देर … Read more