क्या तुम्हारा बच्चा अनोखा है? – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रीमा एक पढ़ी-लिखी, समझदार और संस्कारी लड़की थी जिसकी शादी एक बिजनेसमैन अर्जुन से हुई। अर्जुन का अधिकतर समय शहर से बाहर मीटिंग्स में बीतता। ससुराल में रीमा के साथ सास, ससुर, दो कॉलेज जाती ननदें और एक देवर रहते थे। रीमा ने कभी किसी बात की शिकायत नहीं की, ससुराल को अपना घर समझ … Read more

चुगलखोरनी – रेनू अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

— रीना सुबह से काम में लगी हुई थी। सबका चाय-नाश्ता बनाने के बाद जैसे ही वह निकली, देखा कि उसकी ननद सास के पास बैठकर धीरे-धीरे कुछ कह रही थी। रीना समझ गई थी, उसी का जिक्र हो रहा होगा। क्योंकि जब भी उसकी ननद ससुराल से आती है, अपनी मां का कान भरती … Read more

अपने काम से काम रखो – विमला गुगलानी :

“नमस्ते ममी, कैसी हो, क्या हाल है आपकी बहूरानी के, आ गए दोनों हनीमून से”           शिखा ने घर में घुसते ही मां से पूछा। “ हाँ, आ गए तेरे भैया भाभी, और आज दोनों काम पर भी गए, थके हुए तो थे, पंरतु छुट्टियां भी खत्म हो गई थी तो जाना ही पड़ा, एक अच्छी … Read more

कठपुतली का खेल – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

आज मीता बहुत खुश थी अपने मायके जो आई थी ।पीहर में आने का एक अलग ही सुख होता है और जब पुरानी सहेलियों से मिलन हो जाए तो कहने ही क्या खूब गप्पे लड़ना, चिंता फिकर सब छोड़ बचपन की यादों को ताजा करना एक अलग ही सुख देता है ,ससुराल में काम करके … Read more

स्वार्थी सासु – भगवती सक्सेना गौड़ : Moral Stories in Hindi

रमोला और अमन की दोस्ती धीरे धीरे परवान चढ़ी और एक दिन भी बिना मिले, दोनों रह नहीं पाते थे। दसवीं तक रोज पढ़ाई लिखाई भी एक साथ करते। और 1995 के समय में आज की तरह खुल्लमखुल्ला इश्क की बातें नही कर सकते थे। अमन इंजीनियरिंग पढ़ने मुम्बई चले गए और रमोला उसी शहर … Read more

क्यों औरत बने कठपुतली? – रोनिता कुंडु

आपकी पत्नी अब कुछ ही महीनो की मेहमान है, काश आप लोग कुछ महीने पहले आ गए होते तो, शायद कुछ किया जा सकता था। डॉक्टर ने अतुल से कहा अतुल:  डॉक्टर! क्या सच में अब कुछ भी नहीं हो सकता? पर उसे इतना तेज़ दर्द पहले तो कभी नहीं हुआ और जिस दिन हुआ … Read more

कान भरना – कमलेश राणा : Moral Stories in Hindi

जगन्नाथ जी आठ दिन से रोज सुबह होते ही मंदिर की सीढ़ियों पर आ कर बैठ जाते और मंदिर के पट बंद होने के बाद ही घर जाते। कई बार वह कुछ बड़बड़ाते हुए रोने लगते थे। मेरे लाख पूछने के बाद भी वह इसका कारण नहीं बताते। वे इस नगर के धनाढ्य और जाने … Read more

कठपुतली नहीं हूँ मैं – मीरा सजवान ‘मानवी’ : Moral Stories in Hindi

“सीमा! दवा दी नहीं अभी तक। पानी भी ठंडा है, गरम लाकर दे।” सीमा की सासू माँ खंखारते हुए  गुस्से में चिल्लाते हुए  बोली। “जी माँजी, अभी लाई। बस पराठा पलट लूँ।” “सीमा! मेरी शर्ट प्रेस की है ना? ऑफिस में प्रेज़ेंटेशन है आज।” “हां, अलमारी में बायीं तरफ़ रखी है… मैं निकाल दूँ?” “नहीं, … Read more

सास को बहू की तकलीफ नहीं दिखती है – मीनाक्षी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

एक बड़े से घर में निर्मला देवी रहती थीं।  उनका स्वभाव कड़क और अनुशासन भरा था। पूरे घर में उनका ही नियम चलता था। बच्चों को समय पर उठाना, समय पर खाना खिलाना, समय पर पढ़ाना और थोड़ी बहुत कसरत भी करवाना, यह सब उनके रोज़ के नियम थे। घर का हर काम घड़ी की … Read more

एक धागे की कठपुतली – मीनाक्षी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

एक बड़े से शहर में एक मध्यम वर्गीय परिवार रहता था। माता-पिता और उनके तीन बच्चे – संजय, विक्रम और सबसे छोटा अमन। सभी बच्चे बड़े हो गए थे और संजय और विक्रम की शादी हो चुकी थी। घर में रौनक थी, लेकिन एक दिन अचानक सब बदल गया। माता-पिता का साया सिर से उठ … Read more

error: Content is protected !!