मैंने अपना फर्ज निभाया है – विनीता सिंह

कश्मीर की वादियों में भारत पाकिस्तान के बॉर्डर के पास एक गांव जहां के लोग चरवाहे या फिर लोग की नांव में सब्जियां बेचकर अपना गुजारा करते थे।यह गांव कश्मीरी पंडितों का था लेकिन ज्यादातर लोग गांव छोड़कर जा चुके थे लेकिन अर्जुन के दादा जी ने कहा इस गांव के पुरोहित भगवान दास जी … Read more

कलह – विनीता सिंह

प्रभाकर जी और सुनीता जी के एक बेटा था उसका नाम विश्वजीत था । वह विदेश में पढ़ने गया। प्रभाकर जी रिटायर हो चुके थे ।दोनों पति-पत्नी अपने घर में रहते प्रातः काल उठकर सुनीता जी पूजा पाठ करती। प्रभाकर जी सुबह टहलने जाते। उसके बाद पेड़ पौधों की देखभाल करते। दोनों एक साथ बैठकर … Read more

जहर का घूंट पीना – मीनाक्षी गुप्ता

 एक बड़े से शहर के बीच में कहीं एक छोटा-सा घर था। इस घर में राधा अपने पति रमेश और तीन मासूम संतानों— गीता (9), कोमल (7) और अमन (5)— के साथ रहती थी। एक समय था जब यह लोअर-मिडिल क्लास परिवार सुख-शांति से भरा था। रमेश एक कंपनी में काम करता था, पर उसकी … Read more

क्या यही संस्कार है –

रात के सन्नाटे में रिया खिड़की के पास बैठी थी। बाहर बारिश की बूंदें काँच पर दस्तक दे रही थीं, लेकिन उसके भीतर जो तूफ़ान चल रहा था, वह किसी को सुनाई नहीं दे रहा था। शादी को तीन महीने ही हुए थे, पर इन तीन महीनों में उसने जितनी बातें सीखी थीं, उतनी शायद … Read more

खबर – पुष्पा कुमारी “पुष्प”

“मम्मी जी!. आजकल सुनैना काकी हमारे घर नहीं आती है,.ऐसा क्यों?” उस घर की इकलौती बहू राधिका ने आज हिम्मत कर अपनी सास से पूछ लिया और अपनी बहू की बात सुनकर प्रभाजी अचानक चिढ़ गई.. “वह ना ही आए तो भला!” सुनैना काकी के प्रति अपनी सास की कुढ़न देख राधिका के चेहरे पर … Read more

कलह – रेखा जैन

सुबह के 8 बजे थे और मीना रसोई में नाश्ते की तैयारी कर रही थी।  उसने सुबह पहले अपने बेटे का टिफिन बना कर बेटे को स्कूल भेज दिया था। अब घर के सब लोगों का नाश्ता बना रही थी और साथ में पति का टिफिन भी बना रही थी क्योंकि उसके पति अजय टिफिन … Read more

कलह – के आर अमित

घर में हँसी नहीं थी बस चिंता चिल्लाहट और अशांति थी।और चिंता चिता समान होती है। धीरे-धीरे जीविन को जला डालती है एक सुबह भोर का उजाला मुर्गे की बाँग सब सामान्य भोलू खेत जाने को उठा  पर उसने अपने सीने पर हाथ रख लिया साँस तेज़ होने लगी कपकपी कदम डगमगाए और हाय हाय … Read more

अस्तित्व – लतिका श्रीवास्तव

प्रतिदिन की भांति फिर थानेदार साब अपने कई साथियों के साथ डंडा फटकारते आ गये। ओए रामू …सबको पेशल चाय दे और सब जगह सलोनी लगा रौबदार आवाज कानों में जाते ही यंत्रवत रामू के कांपते हाथ चाय के पतीले की ओर बढ़ गए थे। जल्दी चाय बना एक काम भी ढंग से नहीं होता।तब … Read more

दूरियां नज़दीकियाँ बन गई – संगीता अग्रवाल

” मां मैं सोच रहा हूं एक घर खरीद लूं।” संदीप ऑफिस से आते ही अपनी मां जया जी से बोला। ” पर बेटा ये घर है तो सही फिर दूसरे घर की क्या जरूरत है?” जया जी हैरानी से बोली। ” वो मां बात ऐसी है की शालिनी ( संदीप की पत्नी ) को … Read more

मिताली – गीता अस्थाना

——— शिवेंद्र ने ट्रेन के कोच में भरी पैसेंजर के बीच तेज़ आवाज़ में कहा, ‘ कब तुमने मुझे रुपए दिए ‘ उनकी तेज़ आवाज़ से भयभीत सी होकर नीचे देखने लगी। उसकी आंखों में आंसू आ गए। रात्रि का सफर था, सो वह अपने बर्थ पर जाकर लेट गई। काफी देर तक वह जागती … Read more

error: Content is protected !!