सपने सुहाने – गरिमा चौधरी
सुबह का समय था। रसोई से ज़ोर–ज़ोर से बर्तनों की खनखनाहट आ रही थी, मानो बर्तन नहीं, किसी के मन की कड़वाहट टकरा–टकरा कर आवाज़ कर रही हो। नेहा ने गैस पर चाय चढ़ाते हुए फिर एक नज़र दीवार पर घड़ी की तरफ़ डाली। “आठ बजने वाले हैं और ये लड़की अभी तक बिस्तर से … Read more