पापा , मेरे लिए लोन ले लो – स्वाती जैन : Moral Stories in Hindi

पापा , मुझे फाल्गुनी पाठक वाली नवरात्री में खेलने जाना हैं , प्लीस पास लेने के लिए हजार रुपए दे दो सिम्मी अपने पापा चंदुलाल जी से प्यार से बोली !! सिम्मी की मां सीमा जी बोली – इस लड़की ने तो परेशान कर दिया हैं , कभी शापिंग , कभी घूमना , कभी फाइव … Read more

अपनों की पहचान – मधु वशिष्ठ : Moral stories in hindi

—————- मैं अपने ही घर में  हूं और यहां सब मेरे अपने ही हैं परन्तु मां को ख्याल क्यों नहीं आ रहा कि वह कह क्या रहीं है? मैं 30 साल की होने को आई हूं,  परंतु वह कह रही हैं  कि शीतल जो कि।  मुझसे 4 साल छोटी है, क्यों ना उसका विवाह कर … Read more

अपनों की पहचान – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral stories in hindi

बाहर बारिश ऐसे बरस रही थी जैसे आसमान भी किसी अदृश्य पीड़ा से रो रहा हो। बिजली की चमक, गड़गड़ाहट और भीगे शहर की निस्तब्धता के बीच डॉक्टर आरव ICU की चौथी मंज़िल पर खड़ा था। लोगों की जान बचाने वाले वही हाथ आज खुद अपने मन की जद्दोजहद से जूझ रहे थे। बचपन से … Read more

आप अपने बेटे के साथ क्यों नहीं रहते – सुधा जैन : Moral stories in hindi

“अरे यह क्या दिन भर सास बहू वाली कहानियां पढ़ती रहती हो, दूसरा कुछ पढ़ा करो “ पतिदेव ने अपनी पत्नी से कहा, तब पत्नी मुस्कुरा कर बोली ” यह इतनी जगत व्यापी, सर्वव्यापी समस्या है कि न वर्तमान में ,न भूत मे न भविष्य में इस समस्या का हल नजर आता है ….करें भी … Read more

” सुसाइड नोट “- डॉ. सुनील शर्मा : Moral stories in hindi

न जाने क्यों, अब जीने की इच्छा ही नहीं रही. बूढ़े शरीर में दिमाग़ भी अब सुस्त हो गया है. आंखों की रोशनी और जीभ का स्वाद तो कब का चला गया.पेट में कुछ पचता नहीं. दांत भी एक एक कर साथ छोड़ गए. नहीं नहीं, कुछ बीमारी नहीं. बस थकान रहती है, चलने सा … Read more

झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती – आर. एस. कुमार : Moral Stories in Hindi

लंदन की चकाचौंध का बखान करते हुए जब बबलू हर शाम हाथ में दारू की गिलास लेकर बगल में बैठे अपने बहनोई को गरियाता है , उसकी बड़ी बहन खून के आंसू रोती है। अपने बहन बहनोई को भारत के गांव से लेकर आया बबलू डिंग हांकने में कोई कमी नहीं करता है। जबकि सच्चाई … Read more

“अम्मा का कमरा”

रीना किचन में बर्तन समेट ही रही थी कि अचानक फोन की घंटी बजी।फोन उठाया तो गाँव से बड़े चाचा थे— “बिटिया, अम्मा अब बहुत बूढ़ी हो गई हैं। आँखों से कम दिखता है, घुटनों में दर्द है। अब अकेले रहना मुश्किल हो गया है। तुम लोग दिल्ली में हो, किसी के पास तो होना … Read more

माँ बिना पीहर नहीं, सासू बिना ससुराल नहीं

घर के आँगन में रौनक थी। आज सुषमा की ननद, किरण अपने मायके आई थी। पूरे दो साल बाद उसकी यह मायके यात्रा हुई थी। जैसे ही वह घर में दाखिल हुई, सुषमा दौड़कर उससे लिपट गई। “आइए दीदी, बहुत दिनों से आप नहीं आईं। हम सब आपको बहुत याद कर रहे थे। शायद पूरे … Read more

झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती है – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रितिका बड़े उद्योगपति की बेटी थी। उसका जीवन महँगी कारों, आलीशान घर और शानदार पार्टियों से भरा था। कॉलेज में उसकी मुलाकात ऋषि से हुई, जो एक साधारण परिवार का ईमानदार और संस्कारी युवक था। ऋषि की सादगी ने रितिका का दिल जीत लिया। धीरे-धीरे दोस्ती प्रेम में बदली और एक दिन रितिका ने अपने … Read more

गृह प्रवेश

सोफे पर बैग पटकते हुए मीना धम्म से बैठ गई।सर भी भारी लग रहा था। इतने में मम्मी (पूनम जी) भी पानी लेकर आ गईं। “क्या हुआ मीना बेटा, बड़ी थकी-थकी सी लग रही हो। तबीयत तो ठीक है ना?” “हाँ, बस थोड़ा सर भारी है… ज़रा अपने हाथों से दबा दो ना।” कहते हुए … Read more

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