आँखों देखा कहर – रवीन्द्र कान्त त्यागी

सोने की तैयारी में खाट पर लेटे लेटे मिट्टी के तेल की रोशनी में मेरा ध्यान अचानक खूंटी पर लटके बाबा जी के कुर्ते की जेब पर गया। एक बोतल का ढक्कन सा बाहर झाँक रहा था। बिस्तर छोड़कर उत्सुकता व आश्चर्य से मैंने उनकी जेब को टटोला तो वहां शराब का एक भरा हुआ … Read more

रिटायरमेंट – रंजीता पाण्डेय

शर्मा जी सरकारी स्कूल में अध्यापक थे।उनके परिवार में उनका बेटा रोहनऔऱ उनकी पत्नी रमा जी थी। रमा जी बहुत ही ज्यादा पढ़ी लिखी ,समझदार महिला थी। रमा जी जब शादी करके आयी ,तभी शर्मा जी से बोली की मैं भी कोई नौकरी करना चाहती हूँ। लेकिन शर्मा जी हर बार टाल जाते, की रमा … Read more

रिटायरमेंट – सोनिया अग्रवाल

मोबाइल पर जैसे ही बैंक खाते में पैसे प्राप्त होने का मैसेज मिला तो बुजुर्ग रामलाल जी के चेहरे पर मुस्कान की एक लकीर चमक गई। देखते ही देखते आँखें नम हो गई तो जल्दी से बेटी सपना को फोन कर घर आने के लिए बोल दिया। मासिक पगार  तय तिथि पर आ जाने की … Read more

उधार का अमीर

दोस्तो, यह कहानी नहीं, एक सच्ची घटना है, जो पिछले एक वर्ष से भारत के हर शहर में नित नए रुप में किरदारों के नाम बदल कर घट रहीं है …. (यह  कहानी प्रधान मंत्री जी के आवहान पर इस ग्रुप के सदस्यों को समर्पित…) 100 नम्बर की एक गाड़ी मेन रोड पर एक दो … Read more

विषवृक्ष – रवीन्द्र कान्त त्यागी

छोटे से कस्बे में मेरा आई.आई.टी में उच्च श्रेणी प्राप्त करना कई दिन चर्चा का विषय रहा था. पहले महीने ही एक अंत्तराष्ट्रीय कंपनी में अच्छे पॅकेज की नौकरी लग जाने के बाद पिताजी ने वधु तलाश कार्यक्रम शुरू कर दिया था और ये स्वाभाविक भी था. महानगर की एक पौष कॉलोनी में प्रशासनिक अधिकारी … Read more

अपहरण का बदला – रवीन्द्र कान्त त्यागी

रात के दो बज रहे हैं। आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं है। मेरी पत्नी अनुष्का अपने तीन साल के वैवाहिक जीवन को ठोकर मार कर चली गई है। बरसों से मेरे हृदय में उसके लिए बसे अगाध प्रेम, समर्पण और विश्वास को एक तीन पंक्ति के कागज के पुर्जे से तार तार करके, मेरी … Read more

ये गंवार तुम्हारी मां है – मंजू ओमर

हेलो हेलो मां हां, हां बेटा कैसी है मां ठीक है ,और बेटा तू कैसा है कब आएगा तू ,कब से तेरे आने की राह देख रही हूं। बेटा बस जल्दी ही मिलूंगा मां, मां मैं शादी कर रहा हूं।दो दिन बाद मेरी शादी है बड़े होटल से । मां बस तुम तैयारी करके रखना … Read more

मंदाकिनी – बीना शुक्ला अवस्थी

आज मंदाकिनी एक अजीब सी खुशी और सन्तुष्टि अनुभव कर रही है। उसे ऐसा अनुभव हो रहा है कि उसने अपने जीवन भर के दुःखों, पीड़ा, तड़प और ऑसुओं का थोड़ा सा प्रतिकार ले लिया है।  कल गिरीश को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी है लेकिन उसका हृदय रो रहा होगा। उसके अपनो ने ही … Read more

रिटायरमेंट – हेमलता गुप्ता

जानकी… ऑफिस वाले कह रहे हैं बाबूजी अगले महीने रिटायर हो जाओगे तो घर में बैठकर भी क्या करोगे आप चाहो तो दोबारा यहां पर ही काम कर सकते हो अभी तो आप शारीरिक और मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हो, तो मैं सोच रहा था सही कह रहे हैं वह अभी तो मैं ऐसा … Read more

इंसानियत: कोई अपना सा – श्वेता अग्रवाल –

स्नेहा फटाफट सुबह के काम निपटाए जा रही थी| एक तो लॉक-डाउन की वजह से कामवाली भी नहीं आ रही थी ऊपर से पति मयंक का वर्क फ्रॉम होम, अंशुल की फरमाइशें और उसकी खुद की ऑनलाइन क्लासेस| सुबह के समय वह अच्छी खासी बिजी रहती थी। स्नेहा हाई स्कूल में मैथ्स की टीचर है … Read more

error: Content is protected !!