व्यवहार – भगवती सक्सेना गौड़

आज संजय ने बहुत दुखी होकर मम्मी की फेसबुक प्रोफाइल खोली, और उसमे पोस्ट डाली, “बहुत दुख के साथ सूचित कर रहा हूँ कि मेरी मम्मी कहानीकार कंचन देशपांडे कल स्वर्ग सिधार गयी।” लिखने के साथ ही मोबाइल फेंक कर, बिलखने लगा। हे भगवान ये किस जन्म का बदला लिया, मैं अंत समय उनके पास … Read more

नई चलन’ – पूनम वर्मा

आज रंजना मैडम स्कूल नहीं आई थीं । कोई मैसेज भी नहीं किया । रश्मि मैडम की घरेलू नज़दीकी है इसलिए  वह ज़्यादा ही परेशान थीं । उन्होंने छुट्टी के समय कॉल किया पर किसी ने रिसीव नहीं किया । अब उन्हें चिंता होने लगी । शाम को रंजना मैडम का फोन आया कि सुबह … Read more

नया सफर – अनुपमा

इरा काम से थोड़ा फ्री हुई तो ऑफिस डेस्कटॉप पर ही थोड़ी देर फेसबुक ओपन करके स्क्रॉल करने लगी , अपने पुराने स्कूल के फेसबुक ग्रुप मैं वो अक्सर लोगो को स्टॉक करती की शायद कोई पुराना स्कूल कॉलेज का साथी मिल जाए उसे , फेसबुक पर उसने अपनी आईडी बनाई ही इसलिए थी की … Read more

लौह कन्या – गोमती सिंह

सरोजनी एक सार्वजनिक उद्यम में कार्यरत थी ।वह प्रातः 8 भजे जल्दी जल्दी तैयार होने के बाद निकल पड़ी अपनें कार्य पर ।उसकी बाइक सड़क पर दौड़ने लगी। 35 वर्षीय सरोजनी को स्कूटी  चलाने का काफी तजुर्बा था ।वह सड़क पर यातायात के नियमों का पालन करते हुए ही जा रही थी ।लेकिन ट्रेफिक की … Read more

” गोरा- चिट्टा दूल्हा ” – सीमा वर्मा

‘ अरी ओ राजरानी, अब ये साज-श्रृगांर , पाउडर-लाली सब तेरह दिन तक बंद ‘ ‘ नहीं करना है तुम्हें यह सब… नहीं करना चाहिए तुम्हें ‘ चाची की भारी आवाज सुन कर स्नेहा की आंखों में मोटे-मोटे आँसू भर गये थे। लेकिन चाची ‘अचला’ का दिल नहीं पसीजा। इसके साथ ही शुरु हो गई … Read more

केवट – कमलेश राणा

 प्रेम शब्द सुनते ही मन में सकारात्मक अनुभूति का एहसास होता है,,,सृष्टि में जीवन नर्तन के लिए प्रेम का होना परम आवश्यक है,,इसके अभाव में संसार रसहीन हो जाएगा,,सारी खुशियाँ और रौनकें इसी से हैं,, यह कभी ममता के रूप में,कभी विरह में,कभी आत्मीयजनों की परवाह में,कभी दयाभाव में और कभी प्रियतम के प्यार में … Read more

बेटी का सौदा मुझे मंजूर नहीं – सोनिया सैनी

सविता और मंजू पक्की सहेलियां थी। बचपन से लेकर स्कूल कॉलेज में साथ ही रहीं। धीरे धीरे बचपन का साथ जीवन भर की दोस्ती में बदल गया। सविता और मंजू दोनों की शादी उदयपुर में हुई और इस तरह उनकी दोस्ती नदी की अविरल जलधारा की तरह ताउम्र बहती रही। लेकिन बचपन में गुड्डे गुड़िया … Read more

अंतिमदर्शन.. – विनोद सिन्हा “सुदामा”

चारों ओर विषैली गंध फैली थी..भीड़ मुँह ढके सारा मंजर चुप चाप देख और सुन रही थी..परंतु कह कोई कुछ नहीं रहा था..बस एक दूसरे को शांत नज़रों से देखे जा रहा था… नगर पालिका की मुर्दा गाड़ी वर्मा जी के दरवाजे पे आकर लगी थी.. किसी ने वर्मा जी की पत्नी के मरने की … Read more

हिजड़ा कही का – बालेश्वर गुप्ता

#एक_टुकड़ा                         ओ सरस्वती जरा पिंकी को तो दे, उसे दूध पिला दूँ.   लाई – लाई, लो संभालो अपनी बेटी को, मुझे तो ये छोड़ती ही नही.     एक बात तो बता सरस्वती, तू मेरा इतना ध्यान रखती है, मेरी बच्ची को तो एक तरह से तू ही पाल रही है, मेरा तेरा क्या रिश्ता है, भला? … Read more

नहले पे दहला – कमलेश राणा

आज जिस कहानी से आपको रुबरु कराने जा रही हूँ,वह कहानी मैंने बचपन में कहीं सुनी थी,,, बहुत मस्त है,,,आप  भी सुनिये।   ठाकुर ब्रजराज सिंह के यहाँ किसी चीज की कोई कमी नही थी,,,,अपार धन सम्पदा के मालिक थे वो,,,बस कमी थी तो एक सन्तान की,,,,दोनों पति पत्नी ने पूजा पाठ से लेकर डॉक्टर … Read more

error: Content is protected !!