मेरा कुलदीपक – नीरजा कृष्णा

भीषण बारिश हो रही थी। अचानक ही मौसम इतना बदल गया था…रह रह कर बिजली की गड़गड़ाहट उनके दुखी मन को बिलो देती थी। एक तूफान बाहर हलचल मचा रहा था, उस तूफ़ान से भी ज्यादा तीक्ष्ण तूफान उनके ह्रदयपटल को झंझोड़ रहा था। आज उनका जन्मदिन था। ठीक एक साल पहले आज ही के  … Read more

रिक्शा – अनुपमा

नीमा और कुबेर रिक्शे के साझेदार थे , दोनो एक ही रास्ते से ऑफिस आते जाते थे , एक बार बारिश मैं मजबूरी मैं रिक्शा साझा किया था नीमा ने , और फिर एक दो बार सयोंग से हो गया , पर अब दोस्ती मैं साझेदारी करते थे दोनो । इतनी बार सयोंग से कोई … Read more

इत्तू सा प्यार – संजय मृदुल

बालों में झांकती चांदी की लड़ियाँ और चेहरे पर चश्मे का परदा। लग तो वही रही Mहैं? लेकिन पता नहीं, थोड़ा पशोपेश में था विनीत। उन्होंने स्वागत किया सभी का, फिर औपचारिक बातें होने लगीं। बेटे के लिए लड़की देखने आए थे विनीत। तब उन्हें देखा था। नाम भी वही, तीन दशक बाद कोई दिल … Read more

ससुराल गेंदा फूल….!! – विनोद सिन्हा “सुदामा”

अवनि ओ अवनि.. कहाँ हो..सुनती क्यूँ नहीं… अरे जिंदा भी है कि मर गई…नासपीटी. जवाब क्यूँ नहीं देती.. वृंदा जी अपनी बहू अवनि को आवाज लगाए जा रही थी..लेकिन बहू थी कि कोई जवाब ही नहीं दे रही थी… उफ्फ… ये लड़की भी न… जबसे आई है नाक में दम कर रखा है…..न खुद चैन … Read more

रिश्तें फिर जुड़ गयें – गुरविंदर टूटेजा

 रात के ग्यारह-सवा ग्यारह बजे होगें…तभी घंटी…फोन की घंटी….दरवाजे को भी जोर जोर से खटका रहा थे…आवाज़ सुनकर सभी अपनें कमरों से बाहर निकल आये दरवाजा खोला तो सामने बहुत सी भीड़ थी…शोर था आपके यहाँ आग लगी है पीछे की तरफ से धुआं आ रहा है…सुनकर सब घबरा गये क्योंकि नीचे पैट्रोल पम्प था….कोई … Read more

फर्क – नीलिमा सिंघल

कामिनी जी के पति को गुजरे हुए 18 साल बीत गए थे ,,वो अपने पीछे कामिनी जी के अलावा डी दो बेटे प्रतीक और अमन और एक बेटी मधु को छोड़ गए थे,, कामिनी जी ने मेहनत से बच्चो को पाला था,,प्रतीक कामिनी जी का लाडला था क्यूंकि बड़ा बेटा था और मधु में उनकी … Read more

सहारा_ – गुरविंदर टूटेजा

  रंजना के जाने के बाद अनिकेत जी का मन घर पर बिल्कुल नहीं लग रहा था…बहू का रूखा व्यवहार उन्हें अंदर ही अंदर और तोड़ रहा था फिर एक दिन तो बहू की बातों में आकर बेटे ने भी बहुत गलत जवाब दिया…बस तब उन्होनें सोच लिया कि अब वो यहाँ नहीं रहेगें…अगले ही दिन … Read more

हीरा पन्ना! – सारिका चौरसिया

बहनें दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करती थी,, छोटी बड़ी के बगैर सोती नहीं थीऔर बड़ी ! छोटी को कहीं से आने में जरा सी देर पर परेशान हो जाती थी,, बेटियों ने मां को बचपन से ही अनेकों संघर्षों से जूझ कर भी उनके लिये उत्तम व्यवस्था बनाने की हर संभव कोशिश करते … Read more

नईहर – सारिका चौरसिया

बंदरिया के छोटे बच्चे सी सीने में चिपकी बच्ची लिये गले तक लम्बा घूंघट काढ़े वह चुप, ड्योढ़ी पर खड़ी थी,, ठसक गंवई बोली में तेज!तीखी आवाज में बोलती साथ आयी दूसरी औरत, ठिगनी सी…किन्तु तेजतर्रार थी। शीशम की बढ़िया कामदार कशीदा करी चांदी की मुठ जड़ी चौकी पर करमशाही अंदाज में मसनद के सहारे … Read more

कर्मयोगी –  रीता मिश्रा तिवारी

“रवि! बेटा कुछ बात करनी थी”?   “जी मां!” लैपटॉप पर नजरें गड़ाए हुए बोला “आपको इजाजत लेने की कब से जरुरत पड़ने लगी? कहिए कोई खास बात है?”   “हां बहुत ही खास है। बेटा! उम्र हो चली है मेरी..क्या पता कब बुलावा आ जाय। हमेशा लैपटॉप में घुसे क्या करते रहते हो?सुन भी … Read more

error: Content is protected !!