मेरा कुलदीपक – नीरजा कृष्णा
भीषण बारिश हो रही थी। अचानक ही मौसम इतना बदल गया था…रह रह कर बिजली की गड़गड़ाहट उनके दुखी मन को बिलो देती थी। एक तूफान बाहर हलचल मचा रहा था, उस तूफ़ान से भी ज्यादा तीक्ष्ण तूफान उनके ह्रदयपटल को झंझोड़ रहा था। आज उनका जन्मदिन था। ठीक एक साल पहले आज ही के … Read more