तमन्ना – कमलेश राणा

तमन्नाओं की अपनी एक अलग ही दुनिया होती है,,जहाँ न तो कोई बंदिश होती है और न ही कोई सीमा,,, कभी-कभी तो दुनियाँ को ठेंगा दिखाते हुए ये उन चीजों  के भी ख्वाब देखने लगतीं हैं,,जिसे पाना मुश्किल होता है,, जैसे कभी-कभी चट्टान के बीच में कोई पौधा मुंह चमकाता दिख जाता है,,ठीक उसी तरह … Read more

मुझे प्यार नहीं पैसा चाहिए –  मनीषा भरतीया

सरिता जी और उनके पति विमलेश जी दोनों मिलकर सुबह से ही आज फिर से अपने छोटे से आशियाने को सजाने में लगे हुए हैं क्योंकि आज उनकी बेटी को देखने फिर से लड़के वाले आने वाले हैं।  दरवाजे के धूल झाड़ते हुए सरिता जी ने अपने पति विमलेश से कहा, ” कोई फायदा नहीं … Read more

और माँ चली गई –  मंगला श्रीवास्तव

मोबाइल पर लगातार घंटी बज रही थी,पर किटी पार्टी की दीवानी मीनल गेम व तम्बोला खेलने में इतनी मशगूल थी की उसने बिना देखे ही  फोन को साइलेंट मोड़ पर कर दिया था। किटी के खत्म होने  के बाद भी वह सभी से बातें करि थोड़ी हँसी ठिठोली कर  सहेलियों को टाटा बाय- बाय कर … Read more

शादी की सालगिरह – अनुपमा 

प्रज्ञा ने जल्दी से चीनू के सारे कपड़े बदले और उसे झूले मैं लिटा कर जल्दी से रसोई मैं आ गई , बहुत देर हो गति थी आज उसे , चीनू को बुखार और दस्त हो रखे है इस वजह से उसे टिफिन बनाने मैं देर हो गई , मानव को बोला भी था उसने … Read more

मार देंगे ठोंक देगे – श्रीप्रकाश श्रीवास्तव 

कहानी उस  रोज मीटिंग में पंधारी आउट आफ कंट्रोल था। ‘‘कहिए तो साले को बाहर ठोंक देते है। सारी हेकडी निकल जाएगी।’’ उसके तेवर देखकर सारे स्टाफ मन ही मन हंसने लगे। सब जानते थे कि वह ऐसा कुछ करने वाला नही। विभागीय कार्यवाही में वह भी फंसा था लिहाजा साहब पर विश्वास जताने के … Read more

*बुलाती हैं जड़ें* – सरला मेहता

राणा विजयबहादुर यूँ तो इंग्लैंड से पढ़लिख कर साहब बन कर आए थे। किंतु सुकून उन्हें अपने गाँव में जाकर मिला। और पुश्तैनी ज़मीन पर खेती को प्राथमिकता दी।  बेटा रणवीर भी कई बार कह चुका है, ” दाता हुजूर ! आप भी शहर चलो और देखो आपके पोते पोती कितना आगे बढ़ चुके हैं। … Read more

आंखियो के कोर , “दर्द की दांस्ता ”  – रीमा ठाकुर 

आरू सुनो “ किसी की आवाज से आरु के पैर थाम गये!  वो आवाज जानी पहचानी लगी “ उसने अपना मुहं ढक लिया और जिस दिशा से आवाज आ रही थी, उधर घूम गयी!  वो जाना पहचाना चेहरा था!  मंयक वो धीरे से बोली “ अब तक मंयक उसके नजदीक आ गया था!      मयंक   … Read more

एक प्रतिशत सच – तरन्नुम तन्हा

सभी कैंडीडेट्स के इंटरव्यू देकर चले जाने के बाद रिसेप्शनिस्ट ने मेरा नाम पुकारा, ‘मिस तरन्नुम’, तो मैं उठ खड़ी हुई। साड़ी की प्लेट्स ठीक कीं, अपनी फाइल सम्भाली और इंटरव्यू कक्ष का द्वार खोला। “मे आई कम इन सर?” मैंने अंदर नज़र डाली तो तीन-चार जैंटलमैन अंदर बैठे हुए दिखे। “कम इन,” उनमें से … Read more

पुरुष – तरन्नुम तन्हा

भाई का फोन आया तो मेरा मन ज़ार-ज़ार रो उठा। हफ्ते भर बाद ही विवाह था, उनकी वाणी बिटिया का। यद्यपि ससुराल पक्ष की ओर से कोई मांग नहीं थी, तथापि भाई की कोरोना काल ही में नौकरी छूट जाने के कारण जैसा सोचा था, वैसा नहीं हो पा रहा था। नई नौकरी से बस … Read more

जागरूक – वंदना चौहान

माँ आपने घर के कागजात तैयार करवा लिए क्या ?कब करवा रही हो? रजिस्ट्री डेट तय कर दो । मैं उसी दिन सीधे रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँच जाऊँगी और हाँ अपने लॉकर की चाबी भी ले आना । मैं देखती हूँ इस भाभी को तुझे पलट कर जवाब देती है जब दोनों सड़क पर आ जायेंगे … Read more

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