सावन की पहली बारिश – डॉ पारुल अग्रवाल

बाहर बादल बहुत तेज़ गरज रहे थे, मूसलाधार बारिश हो रही थी। सर्दी की बारिश वैसे भी सबको घर के अंदर रहने को मजबूर कर देती है। दामिनी जी बड़ी सी हवेली में आग के सामने  आरामकुर्सी पर  बैठ अपने बीते दिनों को याद कर रही थी। एक समय कैसे ये हवेली हंसी और ठहाको … Read more

प्रचलन – गीतांजलि गुप्ता

गृह प्रवेश के बाद माँ ने बिंद्रा को आराम करने बैठक में बैठा दिया। दादा दादी की इच्छा थी कि वो अपने पोते की शादी गांव में करें और पिता जी ने उनकी बात मान भी ली। अमन अपनी शादी धूम धाम से बड़े होटल में करना चाहता था। बिंद्रा के पिता भी ये ही … Read more

बरसात की वो रात – संगीता अग्रवाल

” निखिल अब हम घर चलते है आप देवर जी का ध्यान रखियेगा सुबह ऑपरेशन से पहले मैं आ जाउंगी !” नीलम उठते हुए पति से बोली। ” नीलम इतनी रात को तुम दोनों वापिस कैसे जाओगी बारिश के कारण कुछ ज्यादा ही सन्नाटा है और दुबारा कभी भी बारिश आ सकती है !” निखिल … Read more

वो खौफनाक रात  ( डरावनी कहानी) – पूजा मनोज अग्रवाल

पिछले हफ्ते के दार्जिलिंग ट्रिप की वजह से मिताली को ऑफिस में ओवरटाइम करना था । काम की अधिकता से आज फिर वह ऑफिस से घर निकलने के लिए लेट हो गई थी । उसने जल्दी से अपना काम निपटा कर अपना बैग उठाया और छाता लेकर बाहर की तरफ आ गई । मौसम विभाग … Read more

एक बरसात- पश्चाताप वाली – तृप्ति शर्मा

काली घटा देखकर रूचि तेज रफ्तार से सीढ़ियां चढ़कर छत तक पहुंची बहुत से कपड़े धो डाले थे उसने आज। सावन का महीना था ना ,तो बादल और रिमझिम को तो मजा आता ही है लुका छुप्पी खेलने में, अक्सर रुचि को बहुत लुभाती थी यह लुका छुप्पी । क्यों ना भाए उसका पसंदीदा महीना … Read more

 सावन की झड़ी – प्रीति आनंद अस्थाना

  “लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है….”    “वाह दीदी! आज तो मौसम के साथ-साथ आपका मूड भी मस्त हो रहा है। कित्ता अच्छा गाते हो आप!” निधि का गाना सुन मीरा बोल उठी।   “हाँ, तभी तू बर्तन बजा-बजा के इतना मधुर संगीत दे रही थी!”   “क्यों मज़ाक़ उड़ा रहे हो … Read more

 सावन की झड़ी  – गीता वाधवानी

चारों और काले काले बादल। तेज बरसती सावन की झड़ी, ठंडी ठंडी मदमस्त हवाएं। मौसम तो बहुत सुहावना था, पर बरसात में भीग कर आए हुए ओम प्रकाश जी को किसी की याद दिला कर रुला रहा था।         उन्होंने अपने कपड़े बदले, गीले कपड़े रस्सी पर डालें और तौलिए से सिर पोंछते हुए अपनी स्वर्गवासी … Read more

सूनी तीज – रीटा मक्कड़

इन दिनों हर तरफ तीज की रौनकें लगी थी। सावन का महीना अपने साथ कितनी खुशियां लेकर आता है।हर तरफ हरियाली ही हरियाली। तीज की तैयारी में लगी सुहागिनें, मेहंदी लगाती, चूड़ियां पायल खनकाती कितनी सुंदर दिखती हैं न।  लेकिन सरोज के लिए तो इस बार का सावन जैसे उससे उसकी ज़िन्दगी की हर खुशी … Read more

तेज़ाब – नम्रता सरन “सोना”

“ये लो,,महारानी अब पानी भरने जा रही है- “ “अरे रात भर पता नहीं कहाँ मुँह काला करने जाती है, तो सुबह कहां से नींद खुलेगी,,,” “कुलच्छनी,, हुंह,,,,” श्यामली पानी लिए बगैर लौट रही थी, तभी मोहल्ले की स्त्रियों की ये फब्तियां उसके कानों में पड़ी। ये रोज़ की बात थी, श्यामली अनसुना करती हुई … Read more

 बरसात – उमा वर्मा

मनीषा दिल्ली से रांची के लिए सफर कर रही है ।दो महीने से अपने परिवार के साथ थी।बहुत अच्छा लगा ।सावन का महीना है और झमाझम बारिश भी हो रही है ।ये बरसात ना ,कितने अच्छी  बुरी यादें लेकर आई है ।बचपन में स्कूल जाती और पानी बरसता तो जान बूझ कर पानी में भीगती … Read more

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