जीवन की आशा – अभिलाषा “आभा”
मै कुछ दिनों के लिए सूरत आई हूंँ,अपने दूसरे बेटे पंकज के पास रहने के लिए। बड़ा बेटा पटना में रहता है। उसकी बहू पूनम से मेरी बनती ही नहीं। बड़ी मुश्किल से 3 महीने रह पाई उसके पास। अब ये छोटी रागिनी तो उससे भी तेज़ है। पंकज के साथ ही बैंक में नौकरी … Read more