अधूरी लकीरों का सफर – नमिता पंडित
“अगर, मगर और काश… इन शब्दों में जिंदगी नहीं जी जाती राघव। मैं मानती हूं कि हमने अपने सबसे अच्छे साल तकलीफों में गुजारे। मैंने अपने मायके का सुख हमेशा के लिए खो दिया और तुमने अपने शुरुआती संघर्षों में वो सुकून नहीं पाया जो एक नौजवान को मिलना चाहिए। लेकिन आज हम कहां हैं? … Read more