अपनो की कीमत – माता प्रसाद दुबे
चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। शहर के हर गली मोहल्ले में वीरानी छाई हुई थी। लोग अपने घरों में कैद हो गए थे। महामारी अपना विकराल रूप धारण कर चुकी थी। ऐसी स्थिति में भी प्रकाश को रोजाना अपने कार्य स्थल पर जाना पड़ता था। वह रेलवे में स्टेशन अधीक्षक के पद पर कार्यरत … Read more