मर्यादा – मीनाक्षी सिंह 

रवि – काजल तुम समझती क्यूँ नहीं ,,तुम्हे तुम्हारे घर वाले बिल्कुल प्यार नहीं करते ,,वो हमारे रिश्ते के लिए कभी राजी नहीं होंगे !  काजल – रवि ,,तुम्हे तो पता ही हैं बचपन में मुझे जन्म देते ही मेरी माँ खत्म हो गयी,,पिताजी ने पालपोष कर दस साल का किया ,,तब उन्हे कैंसर हो … Read more

झन्नाटेदार थप्पड़ – प्रियंका पाठक

 शशांक ने मां से कहा-“सौरभ की बहू को समझा दो कि अपने शरीर को अच्छी तरह से ढंक कर निकला करे। जवान और खुला शरीर बूढ़ी आंखों में भी गलत भावना भर देता है।” इतना कहकर शशांक बाहर चला गया, परंतु मां का चेहरा तन गया। उसने तिरछी निगाहों से स्नेहा की ओर देखा जो … Read more

हमारी अधूरी कहानी – आरती झा आद्या

नियति भोर में खिड़की पर खड़ी बिखरी ओस की बूँदें अपनी आँखों में समेट रही थी और सोच रही थी कि कल जिसे उसने मॉल में देखा, क्या वो विवेक ही था। सारी यादें चलचित्र की भाँति उसके सामने आ रही थी। क्या दिन थे वो भी, जब मिली थी विवेक से पहली बार। उसके … Read more

बेघर – विनय कुमार मिश्रा

यहां मत जाओ, वहां मत जाओ, इतनी देर क्यों कर दी! “उफ्फ” हर बात में रोक टोक, हर बात में नाराजगी। मैं भी गुस्से से खाना छोड़, घर से बाहर एक पार्क की तरफ बढ़ गया। मम्मी के लगातार फोन से परेशान होकर, मैंने अपना मोबाइल फोन ही स्विच ऑफ कर दिया। पार्क के गेट … Read more

मर्यादा के नाम पर…. संगीता त्रिपाठी

 लल्ला को जी भर कर कूटने के बाद भी पिता रामप्रसाद का जी नहीं भरा, पैरों से धकेल एक घूँसा और जड़ दिया। बचाने आई पत्नी और बड़ी बेटी तन्वी को भी कई हाथ पड़ गये। लल्ला के आँसू सूख गये, आखिर किस बात पर पिता ने उसे मारा, क्या कसूर था उसका। क्या बहन … Read more

इज्जत और मर्यादा के नाम पर बेटियों की बलि कब तक दी जाएगी ? – संगीता अग्रवाल 

“पता नही हमारी बच्ची कैसी होगी कई दिन से फोन भी नही आया उसका मैने मिलाया तो उठा नही !” सुगंधा जी पति राघव जी से बोली। ” अरे व्यस्त होगी तुम भी ना बेवजह चिंता करती हो !” राघव जी बोले। ” रुको मम्मी मैं मिलाता हूँ दीदी को कॉल !” तभी बेटा रिजुल … Read more

सार्थक पहल – कमलेश राणा

शाम को जब आकाश घर आया तो महक ने चाय बनाते हुए उसे याद दिलाया।  आशु की यूनिफॉर्म छोटी हो गई है, किराने का सामान भी खत्म हो रहा है, कल तो बाजार चलना ही पड़ेगा। कितने दिन से टाल रहे हो तुम, उसको रोज स्कूल में डांट पड़ती है।  महक मैं तो नहीं जा … Read more

सच्चा प्रेम – प्रेम बजाज

“एक्सक्यूज़ मी “,.  … आशा के पीछे से आवाज़ आती है , जैसे ही आशा मुड़कर देखती है तो हैरान हो जाती है , “अरे आप निलेश जी हैं ना, फेमस कार्टुनिष्ट “   “जी और आप आशा वोहरा जी मशहूर लेखिका , मैं कब से आप को देख रहा था  पहचानने की कोशिश कर रहा … Read more

” ढहते मर्यादा के बांध ” – डॉ. सुनील शर्मा

तटबंध कितने भी सुदृढ़ हों, यदि कहीं एक जगह भी कमज़ोरी हो, तो सैलाब को फैलते देर नहीं लगती. ऐसे में विनाश अवश्यंभावी है. नीता को जब बॉस ने आउट आफ टर्न प्रमोशन की सूचना दी तो वह विश्वास नहीं कर पाई. एम बी ए करने के बाद आकांक्षाओं से भरी नीता ने बड़े शहर … Read more

गुस्से और खुशी में जुबान की  मर्यादा जरूरी है। – स्मिता सिंह चौहान

आजकल कहां सच्चे रिश्ते मिलते हैं,मुंह के आगे कुछ और पीठ पीछे कुछ और होते हैं।”मीनू ने अपनी बुआ से रिश्तो के ऊपर अपने विचार रखते हुये कहा। “ऐसा नहीं है,बस आजकल मैं बड़ा ,मैं बड़ा वाली भावनाओं का बोलबाला ज्यादा है ।रही बात आगे कुछ और पीछे कुछ और वो शायद हर कोई एक … Read more

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