भ्रम…. घर की मालकिन हो तुम…..!! – भाविनी केतन उपाध्याय 

नए घर की नेम प्लेट पर अपना नाम देखकर खुशी से झूम उठी गरिमा…. पर ये खुशी चंद सैकड़ों तक ही सीमित रही…. जैसे ही गरिमा सपनों की पंखों को बंद कर वास्तविकता की धरातल पर उसने क़दम रखा उसके सपने चूर चूर हो गए। आंखों में आसूं लिए अपने नाम पर हाथ फेरते हुए … Read more

हम नहीं चाहते … – कंचन श्रीवास्तव 

कुछ दिनों , नहीं नहीं कई सालों तक यानि यही कुल तीन चार साल तक शब्बो ने देखा ,बहू सबके लिए चाहे वो खाना हो या नाश्ता सब कुछ बराबर से परोस देती है  ‘ और ये कहकर की हम बाद में का लेंगे ‘ खुद के खाने को टाल जाती है। फिर कभी कम … Read more

नियति का न्याय – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज अपराजिता को उसके ही नाम पर लिखी पुस्तक की एक समाचार पत्र में काफी प्रशंसा पढ़ने को मिली। जिसे पढ़कर वो अपने आप को नहीं रोक पाई, उसने तुरंत अमेजन से पुस्तक को डाउनलोड किया और रात के खाने के बाद पढ़ने बैठ गई। लिखा तो उस पुस्तक को किसी अज्ञात लेखक ने था … Read more

” अन्याय में न्याय की जीत ” – गोमती सिंह

वह कुशाग्र बुद्धि की लड़की थी, अध्ययन में उसकी अत्यधिक रूचि थी।  उच्चतर माध्यमिक की पढ़ाई के समय से ही वह विज्ञान विषय पर विद्या अध्ययन कर रही थी । कक्षा बारहवीं की परीक्षा उसने 80% अंक से उत्तीर्ण किया । अब उसकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला लेने का समय आ गया था , … Read more

नफरत –  अंतरा

शहर में एक बहुत खूबसूरत ऊँची सी इमारत थी …इतनी  ऊंची के निगाह उठा कर देखो तो सर  की टोपी जमीन पर गिर जाए…. इतनी खूबसूरत कि एक बार में खूबसूरती निगाह में ना भर पाए…. जब रात में उस में रोशनी होती थी तो आंखें  चौंधिया जाती थी ।  इतनी खूबसूरती के बाद भी … Read more

*जीवन के खेल* –  मुकुन्द लाल

अपने गांव के बाहर से गुजरने वाली रेलवे लाइन से हटकर कुछ दूरी पर स्थित चबूतरे पर बैठा सुदीप ट्रेन का इंतजार कर रहा था। अवसाद और क्षोभ की लकीरें उसके चेहरे पर साफ दिखलाई पड़ रही थी।  प्रचंड धूप की तपिश के कारण चतुर्दिक सन्नाटा छाया हुआ था। दो बजने वाले थे किन्तु एक … Read more

*नीयत* –  मुकुन्द लाल

 ‘राम नाम सत्य है’ कहता हुआ कंँधों पर अर्थी उठाये कुछ लोगों का झुंड अचानक श्मशान घाट जाने वाले मार्ग पर न जाकर उस बाजार के एक व्यवसायी की दुकान के पास ठहर गया तो दुकानदारों को हैरत का ठिकाना नहीं रहा।  लोग इस अजीब कारनामों को देखने के लिए वहांँ पर इकट्ठे होने लगे, … Read more

जन्मदिन – संजय मृदुल

कल रक्षा का जन्मदिन था। छोटी बच्ची ही तो है अभी छह साल की। उसे क्या समझ की माहौल खराब चल रहा है, महामारी फैली हुई है, लॉक डाउन है। उसे तो बस अपने जन्मदिन से मतलब और उसकी पार्टी से। महीने भर से प्लानिंग कर रही है वो।    दो तीन दिन से तो जिद … Read more

मै अन्याय नहीं सहूंगी। – अर्चना खंडेलवाल 

गलती इंसान के जीवन का एक हिस्सा है, और मुझसे भी गलती हो गई, ये गलती मैंने तो नहीं की थी, कहते हैं समय हर घाव भर देता है पर निशान तो रह ही जाते हैं, पिछले महीनों हुई घटनाएं रोली के दिमाग में घुमने लगी। जब वो कॉलेज में नई थी तो कॉलेज देखकर … Read more

“अन्याय के विरोध में न बोलना क्या न्याय है???? – अमिता कुचया

नंदिनी बहुत ही प्रतिभाशाली लड़की है, उसे कोई भी काम करने में झिझक नहीं होती।वह बहुत ही खुश होकर हर काम मायके में भाभी के साथ करातीं थी।उसे नहीं लगता था कि भाभी को पूरा श्रेय जाएगा•••• उसकी ऐसी सोच नहीं थी।वह हमेशा हर काम में चाहे किचन का हो या ऊपरी•••सब काम में आगे … Read more

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