सोने के कंगन – मधु वशिष्ठ

आज मालती जी की 50वीं सालगिरह थी। भारी भरकम साड़ी और गहने पहनी हुई इस उम्र में भी वह दुल्हन सी प्रतीत हो रही थीं। होटल में जाने के लिए सब बच्चे बाहर गाड़ी में दादू के साथ बैठे हुए दादी के आने की इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक मालती जी को कुछ याद … Read more

खूनी कंगन

सौदामिनी नही रही! जैसा दमदार नाम वैसा ही दमदार व्यक्तित्व था।उनके नही रहने की खबर जो भी सुनता मन ही मन चैन की साँस लेता। सौदामनी का भरापूरा घर था।पति बेहद सीधे-सरल,चार बेटे-बहू दो बेटी-दामाद,छः पोते, दो नाती,दो पोतियाँ और तीन नातिन थी। बड़ी सी हवेली,सैकड़ो बीघे खेती,धन संपत्ति से घर भरा था। घर के … Read more

सोने के कंगन – सुदर्शन सचदेवा

नवेली बहू सान्या अभी-अभी इस घर की दहलीज़ पर आई थी। शादी को एक महीना भी नहीं हुआ था। उसकी मुस्कान में अब भी नई ज़िंदगी की चमक थी, पर मन के कोने में एक हल्की सी झिझक भी। सासु माँ कमला देवी सख्त मिज़ाज की थीं — घर का हर काम उनके तय नियमों … Read more

अनमोल तोहफा

“देख लता,मैं अपनी बहु के लिए सोने का सेट लाई हूँ उसका पहला करवाचौथ है।कैसा लग रहा है?” रमा ने लता को सेट दिखाते हुए पूछा। “बहुत सुंदर लग रहा है।कहाँ से खरीदा है?”लता ने उत्सुकता से पूछा तो रमा चहकते हुए बोली-“अरे वो तेरे घर के पास एक नया शो रूम खुला है,वहीं से … Read more

खानदानी कंगन – शुभ्रा बैनर्जी

दीपावली की छुट्टियों में बेटी दस दिनों के लिए आ रही थी।मधु को बड़ा आराम मिल जाता था,बेटी के आने से।पूजा -पाठ की पूरी तैयारी अपने जिम्मे ले लेती थी वह।बचपन से मां के कामों में हांथ बंटाती थी वह।बिना बोले भांप जाती थी मां के मन की पीड़ा।बेटा(राघव) भी खुश था बहन के आने … Read more

सोने का कंगन – मीनाक्षी गुप्ता

सरकारी स्कूल की टीचर संगीता जी का घर प्रेम और तालमेल से भरा था। बेटा अमन एक कंपनी में कार्यरत था, दो साल पहले आई बहू राशि ने घर की ज़िम्मेदारियाँ खुशी-खुशी संभाल ली थीं, और बेटी आंचल की शादी की तैयारियाँ ज़ोरों पर थीं। संगीता जी का स्वभाव सरल था, और राशि भी उतनी … Read more

सगा रिश्ता – लतिका पल्लवी

मै जा रही हूँ मुझे नहीं रहना है तुम्हारे घर मे। यह कहकर सोनम अपना सूटकेश उठाकर सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी। पीछे पीछे उसकी माँ भी उससे बोलते और मनाते हुए आ रही थी।बोल ना ऐसा क्या हुआ जो तु इतनी गुस्सा हो गईं? कुछ नहीं तुमसे कहना बेकार है तुम नहीं समझोगी। क्या … Read more

सोने की कंगन – मनीषा सिंह 

 तुम्हारा दिमाग तो सही है?  पता भी है सोने की भाव का?एक लाख से ऊपर हो गया ।  मेरी औकात नहीं•• इसलिए तुम इसे भूल जाओ।  देव प्रसाद अपनी पत्नी मालती से बोलें ।  बहुत सोचा है तभी बोल रही हूं! अब तो मुझे #सोने की कंगन इस धनतेरस पर चाहिए ही चाहिए!  वह जिद … Read more

अपनों का दिया दंश – शिव कुमारी शुक्ला 

निशी बेटा कब आ रही हो फोन उठाते ही बुआ की आवाज सुनाई दी। बस बुआ जितनी जल्दी हो सके निकलने की कोशिश करती हूं। हां बेटा जल्दी आ जा भाई की शादी में आकर थोड़ा हाथ बंटा शापिंग भी करनी है। हां बुआ आती हूं। हां सब आना समीर को भी साथ ले आना। … Read more

मैं माफ़ी नहीं मांगूंगी – लक्ष्मी त्यागी

तुम्हें बस एक बार माफ़ी मांगनी है, रागिनी !इसमें इतना मुश्किल क्या है?” — माँ की आवाज़ अब भी उसके कानों में गूंज रही थी। किन्तु रागिनी जानती थी, यह ‘माफ़ी ’ सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि उसकी इज़्ज़त की कब्र  होगी। रागिनी एक तेज़, आत्मसम्मान वाली लड़की है। कॉलेज में उसकी पहचान उसकी ईमानदारी … Read more

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