बोया, वो पाया – सुदर्शन सचदेवा
“मम्मी, ये पुरानी सिलाई मशीन कब तक संभालकर रखोगी? अब तो कोई इसका इस्तेमाल भी नहीं करता।” संजय ने स्टोर रूम की धूल साफ़ करते हुए झुंझलाकर कहा। नीरा मुस्कुराई, मशीन पर हाथ फेरा और बोली, “कुछ चीज़ें सिर्फ़ सामान नहीं होतीं बेटा… उनमें किसी की पूरी ज़िंदगी सिलाई हुई होती है।” संजय ने बात … Read more