प्यार के दो मीठे बोल..बुजुर्गों का सहारा” – कमलेश आहूजा

सरोज के पति छोड़ के क्या गए,कि प्यार के दो बोल के लिए तरस गई थी वह।अब तो घर में जिसे देखो वही उसे काटने को दौड़ता था।बेटा रोहित ऑफिस के काम में इतना व्यस्त रहता है कि उसे सरोज से बात करने का समय ही नहीं मिलता और अगर कभी सरोज आगे बढ़कर कहे … Read more

अकेलापन – लतिका श्रीवास्तव

वह बूढ़ी औरत मुझे रोज गली के प्रवेश द्वार के बगल में बनी एक कोठरी नुमा घर के सामने ही बैठी मिलती।बहुत उदास क्लांत थकी सी लगती। अविनाश अपनी अतिव्यस्तता की जल्दबाजी में चाह कर भी क्षणांश के लिए भी वहां ठहर नहीं पाता था।लेकिन प्रतिदिन की उसकी वही उसी जगह की उपस्थिति की आदत … Read more

प्यार – खुशी

रागिनी अपने माता पिता की लाडली बेटी थी।शादी के 6 वर्ष बाद होने के कारण माता पिता उस पर जान लुटाते थे।दादा दादी दीवानचंद और करुणा भी उसे प्यार करते थे।मां सीता उसे सही गलत का फर्क बताती पर पिता श्याम का कहना था मै अपनी बेटी के लिए घर दामाद लाऊंगा जो इसके साथ … Read more

प्यार के दो मीठे बोल – तोषिका

एक कमल नाम का बूढ़ा आदमी खिड़की से ढलती शाम देख रहा था, जैसे उसका भी जाने का समय भी बस निकट ही हो। तभी पीछे से उनके बेटे प्रणव की भारी आवाज़ आई “पापा आकर खाना खा लीजिए, ठंडा हो जाएगा।” तभी उसने कहा कि उसको भूख नहीं है, अभी वो खाना नहीं खाना … Read more

प्यार के दो मीठे बोल – डाॅ संजु झा

वक्त का कोई भरोसा नहीं है,वह कब किस पर मेहरबान हो जाऍं और कब किसी की जिंदगी को तबाह कर दे ,कुछ कहा नहीं जा सकता है!70 साल की रिश्ते की बुआ की मौत का समाचार सुनकर ऑंखें नम हो उठीं, परन्तु दिल में एक सुकून का भी एहसास हो रहा था। माता-पिता और परिवार … Read more

गलती का एहसास –  गीता वाधवानी

 आशा देवी दहाड़े मारकर रो रही थी। उनकी बहू निशा का अचानक देहांत हो गया था। बेचारी अच्छी भली बैठी हुई खाना खा रही थी और हार्ट फेल हो गया। आशा देवी का पोता अभी सिर्फ 5 वर्ष का था। वैसे तो आशा देवी को बहू से कोई खास लगाव नहीं था, लेकिन उन्हें अपने … Read more

प्यार के दो मीठे बोल – अमिता कुचया

सुबह के 8 बज रहे थे, लेकिन सिंग साहब की रसोई में किसी युद्ध मैदान जैसी हलचल मची थी। एक तरफ गैस पर चाय चढ़ रही थी, दूसरी तरफ दूध उबलने की कगार पर था, तवे पर परांठे सिक रहे थे और इस सब के बीच खड़ी थीं स्नेहा – घर की बड़ी बहू। अचानक … Read more

जख्म – खुशी

रेवती एक स्कूल में अध्यापिका थी परिवार में पति महेश जो दफ्तर में क्लर्क थे और उनकी दो संताने राहुल और प्रीति थे।दोनो बच्चें मां के स्कूल में ही पढ़ते थे।जब तक राहुल स्कूल में था कक्षा आठवीं तक वो एक आज्ञाकारी और पढ़ाकू बच्चा था पर जैसे ही वो नवी में आया उसका व्यहवार … Read more

बहू का सुख पाने के लिए पहले सास को भी अपना रवैया ठीक करना पड़ेगा। – गीतू महाजन

इस बार जब पल्लवी मायके आई तो देखा कि नए पड़ोसियों से उसकी मां नंदिनी जी की अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी।उन लोगों का घर में आना जाना भी था और जब पल्लवी आई तो पड़ोस की रीमा आंटी उससे बहुत ही आत्मीयता से मिली ऐसे जैसे उसके बारे में बहुत कुछ जानती हो।दो-तीन … Read more

पहला पहला प्यार – मंजू ओमर 

रश्मि क्या तुम मुझसे मिलने होटल में आओगी, रश्मि चुप थी।बोलो रश्मि तुम्हें मेरे प्यार की कसम। नहीं सलिल तुम मेरे घर आ जाओ मिलने मैं ऐसे कैसे अकेले आ सकती हे। नहीं यार रश्मि वहां तुम्हारे पति देव रहते हैं खुल कर तुमसे बात नहीं हो पाती है।अब कौन सी खुलकर बात करनी है … Read more

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