सबसे बड़ा धन परिवार। – मधु वशिष्ठ

————– “प्रिया और विकास”, अभी छह महीने पहले ही तो दोनों की शादी हुई है।  प्रिया की मां की मृत्यु बचपन में ही हो गई थी पिता के दूसरी शादी करने के कारण दसवीं  के बाद की सारी पढ़ाई उसने हॉस्टल में रहकर ही करी थी। अत्यंत आत्मविश्वासी और स्वावलंबी   प्रिया ने नौकरी भी  … Read more

दोस्त या दुश्मन – एम. पी. सिंह 

लबान गाँव के संपन्न किसान गोबरी लाल के दो बेटे थे, मोडू लाल और लटूर लाल. कहने को तो वो दोनों सके भाई थे, पर उनका रिस्ता दोस्तों जैसा था, क्योंकि उम्र में ज्यादा अंतर नहीं था. स्कूल में अगर किसी एक को कोई कुछ बोल देता, तो दूसरा उससे लड़ने लगता. दोनों एक दूसरे … Read more

अहंकार – रश्मि प्रकाश 

“यह क्या कर दिया तुमने बिमला? तुम्हें अकल नहीं है? यह मेरी ‘इंपोर्टेड’ क्रॉकरी थी। जानती हो इसकी कीमत क्या है? तुम्हारी साल भर की तनख्वाह भी कम पड़ जाएगी इसे खरीदने में!” काव्या की चीख से पूरा घर गूँज उठा। हॉल में सन्नाटा पसर गया। कांच के बारीक टुकड़े फर्श पर बिखरे हुए थे … Read more

आत्मसम्मान का सुकून – गरिमा चौधरी 

“सुनो विकास, रिटायरमेंट के बाद अब प्रोविडेंट फंड का जो पैसा आया है, उसे मैंने फिक्स्ड डिपॉजिट में डाल दिया है। ब्याज से और मेरी पेंशन से घर का राशन और बिजली का बिल तो निकल जाएगा, लेकिन अब ऊपर के खर्चे, जैसे—गाड़ी की सर्विसिंग, इंटरनेट का बिल, और कभी-कभार की दवा-दारू… मैं चाहता हूँ … Read more

सबसे बड़ा धन : परिवार – संजय सिंह

रामस्वरूप रोजाना की तरह मेहनत- मजदूरी करके ,शाम को घर लौटे ।घर पर पत्नी अपने रोजमर्रा कामों में व्यस्त थी ।रामस्वरूप के आने का उसे इल्म हो गया ।दौड़ती दौड़ती रसोई घर से पानी का गिलास भरकर, रामस्वरूप के सामने पेश कर दिया ।रामस्वरूप ने थके हाथों से पानी का गिलास पकड़ कर  पी लिया … Read more

सबसे बड़ा धन परिवार – तोषिका

कुछ दिनों में धनतेरस था प्रिया भागी भागी अपनी मां के पास जाके पूछती है “मां इस बार धनतेरस के लिए हम क्या धन लेने चले सुनार के पास?” तभी उसकी मां प्यार से समझती हुई बोली “प्रिया बेटा! धनतेरस का मतलब यह नहीं होता कि घर में धन ही आना चाहिए, कुछ लोग नए … Read more

हां हो गई हूं मैं स्वार्थी – मंजू ओमर 

तुम इतनी स्वार्थी कैसे हो गई  निशा।इस उम में जबकि मालती जी की ये हालत है , तुम उनको अकेला छोड़कर चली आई । तुम्हारा मन नहीं कांपा ये सोचकर कि उन पर क्या बीतेगी। निशा की बूढ़ी मौसी ने निशा से कहा। हां मौसी मैं हो गई हूं स्वार्थी,अब मेरा वहां क्या रह गया … Read more

भजन संध्या बनाम किटी पार्टी – शुभ्रा बैनर्जी 

महिमा की अनुशासन प्रियता व चुगली ना करने की आदत का परिणाम ही था कि,अधिकतर महिलाओं के सामूहिक आयोजनों में उसे बुलाया नहीं जाता था। ऊपर से स्पष्ट वादी शिक्षिका की साफ- सुथरी छवि का कवच भी था महिमा के साथ। अक्सर मोहल्ले की तथाकथित सहेलियां पिकनिक पर जाती रहती थीं,और महिमा को बाद में … Read more

*भाई जैसा मित्र नहीं ना भाई जैसा शत्रु…* – तोषिका

हेलो! प्रणाम मां दिया को लड़का हुआ है। मीरा को भी यह खुशी सुना देना वो भी इंतजार कर रही होगी।तभी मीरा पूछती है फोन पे कौन है दादी? दादी बोली, मीरा बेटा बधाई हो तुम अब एक बड़ी बहन बन गई हू। अब तुम्हारा एक छोटा भाई है जिसके साथ तुम खूब खेल सकती … Read more

भाई जैसा मित्र नहीं भाई जैसा दुश्मन नहीं – बबीता झा

रात 8:00 बज रहे थे। विनोद बरामदे पर टहल रहा था और बार-बार घड़ी की ओर देख रहा था। घड़ी में 8:00 बज गए। संजू अभी तक घर नहीं आया है। उसको तो 5:00 बजे तक घर आ जाना चाहिए था ना। मां, उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। सब दोस्तों से भी … Read more

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