एक बहू की समझदारी – राहुल कुमार

परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल सजाया है, बिखरते हुए एक आँगन को प्रेम से पुनः संवारा है। बहू की पावन समझदारी ने मिटा दिया हर फासला, अनुभव और नई उमंगों का अद्भुत सेतु बनाया है। ​बनारस के पुराने मोहल्ले में स्थित शर्मा निवास अपनी पुरानी ईंटों और लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजों के लिए जाना … Read more

जो तुमको हो पसंद – लतिका श्रीवास्तव

शालू कितनी देर लगाओगी नाश्ता लाने में दुकान से ग्राहक लौट जाएंगे कैलाश जी ने थोड़ा खीज कर कहा तो शालू रसोई से प्लेट लिए भागती आती दिखाई दी। तुम्हे पता है मेरी दुकान सबसे पहले खुलती है।लेकिन जब मैं ही घर से देर से निकलूंगा तो कैसे खुलेगी… कैलाश जी ने प्लेट में रखा … Read more

परवरिश की मर्यादा – शुभ्रा बैनर्जी 

बिस्तर से लग चुकीं थीं मां।छाती में कफ बैठ गया था।खांसी ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही थी।सुधा ने हर जतन किए, पर स्वास्थ्य में सुधार हो ही नहीं रहा था। होमियोपैथी की दवा भी खिलाई, जो कि उन्हें कभी पसंद नहीं थी। अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा, ऐसा डॉक्टर ने बोला।सुधा हर … Read more

ममता की कोई कीमत नहीं ! – डाॅ संजु झा

रामलाल की नींद आधी रात को अचानक किसी बच्चे के रोने की आवाज से खुल गई।वे एक नजर अपनी सोई हुई पत्नी और नमिता पर डालते हैं और चुपके से दरवाजा खोलकर बाहर निकल जाते हैं। दिसंबर माह में कड़ाके की ठंढ़ पड़ रही थी। उन्होंने खुद को ऊनी शाॅल से अच्छी तरह लपेटा और … Read more

भरोसा – खुशी

सुलेखा अमीर मां बाप की इकलौती बेटी थी।घर में लक्ष्मी पानी भरती थी।उसे माता पिता ने बैंगलोर जैसे शहर में पढ़ने भेजा ।पढ़ने में होशियार,सुंदर समझदार  ऐसी थी सुलेखा कॉलेज में आई तो उसकी पहचान जतिन से हुई।जतिन का परिवार बड़ा था। माता पिता श्याम लाल और रज्जो दो भाई बहन सुनील और पूजा । … Read more

भरोसा – मधु वशिष्ठ

ऑफिस में इतने साल बाद अचानक गिन्नी को देखकर मैं हैरान रह गई। आप!!!! नहीं तुम!!! गिन्नी?? हां जी , गिन्नी !!कह कर वह खिलखिला कर हंस दी। शायद हम 20 साल बाद मिल रहे थे। एक समय हम दोनों की ही नई नौकरी लगी थी, 3 साल बाद दोनों का तबादला अलग-अलग विभाग में … Read more

प्यार और भरोसा – संगीता त्रिपाठी 

   रीमा दो दिन से फोन नहीं उठा रही थी ,उसके बाद फोन स्विच ऑफ आने लगा ,मयंक ने सोचा शायद घर में व्यस्त होगी और फोन चार्ज नहीं कर पाई होगी ,लेकिन जब चार – पांच दिन बीत गए रीमा का फोन नहीं आया तो मयंक का माथा ठनका,रोज बात करने वाली रीमा का अचानक … Read more

*भरोसा* – तोषिका

तुम्हे मुझ पर *भरोसा* है ना? अपनी पत्नी रेखा का हाथ पकड़ते हुए अंकित बोला। खुद से भी ज्यादा। मुझे पता है, आप जो भी करोगे वो सही ही करोगे। तो फिर चलो यहां से, जल्दबाजी में अंकित बोला। रेखा बोली “कहा जाना है, अभी तक तो रिया भी स्कूल से नहीं आई है।” वो … Read more

ममता की कोई कीमत नहीं होती ! – सुदर्शन सचदेवा

ममता की कोई कीमत नहीं होती मदर्स-डे का दिन था। पूरा शहर रंग-बिरंगे पोस्टरों, फूलों और ऑफरों से सजा हुआ था। “मां के लिए यह गिफ्ट खरीदिए…” “मां को स्पेशल महसूस कराइए…” हर दुकान पर भीड़ थी। उधर, राहुल भी ऑफिस से लौटते हुए सोच रहा था कि इस बार मां को क्या दूं। पिछले … Read more

इंसानियत का भरोसा – गीता वाधवानी

 नंदिनी अपने दोनों बच्चों के साथ अपने घर की दीवारों को देखकर लगातार रो रही थी। दोनों बच्चे उदास थे और उसकी तरफ देख रहे थे। उसका बेटा अमित लगभग 16 साल का था और बेटी कनक 10 साल की।   तीनों मिलकर घर का सामान पैक कर रहे थे और उठाकर आंगन में रखते जा … Read more

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