दोहरा मापदंड – नंदिनी

नमन ओर पायल ने घूमने जाने का प्लान बनाया इस बार वो अपने मां पापा को भी साथ ले जा रहा था घुमाने के लिए , उनके लिए तो मानो खुशी का ठिकाना ही नहीं था , जब भी जिक्र चलता किसी के सामने बड़े खुश होकर बताते नमन घुमाने ले जा रहा है शिमला … Read more

अटूट रिश्ता – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

मैं शिखा नई नई कालोनी में शिफ्ट हुई थी… कालोनी में दो सौ चौदह मकान थे। मुझे कार्नर का मकान मिला था इसलिए मकान के बाहर स्पेस ज्यादा था। वर्क लोड बढ़ जाने से मेरी तबीयत खराब हो गई थी। शाम का समय था मैं आराम कर रही थी तभी एक  अधमरी कुतिया घसीटते घसीटते … Read more

जब जागो तभी सबेरा  – कमलेश राणा

अरे विभा बड़े दिनों बाद दिखाई दी हो आज, तुम तो बिल्कुल ईद का चाँद हो गई हो।  बस घर गृहस्थी के कामों से कहाँ फुर्सत मिलती है यार.. वैसे तुम्हें शायद मालूम नहीं कि मैं सुमित के साथ दुबई शिफ्ट हो गई हूँ।  अरे वाह तो मेरी सखी परदेशी हो गई है अब.. पर … Read more

अनदेखा सपना – स्मिता टोके “पारिजात” 

शॉप में साड़ियों का पेमेंट करके जैसे ही मैं पीछे मुड़ी सामने जाना पहचाना चेहरा देखकर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा । दमकता चेहरा उसकी खुशहाल ज़िंदगी की कहानी कह रहा था । सहसा वह बुझी-बुझी सी रहनेवाली अनुभा याद आ गई ।  “मनू ,कहाँ खो गई ?” अनुभा मुस्कुराते हुए बोली । “अरे, … Read more

बाबूजी – पूजा मनोज अग्रवाल

अरे साहब चलो ना  ! ,,, मेरा  रिक्शा खाली है ,,,मैं ले चलूंगा आपको ,,।  नहीं भाई नहीं ,,,! तुम्हारे हाथ में चोट लगी है , और मुझे समय पर पहुंचना है,, तुम रिक्शा धीरे चलाओगे तो मुझे देरी हो जाएगी । बाबूजी ,,, मैं आपसे विनती करता हूं  ,,,आप मेरी रिक्शा में बैठ जाइए … Read more

प्यार से बंधी रिश्तों की डोर” – कविता भड़ाना

“हाय कितनी गर्मी हो रही है” पसीने को पोंछती हुई माही बड़बड़ाते हुए बोली…दोपहर के 2 बजे अप्रैल माह की चिलचिलाती गर्मी में माही अपनी 10वर्षीय बेटी परी को लेने घर से थोड़ी दूर बस स्टॉप पर आई थी, उसके जैसे और भी कई पैरेंट्स अपने अपने बच्चों को लेने आए थे, गर्मी से सबका … Read more

दर्द – गीता वाधवानी

अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी मृदुल स्वभाव वाली संध्या को कहीं ना कहीं यह आभास था कि उसका जीवन अब शेष नहीं है।  बिस्तर पर पड़े पड़े, उसे कुछ दिन पूर्व की बात स्मरण हो आई, जिस दिन उसके पति से उसकी छोटी सी बात पर कुछ कहासुनी हो गई थी और वह गुस्से में … Read more

माँ – कमलेश राणा

क्यों आज इतनी जल्दी खाना क्यों बन रहा है शुभा। वो क्या है न माँ निधि के घर टी वी आया है तो उसने मुझे बुलाया है चित्रहार देखने इसीलिए जल्दी जल्दी काम निपटा रही हूँ वैसे आप भी चलो न इन दिनों उसकी दादी आई हुई हैं गांव से उनसे भी मिलना हो जायेगा। … Read more

दूर के ढोल सुहाने होते हैं – के कामेश्वरी

वेंकट लिफ़्ट में चढ़े देखा कि सेकंड फ़्लोर में रहने वाले जीवन जी अंदर हैं दोनों ने एक दूसरे को हेलो कहा ।  जीवन ने कहा— वेंकट जी आपका बेटा कैसा है कहाँ रहता है ।  वेंकट ने कहा कि— जीवन जी वह तो ठीक है और हमारे साथ ही रहता है ।  ग्राउंड फ़्लोर … Read more

 शिवन्या – मीनाक्षी सिंह

कहानी नंबर 1 गांव में चारों तरफ पापड़ ,गुजिया ,मठरी विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनना शुरू हो गए थे ! न्नही शिवन्या  का भी मन ललचा रहा था ! दौड़ती हुई अपनी अम्मा (माँ ) के पास आयी और बोली – अम्मा ,तुम पापड़ और गुजिया क्यूँ नहीं बनाती कभी ! ना ही नये कपड़े … Read more

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