सुनहरा प्यार –   संगीता श्रीवास्तव

बात उन दिनों की है, जब नैना और निशांत स्कूल की पढ़ाई के बाद कॉलेज में दाखिला लेने पहुंचे थे। दोनों अपने -अपने पापा के साथ आए थे। नैना और निशांत के पापा जब आमने-सामने दिखे, तो दोनों एक साथ बोल पड़े थे, अरे…… तुम ….. तुम … कहते हुए एक दूसरे से लिपट गए … Read more

सिमटती दूरियाँ – स्नेह ज्योति

ट्रिन-ट्रिन घर की बेल बज़ी,दरवाज़े पे शोर मचा छोटू-छोटू नाम पर बहुत ऊँचा उद्घोष हुआ।तभी पापा श्री सरपट दौड़ते हुए बाहर निकले कही कोई और ना सुन ले ये नाम,पापा ने फटाफट दरवाज़ा खोल माँ को गले लगाया।आप तो कल आने वाली थी अम्मा! ,अगर आज आ गई तो क्या कचहरी लगाओगे।नहीं अम्मा,अंदर आओ ।मम्मी … Read more

नियति का‌ खेल – संगीता श्रीवास्तव

“आओ बैठो,” उसने गहरी  सांस लेते हुए कहा था। मैं कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठ गया ।मैं सोचने लगा, क्या यह वही आमोद है जो मिलते ही गर्मजोशी से गले मिलता था और आज, ऐसा क्यों…..?    मैं उससे 20 साल बाद मिला था ग्रेजुएशन करने के बाद उसकी नौकरी सेंट्रल गवर्नमेंट में हो गई और … Read more

समर्पित पति – मुकुन्द लाल 

सागर, सेठजी के व्यवसायिक प्रतिष्ठान में बैठकर कुछ काम कर रहा था कि अचानक उसका मोबाइल बजने लगा।   उसने पूछा, “हैलो!… कौन हैं?”   “मैं मानसिक आरोग्यशाला से बोल रहा हूँ, आपका पेशेंट ठीक हो गया है। आकर जल्द ले जाइये, यहाँ वह बहुत परेशान है। घर जाने के लिए छटपटा रही है।”  “अच्छा!… मैं कल … Read more

 बेबसी – बालेश्वर गुप्ता

 मुन्ना अब तुम बिन रहा नही जाता रे।लौट आ,हमारे जीवन के कितने दिन बचे हैं, आ जायेगा तो परिवार के बीच मरने की भी संतुष्टि होगी।         पापा रोज ही तो वीडियो काल पर मिलते हैं, हम दूर कहाँ है, आप ही टाल जाते हैं, मैं तो आपको हर साल दो तीन महीने अपने पास रहने … Read more

घर लौट  चलो सुमि – पूनम अरोड़ा  

  जब  सुमेधा  मिनी  के  साथ  नई  दिल्ली  स्टेशन  पर  पहुँची  तो  झेलम एक्सप्रेस  पहले ही  वहाँ  खड़ी  हुई  थी। कोच नंबर देखकर  वे उस  पर चढ़ गए और सीट नम्बर 12 -13  देखकर उसपर  बैठ गए। बैठकर राहत की साँस  ली  और बोतल निकालकर पानी  पिया। थोड़ी  देर में  ही  ट्रेन चल पड़ी। उसने देखा … Read more

  खामोशी – डॉ किर्ति गोयल 

बात कुछ पुरानी है पर यू लगता है मानो कल की ही बात हो। वही शाम के लगभग 4 बजे विश्वविद्यालय से लौटने का समय था, अचानक देखा कुछ बड़े डील डौल वाले लड़के हाथो में तलवार, हौकी और डंडे लिए हुए एक युवक के पीछे दौड़ते हुए आ रहे थे। पीछा करते हुए वी. … Read more

गरीब घर की बेटी – हरीश पांडे 

मुन्नी का परिवार गाँव के सबसे गरीब परिवारों में से एक था। गाँव के बाकी लोगों के जीवन में समस्याएँ थीं पर गरीब परिवारों का समस्याओं के बीच कहीं खोया हुआ जीवन था। दूसरों के खेतों- घरों में काम करके अपनी गुज़र-बसर कर रहे थे। कभी भरपेट भी मिल जाता और कभी बेमियादी व्रत ही … Read more

सुख -दुःख -देवेंद्र कुमार

परिवार गहरे दुःख में डूब गया। श्यामा के पति रामेश्वर की अचानक मृत्यु हो गई। उन्हें कोई खास बीमारी नहीं थी। सगे सम्बन्धियों और पड़ोसियों की भीड़ जमा हो गई। श्यामा अपने इकलौते बेटे प्रेम को गोद में लिए बैठी सिसक रही थी। सब उन्हें सांत्वना दे रहे थे। सबकी जबान पर एक ही चर्चा … Read more

सोच – मधु झा

अचानक बिना खबर के आयुषी का आना और आते ही माँ आरती के गले लगकर रोना,, आरती कुछ भी समझ न पायी मगर इस तरह देखकर उसे समझते देर भी न लगी कि जरूर कोई बात है,,। थोड़ा स्थिर होने के बाद आयुषी ने बताया  कि किस तरह उसके ससुराल में उसकी सास ताने देती … Read more

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