अपने पन की महक – ऋतु गुप्ता

सोमेश ने घर में घुसते ही सभी को आवाज लगाई ,चलो सभी सुगंधा (सोमेश की पत्नी ) नितिन ( बेटा ) नीति (बेटी) जल्दी इधर आ जाओ ।नए घर का नक्शा बनकर आ गया है, जिसको जो भी चेंज कराने हो अभी बता देना, एक बार नक्शा फाइनल हो गया तो फिर कुछ नहीं हो … Read more

 पुरानी हवेली – आरती झा आद्या 

तेरी इस सुन्दरता का राज क्या है.. सीमा ने शिवानी से पूछा।  आज शिवानी ने लेक्चरर बनने की खुशी में घर पर ही पहली बार सहेलियों के लिए दावत रखा था।  इसकी तो पुरानी हवेली भी अपनी पुख्ता अंदाज में खड़ी है। तेरी सास, तेरी सास की सास कैसे संभालती है तू इन्हें… शिवानी की … Read more

 बेटीयांँ  होती है बड़ी प्यारी, है ना ! ( भाग -1) – बेला पुनि वाला 

 बेटी शब्द में ही प्यार है, दुलार है, एक अपनापन है, जब से वो मेरे पेट में थी, तब से ही उसके साथ एक अजीब सा लगाव  था। एकेले  में उसके साथ बातें करती रेहती थी।  नौ  महिने जीतना भी दर्द हो, तकलीफ हो, उठते-बैठते, खाते-पीते, सोते-जागते, उस वक्त चाहे जितनी तकलीफ हो,  मगर उफ़फ़  … Read more

कदंब का पेड़ – कमलेश राणा

अरे आज तो विभु बड़ा मन लगाकर पढ़ाई कर रहा है।  पढ़ाई नहीं कर रहा बुआ जी.. पापा ने यह कविता याद करने को कहा है यह मैंने पूरी याद कर ली, पता है आपको यह कविता पापा को भी बहुत पसंद है और उन्हें पूरी याद भी है।  अच्छा !!!! ऐसी कौन सी कविता … Read more

जिंदगी जीने के लिए है…… – लतिका श्रीवास्तव 

शालिनी तुमसे एक काम ठीक से नहीं होता दिमाग कहां रहता है तुम्हारा आज कल…..मैने तुमसे फाइल लाने को कहा था तुमने ये कोई सी किताब लाकर दे दी है….शांतनु झुंझला कर कह रहा था तभी शालिनी ने धीरे से फाइल उसकी ओर बढाते हुए कहा ये लीजिए आपकी फाइल …. सॉरी जल्दी जल्दी में … Read more

 परिवार को जोड़े रखने के लिए, परिवार को तोड़ना जरूरी है – प्रीती वर्मा 

यूं तो ये रचना हमेशा हंसती मुस्कुराती और जिंदादिली से रहती है।पर ऐसी क्या बात है जो ये दो दिनों से पार्क तो आती है पर मन कहीं और रख आती है। आज तो मैं इसके मन की व्यथा जानकर ही रहूंगी।साथ चलते चलते रचना जी की सहेली निर्मला जी ने रचना जी के चेहरे … Read more

कठोर कदम – मधु मिश्रा

दो महीने ही तो हुए हैं मेधा की शादी को, फ़िर ये गुमसुम क्यों रहती है ? अंजानी आशंका से घिरी मालती की नब्ज़ उसके पति विनोद ने आख़िर पकड़ ही ली,और बोले – “इस तरह टेंशन पालने से क्या होगा, मेधा से पूछो क्या हुआ है..? संभव हुआ तो हम उसकी मदद करेंगे !” … Read more

नास्तिक – हरीश पांडे

आभा अपने मायके पहुंचते ही फफक फफक कर रोने लगी। माता पिता किंकर्तव्यविमूढ़ खड़े थे। बार बार आशा भरी निगाहों से दरवाज़े की तरफ देखते मगर किसी और के कदमों की आहट न सुनकर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बेटी का रोना बंद नहीं हो रहा था और माता पिता के दिलों का ज़ोर से … Read more

गुनाहों की सज़ा  – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज वृद्धाश्रम में अपनी जीवन संध्या व्यतीत करने वाले बुजुर्ग और वयोवृद्ध लोगों का चेकअप करने के लिए चिकित्सकों की टीम आई हुई थी। सबका बारी-बारी चेकअप हो रहा था। सभी वृद्ध आसानी से अपनी सारी समस्याएं चिकित्सकों से साझा कर रहे थे पर राजेश जी बिल्कुल गुमसुम से थे। वो कुछ दिन पहले ही … Read more

“हम बूढ़ों को पूछता कौन है ? – स्मिता टोके “पारिजात

हॉस्पिटल में पास वाले रूम से अचानक ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ें आने लगीं….. “मार डालो मुझे । घरवाले सब नफरत करते हैं । यहाँ क्यों पटककर रखा है ? खाने का डब्बा देकर चले जाते हैं । नहीं खाना मुझे …..” वे बुज़ुर्ग सज्जन चिल्लाने लगे ।  “बाबा, शांत हो जाओ, ऐसे में आपकी तबियत और … Read more

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