रिश्ते अधिकार से नहीं करुणा से निभाते हैं – सीमा सिंघी
आज मालती जी ने अपनी बहू सुमति को बार-बार अलमारी खोलकर कुछ ढूंढते हुए देखकर रूखे स्वर में बोल पड़ी। बहू आज तुम यह सुबह से अलमारी खोल कर बार-बार क्या ढूंढ रही हो। तुमने ऐसा कौन सा खजाना रख दिया था। जिसे तुम्हें इतनी ढूंढने की जरूरत पड़ गई है। जरा मैं भी तो … Read more