बेटा हो तो ऐसा – लतिका श्रीवास्तव 

जब दोनों बड़े बेटों के बाद सबसे छोटे बेटे ने भी माता पिता से अलग होने का फैसला ले लिया.. शाम की आरती का वक़्त हो चला था, लेकिन ‘रघुनाथ विला’ के बड़े से हॉल में अगरबत्ती की खुशबू के बजाय एक भारी मनहूसियत तैर रही थी। दीवार घड़ी की टिक-टिक हथौड़े जैसी लग रही … Read more

 नालायक औलाद – करुणा मलिक 

जब अपनी औलाद ही नालायक निकल जाए तो पराए घर से आई बहु का क्या कसूर..  दिवाकर बाबू अपनी पुरानी आरामकुर्सी पर बैठे थे, लेकिन आराम उनके नसीब में कहाँ था? उनकी नज़रें बार-बार दीवार पर लटकी उस घड़ी पर जा रही थीं, जिसकी टिकटिक घर के सन्नाटे को और गहरा बना रही थी। रसोई … Read more

समय दो… – रश्मि झा मिश्रा

“मां जी… आप लोग इतने दिन तो यहीं रहते थे… अब क्यों जा रहे हैं… मुझे आए तो अभी ठीक से चार महीने भी नहीं हुए… क्या मुझसे कोई परेशानी है…!” ” अरे… नहीं नहीं बेटा… तुम तो बहुत प्यारी हो… इतने दिनों तक तो सारे घर की जिम्मेदारी हमने ही संभाल रखी थी… राकेश … Read more

फेरी वाला – के आर अमित

वह बच्चों के कुरकुरे पॉपकॉर्न और बुढ़िया के लाल पिले बाल बेचता था। वह हर रोज आता और हंस हंस कर कहता कि जो कंघी में फंसे बाल फेंक देती हो उन्हें इकट्ठा कर लो मैं पांच हजार रुपये किलो के हिसाब से खरीद लूंगा। उसने अपना नंबर दिया और कहा कि जब थोड़े जमा … Read more

रिश्तों की डोर – संगीता त्रिपाठी

 “दीदी शादी से थोड़ा पहले आ आ जाइएगा,सब आपको ही बताना है “    “तू परेशान मत हो मै शादी से दो – तीन दिन पहले आ जाऊंगी “ननद शिखा की बात सुन माधवी सोच में पड़ गई ,दो – तीन दिन पहले आने से क्या शादी की सारी तैयारी हो जाएगी  ।    बेटी पीहू की … Read more

हमारा परिवार – एम पी सिंह

राहुल का परिवार गाँव में रहता था। परिवार में राहुल के माता पिता, ताऊ जी ताई जी, उनका बेटा रोहन और दादा जी थे। राहुल पढ़ाई में बहुत तेज था और रोहन औसत था। दोनो भाई  दोस्तों की तरह रहते थे। दादा जी के गुजर जाने के कुछ साल बाद राहुल के पिता जी भी … Read more

परिवार का साथ – गीता वाधवानी

” सुनो मानसी, हमारी बिटिया रीना लड़के वालों को बहुत पसंद आई है,अभी-अभी उनका फोन आया था और वे लोग जल्दी ही सगाई करना चाहते हैं। ” मानसी को उसके पति सोमेश ने बताया।   मानसी-” अरे वाह! बहुत अच्छी खबर सुनाई आपने, पसंद तो आनी ही थी, हमारी रीना है ही इतनी प्यारी और होशियार। … Read more

सबसे बड़ा धन-परिवार – डाॅ संजु झा

विभा अपने अतीत का पुनरावलोकन करते हुए  मन-ही-मन सोचती है -“सचमुच सबसे बड़ा धन परिवार ही है।अगर उसे परिवार का साथ न मिला होता,तो पति मनीष की बेवफाई के बाद उसकी जिंदगी तिनकों की तरह हवा में उड़कर बिखर गई होती!” विभा के टूटे हुए मन को उसके सास-ससुर,देवर-ननद ने बड़े ही प्यार से सॅंभाला … Read more

विधि का विधान कोई नहीं टाल सकता – संजय सिंह

आज मास्टर जी विद्यालय से वापस आकर ,अपने घर के बरामदे में चाय का कप लेकर बैठे थे ।चाय को खत्म करके, एकाएक घर की तरफ कुर्सी को घूमाकर सारे घर को ध्यानपूर्वक निहारने लगे और एक-एक करके अपने अतीत को याद करने लगे ।पहला चेहरा माता-पिता का उनकी आंखों के सामने आया। माता-पिता का … Read more

सबसे बड़ा धन: परिवार – रेखा जैन

अंकित हॉस्पिटल के बिस्तर पर लेटा हुआ छत को घूर रहा था।  उसकी आंखे पीड़ा से भरी हुई थी। बिस्तर के पास उसकी पत्नी अदिति बैठी हुई उसे ही देख रही थी।  वो स्वयं को असहाय महसूस कर रही थी। तभी डॉक्टर वहां आए और बोले, “अभी इनकी तबियत ठीक है।  दो दिन बाद डिस्चार्ज … Read more

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