गुरू दक्षिणा – डॉ बीना कुण्डलिया

अरे बहु देखना जरा जाकर कामिनी आ गई लगता है,बाहर गाड़ी रूकने की आवाज आई उत्साहित ममता जी ने बहु नंदनी को आवाज लगाई। फिर खुद से ही बड़बड़ाई ये बेटियां भी फंक्शन त्यौहारों में जब तक घर में न आ जाये आँगन में रौनक ही नहीं आती । 

कामिनी रसोईघर में व्यस्त सभी काम छोड़कर सासूमां के कहेनुसार बाहर गेट की तरफ भागी। उसकी बड़ी ननद कामिनी कार से उतर गई और जंवाई बाबू कार सही जगह पर पार्क करने में लगे ।

नंदनी ने दौड़कर कामिनी के हाथ से उसका सामान लेना चाहा मगर कामिनी ने ऐसा व्यवहार किया जैसे उसे नंदनी के स्वागत के लिए आने पर कोई प्रसन्नता नही हो रही । बड़े ही रूखेपन से बोली रहने दो नंदनी परेशान क्यों होती हो ? माँ कहां है मन्दिर गई है क्या ? वरना तो वो ही आतीं हमारे स्वागत के लिए हमेशा।

नंदनी ने बड़ी ननद कामिनी की बात,रूखे व्यवहार का बुरा नहीं माना बोली दीदी माँ के पैर में दर्द है न इसलिए मुझे भेजा आपके स्वागत के लिए।

कामिनी मां के कमरे में गई बिस्तर पर बैठी मां से बोली ये भाभी नंदनी आपकी ठीक से देखभाल नहीं करती है क्या ? बीमार करके रख दिया आपको।

ममता जी ने बेटी को गले लगाया और बोली अरे मेरी बीमारी से बहु का क्या लेना-देना, वो दो दिन पहले हम सभी मेरी सहेलियां पैदल चढ़ाई वाले माता के मन्दिर गये थे । तो थकान की वजह से पैर दर्द कर रहे । वो तो मेरी बहु ने खूब अच्छी मालिश कर दी रात दिन वरना तो मेरी बहुत बुरी हालत हो गई थी।

कामिनी ने बहु की तारीफ सुनकर बुरा सा मुंह बनाया और बोली माँ ये ज्यादा बहु की तारीफे गुणगान मत किया करो देखना सर पर चढ़ जायेगी तो नीचे उतारना मुश्किल हो जायेगा ।

ममता जी ने कामिनी की तरफ थोड़ा गुसाई नजर से देखा बोली देख कामिनी वो बहु है इस घर की और फिर मेरा कितना ख्याल रखती है तारीफ़ क्यों न करू भला मैं ? 

तब तक नंदनी चाय नाश्ते का इंतजाम कर पूछने आती है माँ चाय यहीं दूं या ड्राइंग रूम में जवाई बाबू वहीं बैठे हैं बाबूजी भी साथ है ।

ममता जी बोली वहीं रख हम भी आते हैं वहीं। सभी डाइंग रूप में बैठे घर में चहल-पहल का माहौल हो गया। तभी कामिनी के पति दामाद बोले सासूमां ससुर जी कल तो स्पेशल दिन है आपकी शादी की सालगिरह हां..

तो कल क्या क्या प्रोग्राम रखा है ? ममता जी बोली अरे बेटा बस पूजा पाठ ही करवा रहे बाकि घर के खास लोग बुलाये दोपहर का खाना संग खायेंगे सभी मिल जुलकर । सभी शाम तक आ जायेंगे पूजा सुबह जल्दी होगी ।

फिर ममता जी बहु नंदनी से बोली बेटा रात खाने की तैयारी कर लेना और सुबह पूजा की बाकी तो नंदू हलवाई को कह रखा आ जायेगा लेकर खाना पीना। आजकल ये सब अच्छा बस आर्डर कर दो बना बनाया सब समय से लेकर आ जाते हैं।

कामिनी बोली क्यूं माँ भाभी नंदनी ने मना कर दिया था क्या खाना बनाने को  ? जो हलवाई की जरूरत पड़ गई।

ममता जी थोड़ा कठोर लहजे में बेटी सी बोली देख कामिनी, नंदनी मेरी बहु है और आने वाले सभी रिश्तेदारों को भी लगना चाहिए, वो कोई नौकरानी थोड़े न है जो जिसे सभी काम सौंप दिए जाये । आज रात भी वो ही काम करेगी कल भी उसको ही करना पड़े अरे भई वो भी इंसान हैं। जरा तू ही सोच अगर तेरे ससुराल में तुझ पर इतना काम सौप दिया जाये तो तुझे कैसा लगता ?

 देख बिटिया कामिनी जो काम तुम खुद नहीं कर सकते दूसरे से उसकी उम्मीद नहीं लगानी चाहिए। थोड़ा बहुत चलता है मगर सबका शरीर एक हिसाब से ही वहन कर सकता है। आज ममता जी थोड़ा गुस्साई सी बोले जा रही थी।

सभी वहां मौजूद थे तो कामिनी माँ की बातें सुनकर अन्दर ही अन्दर कुड़ती है…क्योंकि वो देख रही जब से बहु नंदनी घर आई माँ तो सदा उसका ही गुणगान करती रहती है। वो सोचती है ऐसे तो इस घर में उसका महत्व ही खत्म होने के कगार पर खड़ा है। पहले हर काम उससे पूछकर किया जाता और अब हर बात में माँ नदनी ही नंदनी करती रहती है।

वो मन ही मन ठान लेती है वापस ससुराल जाने से पहले इस नंदनी को सबक सिखाकर ही जायेगी मां के ऊपर से इसका जादू खत्म करना ही होगा।

रात तक सभी खास रिश्तेदारों मेहमानों का जमावड़ा हो गया घर में। नंदनी ने काफी व्यंजन बनाने में लगी थी, वो दौड़ दौड़कर सभी का स्वागत भी कर रही । 

ममता जी को अपनी बेटी कामिनी के लक्षण सही नहीं लग रहे इसलिए वो शंकित थी नादानी में बेटी, बहु नदनी के प्रति कुछ गलत कदम न उठा बैठे। वो बराबर अपनी बेटी पर नजर जमाये हुए थीं। उन्होंने देखा कामिनी बार बार रसोईघर की तरफ मंडरा रही है । लगता रसोईघर में कुछ गड़बड़ी करने की फिराक में है ।

ममता जी ने बहु नंदनी कै बुलाया और धीरे से से बोला बहु  तुमने कितनी सब्जी बनाई आज मेहमानों के लिए।

नंदनी बोली माँ छोले, सूखे आलू और उड़द की दाल बाबूजी जी ने यही कहा था बनाने को । और बाकी मीठा आपने जो कहा खीर ,आलू का हलवा।

ममता जी बोली ऐसा कर आज सब्जी में नमक मत डालना और सभी सब्जियां दो बर्तनों में बांटकर रखना।

अरे माँ नमक नहीं डालना..फीका खाना बनेगा क्या? बहु विस्मित सी बोली 

नहीं फीका तुम रखना नमक हम बाद में डाल लेंगे क्योंकि कुछ तुम्हारी बुआ सास नमक नही खातीं इसलिए । और कुछ ठंडा खाना पसन्द करती ऐसा कहकर बहु को टाल दिया । इसलिए  मीठा जो बनाया और सब्जियां का एक एक बर्तन बनते ही हाल के डाइनिंग टेबल में रख दो ठंडा रहेगा सभी शौक से खायेंगे बाकी में बैठी हूँ वहां सभी के साथ।

नंदनी ने सासूमां के निर्देश अनुसार ठीक वैसा ही किया। सारा खाना तैयार हो गया खाना दो बर्तनों में रख एक डाइनिंग हॉल में रख दिया दूसरा रसोईघर में कूकरों में रखा रहने दिया गया जो गरम रहने की इच्छा से ‌रखा गया था और जो कम थोड़ा मात्रा में ही था।

कामिनी बार बार किचन की तरफ झांकते हुए बड़बड़ाती कब हटेगी ये नंदनी यहां से।

तभी ममता जी ने बहु को आवाज देकर अपने साथ डाइनिंग हॉल में सबके साथ कुछ देर बैठने को कहा।और सबसे बहु के पाक शास्त्र की तारीफ करने लगी, मेरी बहु कितना अच्छा स्वादिष्ट भोजन बनाती है ? 

इसी बीच कामिनी को मौका मिल जाता है नंदनी को मां और रिश्तेदारों के बीच व्यस्त देखकर वो किचन में घूस जाती है। कुछ गड़बड़ी कर मुस्कराते हुए बड़बड़ाते हुए हूं देखना “अब आयेगा मजा “रसोईघर से निकल ही रही होती है कि तभी सामने से 

 कामिनी के पति और पिता सभी मर्द रिश्तेदारों के साथ आते हैं और कहते हैं खाना लगवाओ कामिनी बेटा ।

बहु नंदनी सभी खाना सामग्री ढोंगों में डालकर करीने से एक तरफ गर्म एक तरफ पहले से ठंडा खाना सजा देती है। सभी खाने बैठते हैं। जैसे ही गर्म खाना खाने वालो में ससुर जी दाल खाने के लिए मुंह में डालते हैं उनके हाथों से चम्मच ही छूट जाता है। ससुर जी तो चिल्लाते हुए कहते हैं ये क्या नमक की दाल बनी हुई है आज ?

तभी कामिनी के पति भी एक चम्मच छोले मुंह में डालते हुए चिल्ला पड़ते हैं हूं.. हूं मुंह का स्वाद ही बिगड़ गया इतना नमक कौन डालता है भला ? एक दो मेहमान और कुछ ऐसा ही बोलते नजर आ रहे थे।

ममता जी एक बार बहु नंदनी के मुंह की तरफ देखती है जो बराबर चिंतिंत सी उनको ही ताक रही थी दूसरे अपनी बेटी कामिनी की तरफ देखतीं हैं जो विजय मुसकान के साथ अकड़ी गर्दन लिए मुस्कुरा रही थी।

ममता जी नंदनी से कहती हैं बेटा जो गर्म गर्म खाना उसको रसोईघर में जाकर वापस रख दो और ठंडा खाना नमक डालकर दुबारा गर्म करके ले आओ । थोड़ी ही देर में सब यथापूर्व हो जाता है नंदनी वैसा ही करती जैसा सासूमां ने कहा। खाना दुबारा गर्म कर आते ही ममता जी सबसे कहतीं हैं अब शुरू कीजिए सब खाना खाते हैं

और आश्चर्यजनक मुद्रा में ममता जी की तरफ ताकने लगते हैं। ममता जी कहती हैं आज मैंने अपनी बहु ,बेटी को मजबूत बनाने के लिए एक परीक्षा की तैयारी करवाई है। खाना बहुत ज्यादा बनवाया है चिंता न कीजिए। थोड़ा नमक ज्यादा डलवाकर शिक्षा दी है की किसी भी चीज की अधिकता खिंचाव रिश्तों, परिवार को बर्बाद कर सकती है और सीमित मात्रा खुशहाली भी ला सकती है। 

सबके कुछ समझ नहीं आता मगर खाना बहुत स्वादिष्ट बना तो सभी चाव से खाने में मस्त नजर आ रहे ।

कामिनी और नंदनी असमंजस में फंसे जिसको ममता जी चेहरा देखकर समझ जातीं हैं। कामिनी और नंदनी के दिल में उथल पथल मच जाती है ‌। रात में कामिनी जब मांं के साथ सोने आती है वो माँ से कहती हैं माँ मुझे माफ कर दीजिए मुझसे बड़ी ग़लती हो गई मैं नंदनी को नीचा दिखाने के चक्कर में ये अपराध कर बैठी । मैंने एक बार भी नहीं सोचा इसका परिणाम क्या होगा ? अपने कितनी समझदारी से मेरे गुनाह छिपा मेरे और भाभी नंदनी के बीच नफरत की दीवार खड़ी होने से बचा ली । वरना आज सबके सामने मेरी भी बेइज्जती हो जाती ।

ममता जी बोली कामिनी बेटा नंदनी भी किसी घर की बेटी है वो भी उनको उतनी ही प्रिय जितनी तुम हमको । वो सबको छोड़कर हमारा घर बसाने आई है हमारा फर्ज बनता है उसके दुख सुख खुशियों का ख्याल रखना।  और फिर तुमने कैसे सोच लिया उसके इस घर आने से तुम्हारा इस घर में महत्व कम हो जायेगा ? बेटा माता पिता कब तक है इस दुनिया में आज हैं कल नहीं हमारे बाद इस घर में बहु ही तुमको देखेगी । इसलिए सम्मान दोगी तो सम्मान मिलेगा और नफरत, जलन पैदा करोगी तो…

ममता जी के कहने से पहले ही कामिनी की आंखें भर आईं। ममता जी ने उसे गले लगाया और बोली जा देख नंदनी अभी रसोईघर में है जल्दी जा उससे माफी मांगकर दोनों सहेलियां बन जाओं । अगर ज़िन्दगी का आनंद लेना है तो ..

कामिनी रसोईघर में दूसरे दिन पूजा की तैयारी व्यवस्था करती नंदनी के पास गई और गले लगकर सभी बातें साफ साफ बता दी । नंदनी मुस्कुराते हुए बोली कामिनी दीदी आप बड़ी है हालांकि हम दोनों की उम्र में ज्यादा अंतर नहीं है। पहले तो मुझे माँ की बात समझ नहीं आई लेकिन अब सब स्पष्ट है।

आखिर वो हमारी मां ही नहीं गुरू भी है उन्होंने हमको अच्छा ज्ञान दिया उन्होंने समझदारी सर्तकता, अपनेपन का ज्ञान। अब हम दोनों सहेलियों की तरह रहेंगे। सदा सच्चाई से माँ की शिक्षा का पालन कर एक दूसरे के हित में साथ रहेंगे। चलो अब गुरू दक्षिणा देते हैं चलकर दोनों ‌।

फिर दोनों ममता जी के पास आई और बोली माँ बताऐ कल आपकी वैवाहिक सालगिरह पर हम आपको गुरू दक्षिणा में कुछ देना चाहते हैं क्या दें आपको ? ममता जी ने दोनों को गले लगा लिया बोली बेटा तुम दोनों ईमानदारी से एक दूसरे का साथ देना ओर एक दुसरे के हित में खड़ी रहना यही मेरी गुरू दक्षिणा होगी । मेरा घर परिवार बना रहे खुशहाल चहकता महकता रहे मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए । मैं जहां भी रहूंगी मेरा आशीर्वाद तुम दोनों के साथ रहेगा ।

लेखिका डॉ बीना कुण्डलिया 

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