दोहरे चेहरे – विनीता सिंह

राघवेंद्र जी को पूरा शहर ‘सज्जन पुरुष’ कहता था। उनके चेहरे पर हमेशा एक सौम्य मुस्कान तैरती रहती थी। शहर के हर बड़े सामाजिक कार्यक्रम, अनाथालयों के दान समारोहों और धार्मिक आयोजनों में वे अग्रिम पंक्ति में बैठे नजर आते थे। सफेद कड़क कुर्ता-पायजामा, माथे पर चंदन का तिलक और वाणी में ऐसी मधुरता कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाए।

लोग अपने बच्चों को उनकी तरह बनने की सीख देते थे। वे समाज के लिए आदर्श का एक ऐसा जीवंत पुतला थे, जिसकी पूजा की जा सकती थी।लेकिन इस चमकीले चेहरे के पीछे एक और चेहरा भी था, जिसे सिर्फ उनके घर की चारदीवारी जानती थी।

उसी शहर के दूसरे कोने पर समर रहता था। समर एक स्थानीय अखबार में खोजी पत्रकार था। वह स्वभाव से शांत, गंभीर और अपनी धुन का पक्का था। समर पिछले कई महीनों से शहर में हो रहे एक बड़े जमीन घोटाले की तह तक जाने की कोशिश कर रहा था। इस घोटाले में गरीबों और लाचार बुजुर्गों की जमीनों को धोखाधड़ी से हड़प लिया गया था।

पुलिस और प्रशासन के कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी इस खेल में शामिल थे। समर को लगातार धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उसने पीछे हटने से इनकार कर दिया था।एक शाम, समर को उसके एक गुप्त सूत्र से कुछ बेहद गोपनीय दस्तावेज मिले। उन फाइलों में उस मुख्य सरगना के दस्तखत और बैंक खातों के विवरण थे,

जो इस पूरे काले कारोबार को पीछे से संचालित कर रहा था। समर ने जैसे ही उन फाइलों को खोला, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। दस्तावेजों पर जो नाम और तस्वीरें थीं, वे किसी खूंखार अपराधी की नहीं, बल्कि शहर के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति राघवेंद्र जी की थीं।

समर के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था। वह राघवेंद्र जी, जो मंच से ईमानदारी और नैतिकता पर घंटों भाषण देते थे, जो हर गरीब की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाने का नाटक करते थे, असल में सैकड़ों परिवारों को बेघर करने के जिम्मेदार थे। उनका वह परोपकारी रूप महज एक मुखौटा था,

जिसका इस्तेमाल वे अपने काले कारनामों को छिपाने और समाज में अपनी ऊंची साख बनाए रखने के लिए कर रहे थे।उसी रात राघवेंद्र जी के घर के भीतर का दृश्य कुछ और ही था। वे अपने आलीशान ड्राइंग रूम में बैठे अपने वकीलों और गुंडों के साथ बैठक कर रहे थे।

उनके चेहरे की वह सौम्य मुस्कान गायब थी। उसकी जगह एक क्रूर और शातिर मुस्कराहट ने ले ली थी। उनकी आवाज में वह मिठास नहीं, बल्कि एक डरावनी कड़वाहट थी।वे अपने आदमी पर चिल्ला रहे थे, “मैंने कहा था न कि उस पत्रकार समर का मुंह बंद करो! अगर वह फाइलें सामने आ गईं, तो मेरा बरसों का बनाया साम्राज्य और यह इज्जत एक पल में मिट्टी में मिल जाएगी।

समाज मुझे पूजता है, और मैं अपनी यह छवि किसी भी कीमत पर खराब नहीं होने दूंगा।”समर जानता था कि सच को सामने लाना खतरे से खाली नहीं है। राघवेंद्र जी का प्रभाव इतना गहरा था कि कोई भी आसानी से उन पर उंगली उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता था। लेकिन समर ने तय किया कि वह इस दोहरे चेहरे वाले इंसान को बेनकाब करके रहेगा।

उसने सारे सबूतों की कॉपियां बनाईं और उन्हें सीधे राज्य के ईमानदार और कड़क पुलिस महानिदेशक (DGP) के पास भेजने का फैसला किया, जो राघवेंद्र के प्रभाव से बाहर थे।अगले दिन शहर में एक भव्य सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन था। राघवेंद्र जी को वहां मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। वे मंच पर विराजमान थे।

उन्होंने हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मंच संभालते हुए ‘समाज सेवा और निस्वार्थ जीवन’ पर एक प्रभावशाली भाषण देना शुरू किया। लोग उनकी बातों से भावुक हो रहे थे।तभी कार्यक्रम के बीच में हूटर बजाती हुई पुलिस की गाड़ियां आयोजन स्थल पर आ रुकीं।

खुद डीजीपी और भारी पुलिस बल मंच की तरफ बढ़ने लगा। भीड़ में सन्नाटा पसर गया। राघवेंद्र जी के चेहरे पर एक पल के लिए हवाइयां उड़ गईं, लेकिन उन्होंने तुरंत खुद को संभाला और अपनी वही परिचित मुस्कान चेहरे पर ले आए।वे मंच से नीचे उतरे और डीजीपी से बोले, “अरे कमिश्नर साहब, आइए-आइए! स्वागत है आपका। किसी अपराधी की तलाश में आए हैं क्या?

“डीजीपी ने गंभीर आवाज में कहा, “हां राघवेंद्र जी, हम शहर के सबसे बड़े अपराधी को ही पकड़ने आए हैं। आपके इस परोपकार के मुखौटे के पीछे जो चेहरा छिपा है, वह कानून के सामने आ चुका है।

जमीन घोटाले और धोखाधड़ी के आरोप में आपको गिरफ्तार किया जाता है।”पुलिस ने जैसे ही राघवेंद्र जी के हाथों में हथकड़ी लगाई, वहां मौजूद जनता स्तब्ध रह गई। समर दूर खड़ा यह सब देख रहा था। राघवेंद्र जी का वह कड़क सफेद कुर्ता अब उनकी आत्मा के कालेपन को छिपाने में नाकाम था।

उनका दोहरा चेहरा पूरी दुनिया के सामने आ चुका था।यह कहानी हमें सिखाती है कि समाज में हर चमकती चीज सोना नहीं होती, और कभी-कभी सबसे पवित्र दिखने वाले मुखौटों के पीछे ही सबसे भयानक सच छिपा होता है।

विनीता सिंह बीकानेर राजस्थान 

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