अपनों का साथ और प्यार – गीता वाधवानी

 आकाश और आशना की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनकी बेटी काम्या ने समाजसेविका बनकर उनका नाम रोशन किया था।आज उसके अच्छे कामों के लिए उसे अवार्ड दिया जा रहा था। 

 पूरा हॉल तालियों  की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर व्यक्ति की जुबान पर बस काम्या का ही नाम था। सब यही कह रहे थे कि इतनी छोटी उम्र में इतने अच्छे काम कोई बिरला व्यक्ति ही कर सकता है। 

 अवॉर्ड फंक्शन के बाद वे लोग खाना खाकर अपने घर गए और वहां जाकर काम्या की मनपसंद मटका कुल्फी की पार्टी हुई।     गीता वाधवानी  

 उसके बाद काम्या अपने  कमरे में सोने चली गई और आकाश और आशना अपने कमरे में जाकर बातें करने लगे। 

 बातें करते-करते वे लोग पुराने समय में खो गए। आशना ने कहा -” याद है आपको बचपन में एक बार काम्या स्कूल से एक पेंसिल लाई थी, पेंसिल सचमुच बहुत सुंदर थी और मेरे पूछने पर काम्या ने कहा था कि मेरी फ्रेंड ने दी है, और फिर बात आई गई हो गई। ” 

 आकाश ने कहा -” हां याद है, उसके बाद काम्या एक दिन लंच बॉक्स लाई थी। जब तुमने पूछा, तब उसने कहा था कि भूल से ले आई कल वापस कर दूंगी। ” 

 इसी तरह एक दिन ड्राइंग बुक, तो कभी पानी की बोतल तो कभी पेंसिल बॉक्स। 

 आशना ने समझाया-” काम्या, हर बार आप यही कहते हो कि मेरी फ्रेंड ने दिया है, आप अपनी फ्रेंड से इतनी चीज क्यों लेती हो, यह अच्छी बात नहीं है, सब कुछ तो है तुम्हारे पास और वह भी इतना अच्छा। ” 

 काम्या चुप थी और फिर एक दिन स्कूल से फोन आया कि आप स्कूल में आकर टीचर से मिले। 

 आशना स्कूल गई तो टीचर ने कहा-” काम्या को चीज उठाने की मतलब चोरी करने की आदत हो गई है, और कई बार तो वह अगले दिन सामान वापस भी ले आती है। ” 

 आशना यह सुनकर अवाक रह गई। काम्या और चोरी, नहीं नहीं आपको कोई गलतफहमी हुई है। उसे तो उसकी फ्रेंड्स चीजें  देती हैं। वह ऐसा क्यों करेगी उसे किसी चीज की कमी नहीं है। ” 

 फिर टीचर ने कहा-” आप उसकी तरफ ध्यान दीजिए” 

 आसन उसे दिन से ज्यादा सचेत हो गई और उसने पूरी बात आकाश को बताई। 

 आकाश ने कहा-” बच्ची है, कुछ अच्छा लगा होगा तो उठा लिया होगा, पर इसका मतलब यह नहीं की काम्या चोर है।”   गीता वाधवानी  

 आशना काम्या को प्यार से समझाती रहती थी और उस पर थोड़ा -थोड़ा असर भी हो रहा था। कुछ साल बीत गए। एक बार काम्या, आशना के साथ नानी के घर गई थी। वापस आने पर आशना ने देखा कि काम्या चांदी की पायल पहन रही है। 

 आशना ने कहा-” काम्या, यह पायल कहां से आई मैंने तो तुम्हें नहीं दिलवाई। ” 

 काम्या -” मम्मी यह पायल गौरी की है ( मामा की लड़की), उसी ने मुझे पहनने को दी है। ” 

 अगले दिन आशना की भाभी का फोन आया। उसने बातों बातों में बताया कि चांदी की पायल कहीं खो गई है। उस समय काम्या  काफी बड़ी हो चुकी थी। वह 11वीं कक्षा में थी। आशना को काम्या के झूठ पर बहुत गुस्सा आया और उसने काम्या को कस कर एक तमाचा मारा। 

 उसके कुछ दिन बाद काम्या अपने फ्रेंड के बर्थडे पार्टी में गई थी और वहां से टॉप्स की एक जोड़ी उठा कर लाई थी, और फिर उसके बाद एक दुकान से उसने छोटा पर्स उठा लिया था। आशना अब परेशान हो चुकी थी। 

 फिर एक दिन आशना मोबाइल में सर्च कर रही थी कि बच्चे की ऐसी आदत को कैसे छुड़ाया जाए। तब उसने पढ़ा कि यह एक प्रकार की इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर है। इसमें व्यक्ति किसी वस्तु की कीमत या अपनी जरूरत के लिए चोरी नहीं करता बल्कि चोरी करने की आंतरिक भावना को रोक नहीं पता है। इस चिकित्सा के क्षेत्र में क्लेप्टोमेनिया कहा जाता है। 

    तब आशना और आकाश ने इस बारे में डॉक्टर से बात की। तब मनोचिकित्सक ने कहा-” इसमें काम्या को आपके प्यार और अपनों के साथ की बहुत जरूरत है। आप हर पल उसके साथ रहे और उसका साथ दें और मेरे पास सीबीटी के लिए लाते रहे। यह एक बहुत प्रभावित तरीका है। धीरे-धीरे फर्क पडना शुरू हो जाएगा। ”     गीता वाधवानी 

 उसके कुछ वर्ष बाद काम्या कॉलेज में आई और अपने माता-पिता के साथ से समाज सेवा शुरू करी। पढ़ाई के साथ-साथ उसे इन कामों में बहुत रुचि थी। उसने गरीब बच्चों को पढाया। बीमारी के लिए दवाइयां का इंतजाम किया, बेसहारों का सहारा बनी और बहुत से अच्छे-अच्छे काम किये और आज उसे यह अवार्ड मिला। आज उसकी वह बीमारी लगभग छूट चुकी है। 

 अगर अपनों का साथ और प्यार हो, तो असंभव काम भी संभव हो जाते हैं। आज आकाश और आशना को काम्या पर गर्व है और इस बात की तसल्ली है कि उन्होंने काम्या की प्रॉब्लम को समझा और धैर्य से काम लिया।  

 अप्रकाशित, स्वरचित गीता वाधवानी दिल्ली 

#अपनों का साथ

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