शिल्पा की शादी एक बड़े परिवार में हुई थी। दादा,दादी सास, सास ससुर,दो देवर और एक ननद जिसकी शादी चार साल पहले ही हो गई थी।जब शिल्पा के लिए वरूण का रिश्ता आया तो मम्मी-पापा को घर बार अच्छा लगा।पर उन्हें एक ही चिंता थी कि एकल परिवार में पली उनकी लाडली बेटी इतने बड़े
परिवार में कैसे निभा पाएगी । उसे तो कभी इतना काम भी नहीं किया।
पर शिल्पा को वरूण बहुत पसंद आया। उसे सब अच्छे लगे और उसने विवाह के लिए हां कर दी।
विवाह में खूब हंसी ठिठोली हुई। शिल्पा खुश थी।पर
थोड़ी घबरा रही थी। दुसरे दिन उसकी पहली रसोई में उसे हलवा बनाना था। उसने सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सबके पैर छुए।फिर ननद राखी उसे रसोई में ले गयी। उसने शिल्पा की पूरी मदद की और बाकी भोजन सास, ननद ने मिलकर तैयार कर लिया।
अब उसे काफी राहत लग रही थी।वह समझ गई थी थी ये सब उसके अपने हैं जो जीवन के हर मोड़ पर साथ देंगे।
दो तीन दिन में राखी ने उसका सब सामान जमाने में मदद की वहीं दोनों देवर हल्की हल्की फुल्की मज़ाक
कर माहौल खुशनुमा बना रहे थे।सासू मां थोड़ी कड़क बोलतीं पर उसकी सब जरुरत का ध्यान रखतीं।
अगले दिन पगफेरे की रस्म के लिए भैया आए तो उसकी मुस्कान से ही समझ गये कि बहन नये परिवार में खुश है।
मायके आकर भी वह दिनभर ससुराल की बातें करती। मम्मी ने पूछा बेटी तू अगर सबसे अच्छा बर्ताव करेगी और सम्मान देगी। छोटी छोटी बातों को मन पर नहीं लेगी तो तुझे भी तेरे अपनों का हर कदम पर साथ मिलेगा। शिल्पा ने हंसकर मां को गले लगा लिया।वह हमेशा इन बातों को ध्यान में रखकर अपने नये परिवार में सामंजस्य स्थापित कर लेगी।
अरुणा गर्ग