अभी अंश 11वीं कक्षा का छात्र है। उसके मन में एक बड़ा सपना है—मुझे अभी से JEE की तैयारी करनी है और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना है। लेकिन उसके मन में एक सवाल भी रहता है—”अगर भगवान हैं, तो मेरी मेहनत का फल अभी क्यों नहीं मिलता? क्या सचमुच भगवान मेरी सुनते हैं?” आज दादीजी ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा और मुस्कुराकर कहा, “बेटा, भगवान के घर देर हो सकती है, लेकिन अंधेर कभी नहीं होता।”
अंश ने उत्सुकता से पूछा, “दादीजी , अगर भगवान सच में सब देखते हैं, तो फिर किसी को जल्दी सफलता और किसी को देर से क्यों मिलती है?”
दादीजी उसे आँगन में लगे आम के पेड़ के पास ले गए। उन्होंने कहा, “देखो बेटा, जब इस पेड़ का छोटा-सा बीज मिट्टी में बोया गया था, तब कई दिनों तक कुछ दिखाई नहीं दिया। अगर उसी समय कोई कह देता कि बीज मर गया है, तो क्या वह सच होता? नहीं। वह बीज मिट्टी के अंदर अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था। जब समय आया, तभी वह अंकुर बना, फिर पौधा और आज इतना बड़ा पेड़ बन गया।”
दादीजी ने आगे कहा, “इंसान की मेहनत भी उसी बीज की तरह होती है। पढ़ाई, ईमानदारी, धैर्य और विश्वास—ये सब भगवान की दी हुई परीक्षाएँ हैं। जो इन परीक्षाओं में हार नहीं मानता, भगवान उसके लिए ऐसा रास्ता खोलते हैं जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होती।”
अंश ध्यान से सुन रहा था। दादीजी बोले, “अगर तुम आज JEE की तैयारी कर रहे हो और रोज़ मेहनत कर रहे हो, तो याद रखना—हर दिन तुम्हारा सपना थोड़ा-थोड़ा सच बन रहा है। हो सकता है परिणाम आज न दिखे, लेकिन भगवान तुम्हारी मेहनत का एक-एक पल गिन रहे हैं।”
फिर दादीजी ने उसकी आँखों में देखकर कहा, “भगवान चमत्कार नहीं करते, वे मेहनत करने वालों की मेहनत को सही समय पर फल देते हैं। इसलिए कभी यह मत कहना कि भगवान ने मेरी नहीं सुनी। हो सकता है, वह तुम्हारे लिए उससे भी बड़ा रास्ता तैयार कर रहे हों।”
उस दिन अंश ने आसमान की ओर देखा। पहली बार उसके मन में शिकायत नहीं, बल्कि विश्वास था। उसने मन ही मन कहा, “हे भगवान! मैं परिणाम की चिंता नहीं करूँगा। मैं पूरी ईमानदारी से मेहनत करूँगा। सही समय आने पर आप मुझे वही देंगे, जो मेरे लिए सबसे अच्छा होगा।”
उस दिन के बाद अंश ने पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि अपने सपनों तक पहुँचने का मार्ग समझ लिया। जब भी थक जाता, दादीजी की एक बात उसे फिर से खड़ा कर देती—
“बेटा, सूरज भी हर दिन सही समय पर ही निकलता है। अगर वह जल्दी या देर से निकले, तो दुनिया का संतुलन बिगड़ जाएगा। उसी तरह भगवान भी हर इंसान को उसकी मेहनत का फल सही समय पर देते हैं।”
याद रखो बच्चों,
सपने देखने वाले बहुत होते हैं, लेकिन उन्हें सच करने वाले वही बनते हैं जो मेहनत के साथ विश्वास भी रखते हैं। इसलिए कभी निराश मत होना।
भगवान के घर देर हो सकती है, पर अंधेर कभी नहीं होता। मेहनत करते रहो, विश्वास बनाए रखो, क्योंकि जब भगवान देते हैं, तो उम्मीद से कहीं ज़्यादा देते हैं।
अंश बेटा ! तुमने मेहनत पूरी ईमानदारी से की है , तुम्हारा विश्वास टूटने नहीं देगें |
देखना तुम ! तुम्हारा नंबर जरुर आयेगा , मेरा आशीर्वाद और भगवान का साथ |
भगवान के घर देर है अंधेर नहीं
सुदर्शन सचदेवा