अरे सौम्या यह बिखरी हुई रसोई तुमने अब तक समेटी नहीं???
मैं तुमसे कितनी बार कहा है… मुझे सफाई पसंद है। मुझे इस तरह बिखरी हुई रसोई बिल्कुल अच्छी नहीं लगती है। तुम सब जानती हो…फिर भी तुम इन्हें अधूरा छोड़कर कमरे में चली गई कहते हुए निर्मला जी सौम्या के बिल्कुल करीब आकर खड़ी हो गई।
रोज इसी तरह की छोटी-छोटी बातों पर निर्मला जी का अपनी बड़ी बहू मानवी से कुछ ना कहना और ले देकर सारा ठीकरा अपनी छोटी बहू सौम्या के सर मढ़ देना उनकी पुरानी आदत थी। घर पर बड़ी बहू मानवी के गुस्से और चालाकियों से परिचित थे….इसीलिए घर का कोई भी सदस्य उसे कुछ कहता नहीं था ।
जिस दिन से सौम्या इस घर की बहू बनकर आई ।
उस दिन से ही जेठानी मानवी ने सौम्या के सीधे सरल स्वभाव का भरपूर इस्तेमाल किया और हमेशा उस पर अपना दबाव बनाए रखा।
निर्मला जी भी इस बात को बहुत अच्छी तरह जानती थी और फिर निर्मला जी का स्वभाव कौन सा शांत था। वह भी तो क्रूर स्वभाव की ही थी इसीलिए दोनों सास बहू ने मिलकर हमेशा सौम्या के निश्छल मन का फायदा उठाया मगर हर बात की एक हद होती है । आज सौम्या से रहा नहीं गया और वह बोल उठी।
मम्मी जी आप मानवी दीदी से कुछ क्यों नहीं कहती जबकि उनके बच्चे तो अब बड़े हो चुके हैं। मैं कुछ कहती नहीं इसका मतलब यह नहीं है कि मैं हम दोनों बहुओं के प्रति हो रहे बर्ताव को मैं जानती नहीं हूं । मैं सब जानती हूं मम्मी जी… आप दीदी के हिस्से का भी काम मेरे से ही करवाती आई है। जब कहीं बाहर जाना हो तो, आपको दीदी याद आती है और अगर घर के काम हो तो आपको मैं याद आती हूं।
मम्मी जी मैं इसकी वजह भी जानती हूं । बड़े भैया भी गुस्से वाले हैं और कमाते भी ज्यादा हैं, जबकि रवि की आमदनी थोड़ी कम है भले भी हैं इसीलिए आप रवि का भी फायदा उठाती
आई है । आप बड़े भैया से कुछ नहीं कहती हैं और रवि के साथ आपका बर्ताव कैसा है । ये सब जानकार भी सब अनजान बने हुए हैं। शुरुआत से ही आपको रवि और मेरी जरूरत सिर्फ घर चलाने के लिए अपना काम निकलवाने के लिए पड़ती आई है। बाकी तो आपका बड़े भैया और मानवी दीदी की ओर ही झुकाव रहता है। रही बिखरी हुई रसोई समेटने की बात तो कल से ही राजा को बुखार है।
यह तो आप दोनों भी अच्छी तरह जानती हैं,तो मैं ऐसी हालत में अपने पांच वर्षीय राजा को अनदेखा कैसे कर सकती हूं । आपने मां होकर भी अपने दोनों बेटों के बीच भेदभाव किया… दोनों बहू के बीच भेदभाव किया मगर मैं तो नहीं कर सकती हूं मम्मी जी।
सौम्या के मुंह से ऐसी बातें सुनकर निर्मला जी कुछ कहती उसके पहले ही जेठानी मानवी तुरंत क्रोधित होकर कहने लगी।
आज महारानी के बड़े पंख निकल आए हैं । जो बोले ही जा रही है। घर के काम तो मैं भी करती हूं। क्या हुआ अगर थोड़ा कम करती हूं क्योंकि सब जानते हैं मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती
है।
जेठानी मानवी की बात सुनकर सौम्या तुरंत बोल उठी। आपकी तबीयत अगर ठीक नहीं है तो ठीक और अगर मेरी तबीयत सही नहीं है तो आपका यह कहना कि आजकल सभी की तबीयत ऐसी ही रहती है। सच कहिए क्या आप यह बात नहीं कहती है मुझसे?? तो क्या मैं इंसान नहीं हूं?? मेरा कोई दिल नहीं है या मेरा बदन नहीं है??
दोनों बहुओं की इस तरह की बातें सुनकर निर्मला जी भी बोल उठी। अरे सौम्या बहू चुप हो जा। न जाने अपने मायके से कैसे संस्कार लेकर आई है। जो बड़ों का लिहाज ही भूल गई है।
अपनी सासू मां निर्मला जी की बातें सुनकर सौम्या भी आज पूरी तरह ठान चुकी थी इसीलिए वह तुरंत बोल उठी।
मम्मी जी मैं तो अच्छे संस्कार लेकर ही आई हूं इसीलिए अब तक चुप रही मगर आपने और दीदी ने मेरे साथ जो किया तो फिर किसके संस्कार को गलत कहा जाए । यह तो आप भी भली-भांति जानती हैं।
दुनियां की किस किताब के किस पन्ने पर कहां लिखा है कि बड़ों का आत्म सम्मान होता है और छोटों का आत्म सम्मान बिल्कुल नहीं होता।
माफ कीजिए मम्मी जी जब बड़े प्यार करते हैं तभी उन्हें सम्मान मिलता है वरना वह सम्मान के हकदार हैं ही नहीं… मैंने एक तरफा रिश्ता बहुत निभा लिया मगर अब आज के बाद नहीं आज के बाद आप बड़े भईया और मानवी दीदी के साथ रह लीजिए।।
आखिर कोई भी छोटी बहू या देवरानी कब तक आत्म सम्मान खोकर जिएगी। मैं तो आपकी और दीदी की नजर में ऐसे भी बिल्कुल अल्हड़ हूं तो अल्हड़ ही सही कहकर सौम्या वहां से जाने लगी।
आज पहली बार निर्मला जी को अपने व्यवहार पर शर्मिंदगी महसूस हुई या फिर अपनी बड़ी बहू मानवी के साथ आगे की जिंदगी गुजारने की बातें सोच कर सिहर उठी क्योंकि किसी से दो घड़ी चिकनी चुपड़ी बातें करना अलग बात है और किसी के साथ जिंदगी गुजारना बहुत अलग ।
वह तुरंत सौम्या से क्षमा मांगते हुए कहने लगी
सौम्या तुम बिल्कुल सही कह रही हो। जब तक इंसान सहते जाता है। उसका फायदा सभी उठाते है भले फायदा उठाने वाला सबकी नजरों में गिर जाए। उसे कोई परवाह नहीं होती। भूल मेरी है मानवी को इतना बढ़ावा देना ही नहीं था।
मेरी नासमझी की वजह से तुझे इतना कुछ सहना पड़ा जबकि घर पर सास बहू दोनों का हक होता है। मुझे अपने आत्मसम्मान का ख्याल रहा मगर तेरे आत्मसम्मान का ख्याल रखना मैं भूल ही गई। परिवार में बिखराव की नौबत भी तभी आती है। जब घर के बड़े एकतरफा फैसले लेने लगते हैं खैर अब मुझे क्षमा कर दे क्योंकि आज के बाद ऐसी नौबत कभी नहीं आएगी और सौम्या अब जो हुआ उसे भूल जा कहते हुए निर्मला जी पश्चाताप भरी नजरों से सौम्या की ओर देखने लगी।
जेठानी मानवी भी थोड़ा संभल कर कहने लगी।
मुझे माफ कर दे मेरी छोटी बहन मुझसे भूल हो गई । आज मैं अच्छी तरह समझ गई हूं की परिवार में काम हमेशा मिल बांटकर ही किया जाता है ना कि अपने ओहदे का फायदा उठाना। मैंने हमेशा सबको कठपुतली की तरह नचाना चाहा सबके आत्म सम्मान के साथ खेलना चाहा मगर दूसरों के आत्म सम्मान को ठेस ठेस पहुंचाते पहुंचाते खुद के आत्म सम्मान को ही मैं खोती चली गई। सच कहूँ तो मैं सब की नजरों में गिरती चली गई।
मैं जेठानी का अधिकार तो जमाती रही मगर देवरानी को प्यार देना भूल ही गई आज के बाद में वादा करती हूं । अब तक जो तुम्हारी जिंदगी में मैंने बुरा किया है । अब उतना ही अच्छा करके दिखाऊंगी। मुझे सिर्फ एक मौका दे दे मेरी छोटी बहन कहते हुए जेठानी मानवी प्यार से सौम्या की ओर देखने लगी।
सौम्या अपनी सासू मां निर्मला जी और जेठानी मानवी की बात सुनकर शांत मन से बोल उठी।
ठीक है मम्मी जी और दीदी अगर आप दोनों खुद को बदलने को तैयार है तो फिर परिवार में अभी बिखराव की जरूरत नहीं है मगर इस बात को आप दोनों हमेशा याद रखना कि जब कभी भी फिर ऐसा वक्त आएगा। मेरा फैसला उस वक्त भी वही होगा जो आज कुछ देर पहले मैंने लिया था।
आज हम सब पुराने जख्म भूल कर सब एक साथ मिलकर नई जिंदगी की शुरुआत करें कहते हुए सौम्या अपनी सासू मां और जेठानी मानवी की ओर देखकर मुस्कुराने लगी। आज पहली बार निर्मला जी को भी अपनी बड़ी बहू मानवी और छोटी बहू सौम्या को अपने गले से लगाते हुए बहुत खुशी हुई और तसल्ली भी क्योंकि समय रहते उन्हें यह समझ आ गया था की आत्मसम्मान हर किसी का होता है।
स्वरचित
सीमा सिघी
गोलाघाट असम
#कब तक आत्म सम्मान खोकर जिएगी