रश्मि यह लो ₹10000 रूपये कल तुम्हारी एनिवर्सरी है ना जो चाहे खरीद लो और जहां चाहे पार्टी करना अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करना और इंजॉय करना विनय बोला। रूपये रश्मि के हाथ में रखता हुआ। , और तुम तुम नहीं इंजॉय करोगे तुम्हारी भी तो मैरिज एनिवर्सरी है मेरी अकेली की तो नहीं है ना,
हम दोनों ने ही शादी की थी साथ-साथ रहने के लिए एक दूसरे का साथ हर सुख दुख बांटने के लिए। यह क्या है मैं अकेले-अकेले कब तक इंजॉय करती रहूंगी रश्मि बोली। तुम भी साथ चलो ना तो अच्छा लगेगा। देखो यार मुझे तो दोस्तों के साथ पार्टी में जाना है उन्होंने कल मेरे लिए पार्टी रखी है।
लेकिन यह कहां तक सही है विनय कि हम दोनों अपनी ही शादी की पार्टी अलग-अलग करें ।अब दोस्तों को तो नाराज नहीं कर सकता ना। ठीक तो है तुम अपना अलग इंजॉय करो और मैं अपना अलग इतना कहकर विनय ऑफिस को निकाल गया।
रश्मि और विनय की शादी के 10 साल हो गए थे। रश्मि के सास ससुर थे जो अपने गृह नगर में रहते थे।।यहां गुड़गांव में किराए के फ्लैट मे रश्मि और विनय रहते थे। रश्मि की एक बेटी थी 6 साल की। विनय यहां आईटी कंपनी में नौकरी करता था। बहुत ज्यादा सैलरी नहीं थी विनय की हां ठीक-ठाक से घर चल जाता था ।
रश्मि हर समय विनय से कहती रहती थी कोई दूसरी नौकरी ढूंढो, जहां ढंग की सैलरी हो इतने पैसे कम पड़ते हैं पैसे ठीक-ठाक होंगे तो अपना रहन-सहन अच्छा कर सकते हैं। और फिर बेटी भी बड़ी हो रही है उसकी पढ़ाई लिखाई का भी खर्चा तो बढ़ जाएगा। और देखो मेरी सहेलियों कितनी पार्टी वगैरा करती रहती है
लेकिन मैं नहीं जा पाती। विनय कोशिश तो कर रहा हूं कहीं अच्छी नौकरी मिल जाए। इस बार दिवाली में जो विनय माता-पिता के पास गया तो उन्होंने कुछ पैसे इकट्ठे कर रखे थे । वह जानते थे कि विनय को शहर में पैसे कम पड़ते हैं । उन्होंने पैसे विनय को दे दिए। यह लो बेटा कुछ पैसे रखे हैं हर समय कहता रहता है
ना की सैलरी कम मिलती है तो मुश्किल होती है। विनय की पिताजी ने मोहन जी ने पैसे देते हुए विनय को कहा। बेटा पैसे मेरे पास इकट्ठे हुए हैं वहां शहर में रहने में तुम्हारी सैलरी पूरी नहीं पड़ती तो ले जाओ।
विनय पैसे लेकर वापस शहर आ गया।।विनय को शराब पीने की आदत । अक्सर दोस्तों के साथ बैठकर पार्टी करता था रश्मि मना करती थी लेकिन वह मानता नहीं था। कहता था अरे यार तुम मेरी दोस्ती भी छुड़वा दोगी क्या । अब शादी हो गई है तो इसका क्या मतलब दोस्तों को छोड़ दूं। इस तरह की बातें करके वह दोस्तों के पास चला जाता था।
घर में तीनों में से किसी एक की जन्मदिन की पार्टी या कोई अन्य मौका हो तो विनय को बस अपनी पार्टी करनी होती थी । आज रश्मि ने अपनी बेटी आयरा का जन्मदिन रखा । ज्यादा बड़ी नहीं बस तीन-चार सहेली और दो-तीन और अडोसी पड़ोसी और आयरा के बराबर के बच्चे थे बस।
रश्मि ने विनय से कहा था कि जल्दी आ जाना लेकिन रात के 9:00 नहीं आया रश्मि की छोटी सी पार्टी बिना विनय की ही निपट गई। और सभी लोग अपने घर चले गए रात के 10:00 बजे विनय पीके घर आया तो रश्मि ने कहा आज तुम्हारी बेटी का जन्मदिन था और तुम ही गायब थे।
कितना खराब लग रहा था उन्हें सब लोग पूंछ रहे थे । अरे तो क्या हो गया बच्चों की ही तो पार्टी थी छोटी सी।कौन सी बड़ी पार्टी थी तुमने निपटा तो दिया। देखो यार मेरे दोस्तों की भी तो पार्टी देनी थी ना वह लोग भी तो पार्टी मांग रहे थे इतना करके विनय सोने चला गया।
यही हाल था विनय का । रश्मि सोचती कभी मेरा या विनय का या आयरा का जन्मदिन है या मैरिज एनिवर्सरी है तो हम सब मिलकर कहीं पार्टी करे और इंजॉय करें। लेकिन विनय अपने दोस्तों के साथ ही पार्टी मनाते । दिन में जब विनय ठीक-ठाक होता तो रश्मि समझती देखो विनय घर सिर्फ पैसों से नहीं चलता ।
घर में रिश्तों को संभालना पड़ता है । हम दोनों को अपनी परिवार से माता-पिता से ऐसे संस्कार तो नहीं मिले हैं कि तुम इस तरह से व्यवहार करते हो। रिश्तों को समझना सीखो। अरे हमारी बेटी है वह धीरे-धीरे बड़ी हो रही है । तुम हर मौके पर घर से नदारत रहती हो तो उसके मन मस्तिष्क पर क्या असर पड़ेगा
कि पापा तो हमारी किसी भी पार्टी में और किसी काम में साथ नहीं रहते । ऐसा क्यों करते हो । अरे दोस्तों के साथ पार्टी करते हो तो ठीक है ,
लेकिन यदि कोई खास दिन है तो कम से कम हम दोनों के साथ तो रहो । तुम ठीक कह रही हो रश्मि उस समय तो विनय ठीक है ठीक है कर देता लेकिन फिर वही रवैया चलता रहता।रश्मि विनय की इस आदत से परेशान हो गई थी
अगले महीने रश्मि की शादी की सालगिरह थी।। इस बार रश्मि ने पहले से ही विनय को कह रख रखा था कि हम लोग यूनिवर्सि साथ साथ मनाएंगे पहले मंदिर जाएंगे फिर इधर-उधर घूमेंगे और खाना खाएंगे।
हां हां ठीक है। देखो विनय मैंने साड़ी निकली है उस दिन पहनने के लिए कैसी है यह, ठीक है लेकिन तुम तो साड़ी पहनती नहीं हो। हां लेकिन बहुत दिनों से यह साड़ी रखी है मम्मी ने दी थी कहीं पहनने का मौका नहीं मिल रहा था तो सोच रही हूँ उस दिन पहन लूं।
रश्मि अपनी और विनय की शादी के दिन को एंजॉय करने के तरह-तरह की मंसूबे बना रही थी। हर बार तो विनय दोस्तों के पास ही चला जाता है। लेकिन इस बार मना किया है मैंने चलो मान लिया है तो अच्छी बात है। आज जब ऑफिस को निकलने लगा तो ₹10000 रश्मि को दिया था यह पैसे किस लिए,
अरे आज की पार्टी के लिए। लेकिन इस बार तो हम लोग साथ-साथ पार्टी मनाएंगे ना, हां ठीक है लेकिन पैसे रख लो । एक बात बताओ विनय इतने पैसे आए कहां से तुम्हारे पास अरे वह घर गया था तो मम्मी पापा से मिलने इस बार पापा ने कुछ पैसे दिए थे उसी में से मैं तुम्हें दे रहा हूं
आज रश्मि खुश हो रही थी। शाम के वक्त का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। तभी रश्मि को बेटी आयरा जाकर पूछने लगी हम कहां जा रहे हैं मम्मी। हम लोग बेटा आज पार्टी करने जा रहे हैं। तो क्या पापा भी साथ में चलेंगे। हां आज पापा भी साथ चलेंगे तब तो बहुत मजा आएगा ।
चलो बेटा अब तुम भी तैयार हो जाओ आओ मैं तुम्हें तैयार कर दूं फिर मैं तैयार होती हूं। आयरा को तैयार करके रश्मि खुद तैयार होने लगी । मम्मी आज यह तुमने क्या पहना है ,यह साड़ी है बेटा । बहुत अच्छी लग रही है मम्मी मै भी बड़ी होकर साड़ी पहनूंगी ।मां बेटी की प्यार भरी बातें होती रही समय का पता ही नहीं चला।
विनय का आफिस से लौटने का वक्त हो गया था। लेकिन विनय अभी तक आया न था। रश्मि इंतजार कर रही थी लेकिन समय निकलता जा रहा था और विनय नहीं आया। आयरा बार बार पूछं रही थी मम्मा हम कब जाएगें पाटी करने। लेकिन रश्मि कुछ बोल नही रही थी उसकी आखों से आंसू बहने लगे। विनय के प्रति मन मे गुस्सा भर रहा था।
विनय ने मेरी बात नहीं मानी। गुस्से में आकर रश्मि ने जब रात के दस बजे गए तो और विनय नहीं आया तो रश्मि ने साड़ी उतार दी। आयरा पूछने लगी क्यों साड़ी उतार रही हो मम्मा हम पाटी मे नही जाएगें क्या, नहीं बेटा हम नहीं जाएगें।
रात की 11:00 बजे विनय पीए हुए घर वापस लौटा और लड़खड़ाते कदमों से घर में प्रवेश किया। रश्मि चुपचाप दरवाजा खोलकर अंदर चली गई। और कैसी रही पार्टी तुम्हारी रश्मि बोलते हुए बिस्तर पर गिर पड़ा। सुबह रश्मि उठी और चुपचाप अपना काम करती रही,
विनय से कोई बात नहीं की। चाय लेकर आईतो विनय पूछ लिया की तुम्हारी पार्टी कैसी रही। लेकिन हमारी क्या बात हुई थी विनय कि हम इस बार तीनों मिलकर पार्टी करेंगे। अरे वह दोस्तों ने पकड़ लिया आने ही नहीं दिया । हां जब दोस्त ही घर परिवार पत्नी बेटी सब से जरूरी है तो जाओ दोस्तों के संग ही रहो ।
तुम्हें घर और पत्नी की कम जरूरत है और दोस्त की ज्यादा। और यह लो तुम्हारे ₹10000 रख लो और उससे भी अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर लो । अरे नाराज क्यों होती हो ,नाराज क्यों। होती हो क्या मतलब है। तुम हर वक्त यही कहते रहते हो। देखो घर परिवार,उसके लिए प्यार अपनापन और मां-बाप के दिए हुए संस्कार से चलते हैं ।
लगता है तुम्हें घर में तुम्हारे मां-बाप से कोई संस्कार नहीं मिले हैं कि यह घर कैसे चलाया जाता है। परिवार कैसे रखा जाता है पत्नी और बेटी की खुशियों का ख्याल कैसे रखा जाता है । मैं आज के बाद से कभी तुम्हारे साथ कहीं नहीं जाऊंगी
रश्मि और विनय की बातचीत नहीं हो रही थी चार दिन निकल गए ।अब विनय ने सोचा सच में रश्मि नाराज है मुझे बहुत बड़ी गलती हो गई है ।अब आगे और न स्थिति खराब हो जाए माहौल को ठीक करना ही पड़ेगा ।
आज ऑफिस से जल्दी घर जाकर विनय रश्मि को मानने लगा माफ कर दो रश्मि तुम इतना नाराज हो जाओगी पता नहीं था। क्या बताओ क्या करूं मै, रश्मि अच्छा चलो आज फिर से वही साड़ी पहनो और हम लोग कहीं का बाहर जाकर खा पीकर आते हैं विनय बोला ।
लेकिन मुझे नहीं जाना कहीं भी रश्मि बोली। विनय कान पकडकर सामने बैठ गया अब मान भी जाओ रश्मि ,अब से ऐसा नहीं होगा प्लीज प्लीज रश्मि रश्मि रश्मि । लेकिन रश्मि टस से मस ना हो रही थी । आखिर में हार कर विनय बाहर ड्राइंग रूम में जाकर सोफे पर लेट गया । अब रश्मि का दिल थोड़ा पसीजा वह विनय को बुलाने गई चलो अंदर बेडरूम में लेटो चलकर । नहीं मैं यही ठीक हूं।
रश्मि ने विनय की बालों में हाथ फिराया उसका दिल पसीज गया अब नहीं करोगे ना विनय ऐसा, नहीं रश्मि अब मैं नहीं करूंगा ऐसा कभी एक बार और माफी मांगता हूँ।फिर दोनों गले लग गए । शिकायत दूर हुए सुबह-सुबह घर में फिर वही खुशनुमा सा माहौल हो गया। हम लोग साथ-साथ चाय पीते हैं चाय लेकर बैठी रश्मि से विनय ने कहा। सही किया तुमने रश्मि रिश्ते नातो को निभाने की सबक सिखा दी तुमने।
सिर्फ दोस्ती सब कुछ नहीं होते घर परिवार पहले है अब हमेशा याद रखूंगा। दोस्तों के पास जाओ विनय लेकिन परिवार को नजर अंदाज करके नहीं। घर परिवार पहले है बाकी सब कुछ बाद में । हां रश्मि तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे रास्ते पर लाने के लिए और रिश्तों की अहमियत बताने के लिए।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
9 जुलाई