मां को सिल्क की साड़ियां पहनने का बहुत शौक था और 2 अक्टूबर से पहले कनॉट प्लेस के खादी ग्रामोद्योग भवन में खादी की सेल से वह बहुत साड़ियां लाती थी।
मुझे आज भी याद है 2 अक्टूबर के आसपास दिल्ली के कनॉट प्लेस के सिनेमा हॉल रीगल पर पिक्चर देखना और उधर खादी ग्रामोद्योग के शोरूम से सिल्क की साड़ियां खरीदना। जब भी वह घर से बाहर जातीं तो मैं उनकी अलमारी में से साड़ियां निकालकर और पहन कर और आईने में खुद को देख कर बहुत खुश होती थी ।
अब मुझे महसूस होता है कि साड़ियों की तह मैं अपनी मम्मी के जैसे तो नहीं बना पाती थी ,इसका मतलब उन्हें जरूर पता चल जाता होगा कि मैंने उनकी साड़ी पहन के देखी है पर उन्होंने मुझे कभी भी कुछ नहीं कहा। जब मैं बड़ी हो गई थी और कॉलेज में चली गई थी तो पापा जब मम्मी को साड़ी दिलाते थे
तो मेरी पसंद की भी कुछ सिल्क की साड़ियां मुझे भी दिलवा देते थे ताकि मैं अपनी शादी में वह साड़ियां ले जा सकूं। मेरी साड़ियां मम्मी अलग सहेज कर रखती थी। सच पूछिए पाठकगढ़ रखी हुई साड़ियों के कारण ही मैं अपनी शादी होने का बहुत बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि कब मेरी शादी हो और मुझे वह साड़ी सिल्क की साड़ियां पहनने को मिलें।
मुझे आज भी याद है कि अपनी सगाई की रस्म पर मैंने बजाय कि नई साड़ी पहनने के अपनी मां की मनपसंद साड़ी पहनकर रस्म अदायगी करवाई ।मैं उस साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थी ।
और शादी के बाद अपनी मम्मी की वही साड़ी अपने साथ ससुराल में ले आई। कई बार वह हंसते हुए अपनी साड़ी के बारे में पूछतीं तो मैं यही कहती थी कि यह साड़ी तो अब मेरी हो गई है। इसे मैंने अपनी सगाई पर पहना था। केवल साड़ी ही नहीं मैं अपनी मम्मी का ब्लाउज भी उठा लाई थी।
मां तो अब इस दुनिया में नहीं है। शादी के 46 साल बाद भी जबकि मेरी बेटी की भी शादी हो चुकी है और उसकी बेटी ने भी अपनी 12th की फेयरवेल पार्टी में साड़ी ही पहनी थी। इतनी उम्र होने के बाद भीआज वह साड़ी मेरे पास वैसे ही ड्राई क्लीन करी हुई पड़ी है। उसे समय का सिल्क बहुत मजबूती होता होगा ना ही उनका रंग उतरा है ।
अब भी कभी-कभी मैं उस साड़ी को पहनकर आईने के सामने बैठकर खुद को देखती हुई जाने किन यादों में खो जाती हूं। वह साड़ी पहन के आईने में देखने के बाद आज मैं खुद में ही अपनी मम्मी की छवि पाती हूं। कभी उसे साड़ी को पहनने के बाद मैं आज से 47 साल पीछे अपनी सगाई के समय पर ही पहुंच जाती हूं।
उसे साड़ी में ही खींची गई अपनी फोटो को मैंने अपनी फेसबुक की प्रोफाइल पिक बनाई हुई है। मेरी बहन ने और भाई तो वह फोटो देखने के बाद हमेशा कहते हैं कि मैं बिल्कुल अपनी मम्मी जैसी लग रही हूं। पाठकगंज में हरी और मेहरून सिल्क की साड़ी मेरी सबसे प्रिय साड़ी है।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा