कुलकलंकिनी – खुशी

मंदा ओ मंदा कहा मर गई कब तक सोती रहेगी।कल्याणी चिल्लाते हुए मंदा के कमरे में आई पर मंदा अपने बिस्तर पर नहीं थी।पास एक चिट्ठी पड़ी थी भाभी मै अपने सपनों को पूरा करने जा रही हूं।मै तुम्हारे शराबी भाई के साथ अपना जीवन नरक नहीं बना सकती क्योंकि मां बाबा के जाने के बाद भाई भी सिर्फ आपकी बात सुनते है उन्हें प्रॉपर्टी की चिंता है

उन्हें अपनी बहन से कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए मैं जा रही हूं।कल्याणी नीचे आई और चिल्लाने लगी देखो अपने भाई को कुल को कलंक लगा कर भाग गई। कुलकलंकिनी कही की।मेरी औलाद ऐसा करती तो जान ले लेती।इतना अच्छा घर वर ढूंढा था मैने सब मिट्टी में मिला कर चली गई और तुम्हे पता है बोली है कि तुमसे हिस्सा भी मांगेगी।

जो बापू उसके नाम कर गए हैं तुम तो आज ही वकील साहब को बुलाओ और बोलो वो भाग गई है तो उसका हिस्सा हमारे बच्चों का।प्रकाश सिर पकड़ कर बैठ गया नाजों में पली बहन ने ये क्या कर दिया वो मुझसे हिस्से बाट करना चाहती थी।क्या जवाब दूंगा मै ससुराल वालों को शाम तक कल्याणी का भाई भरत वहां पहुंच गया।

दीदी ओ दीदी कहा गई मंदा ।मुझे क्या पता कहती है शराबी से शादी नहीं करूंगी।मेरा क्या होगा अरे तू चिंता क्यों करता है तेरी बहन है अभी अभी तो तू अपने जीजाजी के सामने नाटक कर की तुझे मंदा के जाने का दुख है और एक बार उसका हिस्सा हमारे नाम हो जाए तो बस।

कल्याणी और भरत प्रकाश के कान भरने लगे उसने भी अपनी बहन को दोषी मान लिया और वकील को बुला सब जगह से मंदा को बेदखल कर दिया।कल्याणी अपने हर रिश्तेदार को कहती कलंकिनी थी घर की मर्यादा मिट्टी में मिला अपने यार के साथ भाग गई।

प्रकाश ने मंदा के कॉलेज भी पता करवाया सहेलियों से पर कोई सुराख नहीं मिला।दिन बीत गए पर मंदा का कुछ पता नहीं चला।

समय अपनी गति से गुजर रहा था। अब कल्याणी का भाई भरत उन्हीं के घर रहने लगा था।प्रकाश अपने  काम में व्यस्त रहता क्योंकि आढ़ती था तो सुबह जल्दी जाना दोपहर तक आना फिर शाम को दुकान पर निकल जाना सो पूरे घर की जिम्मेदारी कल्याणी की थी ।कल्याणी का दिमाग मायके वाले चलाते थे।खास कर भरत  जो बात बात में उससे पैसे लूटता था। भरत शुरू से ही मंदा पर गंदी नजर रखता था

जब तक उसके पिता देवी दयाल जिंदा थे तब तक तो वो उनके घर में नहीं आता था परंतु जैसे ही उनका देहांत हुआ सब बदल गया।मंदा की मां जब वो दसवीं में थी तब चल बसी थी।मंदा पढ़ लिख कर पुलिस में जाना चाहती थीं।पिता का भी अरमान था बेटा नहीं पढ़ पाया

तो क्या उसने खानदानी व्यापार अच्छे से संभाल लिया है बेटी भी जो करना चाहती हैं करे हम उसका साथ देंगे क्योंकि पढ़ने में मंदा होशियात थी।जब देवी दयाल का निधन हुआ तब मंदा  पुलिस की परीक्षा की तैयारी कर रही थी। पिता के देहान्त से वो टूट गई और एक दिन  भाभी का फरमान आया पढ़ाई लिखाई बंद करो तुम्हारी शादी है।मंदा ने भाई भाभी को कितना समझाया पर वो नहीं माने।

भरत की गंदी नजर मंदा को काट कर रख देती।मंदा की सहेली ज्योति को उसने अपनी परेशानी बताई ।ज्योति ने अपने माता पिता से यह बात डिसकस की ज्योति के पिता दीनदयाल जी को जानते थे और बचपन से दोनो का आना जाना था उन्होंने भी प्रकाश और कल्याणी को समझाने की कोशिश की परंतु कल्याणी ने उनका भी अपमान किया ।

पुरुषोत्तम जी ने सोचा कि क्या किया जाए उन्होंने देख लिया था कि ये उसका जीवन बर्बाद कर देंगे और मंदा अपनी लिखित परीक्षा पास कर चुकी थी।उन्होंने सब इंतजाम करा मंदा को ज्योति के साथ भेज दिया। मंदा जाने के बाद पुरुषोत्तम जी भी घर आए उनका तब भी कल्याणी ने अपमान किया।

पुरुषोत्तम जी ने ही मंदा को गायब किया है वो नहीं चाहते थे कि उसकी शादी हो उनकी पत्नी और बेटी ज्योति भी इस साजिश में शामिल है।

तब पड़ोसियों ने बीच बचाव किया पर पुरुषोतम जी ने कुछ समय बाद वो मोहल्ला बदल लिया।साल गुजर गए मंदा का किस्सा पुराना हो गया था पर कल्याणी प्रकाश को सुनाने का मौका नहीं जाने देती।कल्याणी के बच्चे अब बड़े हो गए बेटी सोलह साल की दिया बेटा नमन 14 साल का था।दिया ट्यूशन पढ़ने जाती थी

आज बड़ी बारिश थी वो क्लास के लिए निकली अपनी सहेली के साथ ट्यूशन गई।बच्चे कम थे तो तो सर ने छुट्टी जल्दी कर दी।वहां से निकल दोनो सहेलिया चाट खाने लगी।बारिश घिर आईं तो दोनों घर की तरफ दौड़ी।वही दिया कि नजर अपने बॉयफ्रेंड कार्तिक पर पड़ी

उसने अपनी सहेली मधु से कहा तू घर जा मै आती हूं।अरे बारिश है घर चल कार्तिक के साथ लड़के खड़े हैं अच्छे नहीं हैं तो तू भी चल दिया बोली ना बाबा कार्तिक बोला यहां क्यों खड़ी हो इतनी बारिश है लाओ मैं छोड़ दूं।पर तभी सामने से मधु के पापा आते हुए दिखे मधु दिया को एक तरफ ले कर बोली पापा ।

उन्होंने कहा बारिश में यहां क्या कर रही हो चलो घर ।कार्तिक भी एक तरफ छुप गया।दिया के जाते ही कार्तिक का दोस्त बोला साली चली।गई मौसम का मजा भी ना ले पाए।तू चिंता मत कर मजा तो हम लेंगे आज नहीं कल ।दिया कार्तिक के प्यार में पागल हो रही थी।

उसे अपनी तस्वीरें निजी तस्वीरें सब साझा करती।आज शहर में गहमा गहमी थी।नई पुलिस कमिश्नर पुलिस वालों से मीटिंग थी कैसे शहर में सुरक्षा बढ़ाई जाए अपराध रोके जाए।वो और कोई नहीं मंदा थी जो आज इतनी ऊंची पोस्ट पर अपनी मेहनत से थी और उसके पति राघव साइबर क्राइम  थे।

इतनी कम उम्र में दोनो ने अपनी मेहनत से ये मुकाम बनाया था।तभी इंस्पेक्टर कपिल का फोन बजा की दो लड़कियां  घर नहीं पहुंची है।मंदा ने कहा इनफॉर्मेशन लो पेरेंट्स से बात करो।बहुत शोर था दोनो लड़कियों की मां रो रही थी। बच्चियl स्कूल से घर नहीं पहुंची।

पुलिस ने रिपोर्ट लिख तहकीकात शुरू की पर कुछ पता नहीं चला उसी समय मंदा उस स्टेशन का दौरा करने आई उसने अपने भाई भाभी को देखा वो वहां पहुंची उसने सारा मामला समझा और पुलिस वालों को अलर्ट पर डाल दिया सब तरफ पुलिस भेजी गई।स्कूल पता चला वो आज आई ही नहीं सब इन्क्वारी में कार्तिक का नाम आ रहा था।

उसके माता पिता को बुला कर पूछताछ की गई फोन सर्विलांस पर डाले गए।ईश्वर की कृपा रही कुछ बुरा होने से पहले लड़कियां मिल गई।उन दोनों को लेकर मंदा अपने मायके पहुँची।बच्ची को देख कल्याणी पागल हो गई और उसे मारने लगी।मंदा बोली भाभी मत मारो बच्ची है अभी सही गलत की पहचान नहीं है।प्रकाश और कल्याणी ने देखा ये तो मंदा थी।

मंदा तुम ऐ ये हमारी मैडम है कॉन्सटेबल बोला ।नहीं मोहन ये मेरे भाई भाभी है।आप लोग बाहर रुको।प्रकाश और कल्याणी बोले मंदा तुम ने हमारी बेटी को बचा लिया अपना कुल बचा लिया नहीं तो कलंकित हो जाता जैसे मेरे जाने से हुआ था क्यों भाई भाभी आप लोगों ने यही तो नाम दिया था मुझे कुलकलकिनी।

मैने कुल को क्लंकित नहीं किया अपितु अपना जीवन नरक होने से बचाया था और भाई आप अपनी बहन को जानते हुए भी अनजान बने रहे। भरत भी आया मंदा बोली ये नाग अभी भी यही है इसे निकालो इसकी नज़रे इतनी गंदी है वहशत होती थी मुझे इसके चेहरे से।

प्रकाश बोला बहन मुझे माफ कर दे तूने तो इस परिवार को कलंक से बचाया है हा मंदा मुझे माफ कर दो मै पैसों के लालच में तुम्हारे साथ गलत करने  चली थी प्लीज़ मुझे माफ कर दो। भाभी इस उमर में बच्चों को सही गलत समझ।ना बहुत जरूरी है। दिया बेटी कभी भी अपनी पर्सनल चीज़ें या प्राइवेट मोमेंट किसी के साथ शेयर नहीं करते ।

उस लड़के का फोन।अकाउंट सब हमने फ्रिज कर दिए है।तुम्हारे फूफाजी।सब देख लेंगे।आगे से किसी के बहकावे में मत।आना समझी पढ़ाई करो और पापा का नाम रोशन करो।मंदा के कारण बात कही फैली नहीं सबको यही पता था कि बच्चियों को किसी ने उठा लिया था।प्रकाश और कल्याणी मंदा के घर आए उससे माफी मांगने।

मंदा ने कहा हमेशा बेटियां परिवार को कलंक नहीं लगाती अपने परिवार को कलंक से बचाती भी है।मैने आपको माफ किया बेटी को अच्छी शिक्षा दिलवाए और काबिल बनाए।राघव बोले मैडम अब चाय नाश्ता भी करवाओगी भाई को या नहीं।मंदा चाय का बोलने चली गई और कल्याणी सोचने लगी कुल्कलंकिनी ये थी या मै थी।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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