कुल कलंकिनी – अरुणा गर्ग

प्रिया मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता प्लीज़ अपने पापा से बात करो ना कि वे तुम्हारी शादी अभी न करें” 

रोमिल

उससे मिन्नतें करने लगा।

“नहीं रोमिल मैं नहीं कह सकती, तुम मेरी मजबूरी समझो। मैं भी तुम्हें चाहती हूं पर पापा ने शादी की डेट राघव से तय कर दी है।कार्ड छप चुके हैं। पापा को अपनी इज्जत बहुत प्यारी है।”

सबको पता चल गया था।वह अब शादी से मना करने में असमर्थ है मां पापा सबका दिल टूट जाएगा।

रोमिल – चलो हम कहीं जाकर शादी कर लें। मुझे जाब मिल ही जाएगी फिर हम सबको मना लेंगे।वे हमें माफ कर ही देंगे।

वह सोच में पड़ गयी।वे दोनों कोलेज में साथ पढ़े थे। रोमिल अब एम बी ए कर रहा था। वहीं प्रिया के स्नातक होते ही पापा रिश्ते देख रहे थे। प्रिया मम्मी पापा को बताना चाहती थी पर उससे पहले ही राघव के घर वाले उसे पसंद कर शगुन कर गए। पापा, भैया को खुश देख वह शांत थी।वह कमरे में खूब रोती पर बाहर सामान्य रहती।

उसकी सहेली ने बहुत कहा मैं बात करूं पर हिम्मत नहीं हुई।वह जानती थी कि दोनों के परिवार,समाज और स्टेटस में अंतर है। पापा कभी राज़ी नहीं होंगे।वह राघव से ही शादी करके परिवार की इज्ज़त रखना चाहती थी। उसने रोमिल से सब संपर्क तोड़ दिया।

१५ जून को उनकी सगाई थीराघव से। रोमिल ने मिलने की कोशिश की पर वह न मिल सका।

आखिरकार रोमिल ने अपनी कजिन सिस्टर को बताया। उन्होंने उसे समझाया कि हम ब्राह्मण है वे क्षत्रिय। कैसे भी तुम्हारी शादी नहीं हो सकती।कल को वह तेरे साथ चली भी गई तो# कुल कलंकिनी कहलाएगी । क्या तू अपनी प्रिया को टूटते देख सकता है। नहीं भाई, तुम्हें उसे कच्ची उम्र का आकर्षण मात्र समझ भूलना चाहिए।वक्त के साथ वह अपने नये घर में रम जाएगी।तू भी सब भूल कर पढ़ाई पर ध्यान देना।हो सकता है आगे कोई खूबसूरत, तेरे लायक लड़की मिल जाए।

रोमिल ने दिन रात गहराई से विचार किया। फिर उसे लगा। यदि प्रिया अपने परिवार की इज्ज़त बचाना चाहते है तो मैं भी ग़लत रास्ते क्यूं जाऊं।

वह भी जी-जान से पढ़ाई में जुट गया।तीन साल बाद उसे एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिल गई।अब वह और सिमरन जो उसकी कलीग है शादी अन्य रहे हैं। वहीं प्रिया भी अपने परिवार में खुश है।

अरुणा गर्ग 

स्वरचित रचना।

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