*रिश्तों की जमा – पूंजी* – तोषिका

“अब तो तू बड़ा हो गया है, तेरे लिए भी लड़की ढूंढना शुरू कर रहे है, तेरे मम्मी पापा।” सिर पर हाथ फेरती हुई विकास की दादी रजनी बोली। तभी पीछे से विकास के पिता जी आए और बोले “जी मां, ढूंढना तो शुरू कर दिया है। कुछ लड़कियां है जो मैने और विकास की मां ने पसंद की है, उनके घर जाएंगे आज।”

कई रिश्ते देख कर आने के बाद भी उनको विकास के लिए कोई लड़की पसंद नहीं आई। जब वो लोग वापस घर आए तो रजनी ने पूछा

“आ गए लड़की वालों के घर से रिश्ता देख कर, कोई लड़की पसंद आई?”

“नहीं मा कोई भी रिश्ता पसंद नहीं आया।” विकास के पिता बोले।

क्यों, कोई भी लड़की पसंद क्यों नहीं आई? क्या उनको हमारा विकास पसंद नहीं आया क्या? रजनी ने अचंभित हो कर बोला।

विकास के पिता ने बात बतानी शुरू की क्या क्या हुआ।

*कुछ घंटों पहले*

पहले घर में गए, वहां पर सब बढ़िया था बस विकास को लड़की थोड़ी सांवली लगी इसीलिए मना कर दिया।

दूसरे घर में गए तो सब सही था पर विकास के पिता को उनका खानदान पसंद नहीं आया।

तीसरे घर में गए तो लड़की थोड़ी मोटी थी इसीलिए विकास ने मना कर दिया।

चौथे घर में गए तो उन्होंने दहेज के लिए साफ मना कर दिया, और ये चीज़ विकास के पिता को और विकास दोनों को ही अच्छी नहीं लगी इसीलिए उन्होंने अच्छे खासे रिश्ते को भी मना कर दिया।

ऐसे करते करते उन्होंने बाकी रिश्तों का बताया और रजनी ने पूरी बात ध्यान से सुनी।

उस समय तो रजनी ने कुछ नहीं बोला बस बात सुन कर चली गई क्योंकि कही ना कही उनको भी पता था कि अभी ये नहीं समझेंगे।

*कुछ दिन बाद*

रजनी ने विकास को अपने पास बुलाया और बोला “आज से तू मेरे घर रह रहा है और तू मुझे हर महीने इसका किराया देगा या फिर एक साथ ही पूरे साल का हिसाब दे दे।”

विकास ये सुन कर हैरान हुआ और बोला “दादी, ये आप क्या कह रही है? ये तो मेरा घर है, भला मैं क्यों पैसे दूंगा?”

इतनी देर में रजनी कुछ बोले कि विकास ने चिल्लाया “पापा…पापा जल्दी आए यहां पर, देखिए दादी क्या बोल रही है।”

उधर जब विकास के पिताजी आए तो उसने पूछा “क्या हो गया, क्यों सुबह सुबह चिल्ला रहे हो?”

विकास ने सारी बात विस्तार से बताई और बोला “मां, ये तुम क्या कह रही हो? विकास इस घर का इकलौता बेटा है और तुम्हारा इकलौता पोता भी।”

रजनी ने बड़े आराम से बोला “जो तुमने सुना और अकेला विकास ही नहीं बल्कि तुम भी पैसा दोगे, आखिर तुम भी मेरे घर में रहते हो।”

सब वहां हैरान थे कि विकास की मां आई तब विकास ने रजनी को बोला “अगर हम पैसे दे रहे है तो, मां भी पैसे देंगी।”

रजनी ने बोला “नहीं, तुम्हारी मां, पैसे नहीं देंगी और वैसे भी वो पहले से ही दहेज के नाम पर घर का किराया दे चुकी है।”

किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि तभी विकास के पिता बोले “मां, साफ साफ कहो कहना क्या चाहते हो। मुझे कुछ भी नहीं समझ आ रहा है।”

रजनी हल्का सा मुस्कुराई और बोली “मैं वो ही कह रही हू, जो तुम लोग कर रहे थे।”

विकास और विकास के पिता, दोनों ने ही साथ में बोला “हम क्या कर रहे थे?”

रजनी ने तब बोला “तुम्हारे पास इतने अच्छे अच्छे रिश्ते थे और तुमने उनको बस इसीलिए ठुकरा दिया क्योंकि कोई सांवली है, तो किसी का घर अच्छा नहीं है या फिर वो दहेज के खिलाफ है। लेकिन तुमने कभी ये नहीं सोचा कि रिश्ता इन सब को नहीं देखता है बल्कि उसकी जमा पूंजी को देखता है और हर लड़की के लिए उसका मायका और उसकी शादी की जमा पूंजी से कम नहीं है और इसका तोल भाव दुनिया की कोई भी दौलत नहीं कर सकती है।”

इतनी ही देर में दोनों कुछ बोले रजनी ने अपनी बात आगे बोली “जो संस्कार उसके माता पिता ने उसको दिए। जिनको देख कर जिनके सामने वो बड़ी हुई वो सब वो एक नए घर में ले कर आती है। अपना सब कुछ पीछे छोड़ कर आती है, वो भी किसके लिए एक अंजान परिवार के लिए जो आने से पहले उस से दहेज मांगता है? तो फिर तुम लोगों से किराया लेना कोई गलत है? एक लड़की नए घर में आ रही है तो उसको ऐसे कभी अपना पन महसूस होगा?”

इन सब सवालों का जवाब दोनों बाप बेटे में से किसी के पास नहीं था।

विकास के पिता थोड़ी देर बाद बोले “पर मां, विकास की मम्मी ने भी तो दहेज दिया था, तब आपने क्यों कुछ भी बोला?”

रजनी बोली “तब मैं बंधी हुई थी और मैं चाह कर भी के7च नहीं कर सकती थी। लेकिन मुझे किस्मत ने मौका दिया कि मैं वो गलती, वो प्रथा जो चली आ रही है, उसको दुबारा ना होने दूँ।”

आखिरी में रजनी ने बस इतना ही बोला “बेटा ये *रिश्तों की जमा – पूंजी* हमेशा संभाल कर रखना, आगे यही काम आएगी।”

दोनों बाप और बेटे को अपनी गलती का एहसास था और उन्होंने विकास का रिश्ता वही जोड़ा जिनहोने दहेज के लिए इंकार किया था।

शादी बड़ी धूम धाम से हुई और एक नई प्रथा की शुरूआत हुई।

लेखिका

तोषिका

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