संस्कार

शहर के एक शांत पार्क के कोने में बैठी अंजलि की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसके घर में आज सुबह ही एक बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा हुआ था। अंजलि के बड़े भाई और घर की बागडोर सँभालने वाली उसकी बड़ी भाभी ने उसका रिश्ता किसी और रसूखदार परिवार में तय करने का फरमान सुना दिया था। बड़ी भाभी के लिए समाज में रुतबा, बैंक बैलेंस और झूठी शान ही सब कुछ थी। जब अंजलि ने रोते हुए रोहन का ज़िक्र किया, तो भाभी ने साफ कह दिया था कि एक मामूली सी नौकरी करने वाले लड़के के साथ वो अपनी ननद को कभी नहीं ब्याहेंगी। अंजलि को लग रहा था जैसे उसकी दुनिया उजड़ रही है। तभी रोहन वहाँ पहुँचा। अंजलि को इस कदर टूटता हुआ देखकर उसका दिल भी बैठ गया, लेकिन उसने खुद को सँभाला।

रोहन ने अंजलि के कांपते हुए हाथों को अपने हाथों में लिया और बेहद शांत लेकिन दृढ़ स्वर में बोला, “रोओ मत अंजलि। चिंता मत करो। कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं, चाहे तुम्हारी भाभी कितनी भी ऊंची दीवारें क्यों न खड़ी कर लें, हमारे विवाह को कोई रोक नहीं सकता।” रोहन की आवाज़ में एक अजीब सा विश्वास था। अंजलि ने अपनी नम आँखों से रोहन को देखा। रोहन का वह दृढ़ स्वर सुनकर अंजलि कुछ आश्वस्त हुई। उसे लगा कि शायद अभी भी कोई उम्मीद बाकी है।

अंजलि को घर छोड़कर रोहन सीधा शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाके की तरफ निकल पड़ा। वह जानता था कि सिर्फ प्यार के वादों से बड़ी भाभी का दिल नहीं जीता जा सकता; उसे कुछ ऐसा करना होगा जिससे अंजलि के परिवार को उस पर गर्व हो। समय मिलते ही रोहन एक आलीशान बहुमंजिला इमारत के अंदर दाखिल हुआ और सीधे सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर बने एम.डी. के केबिन में जा पहुँचा। यह केबिन शहर के जाने-माने और सबसे युवा व्यापारी, समीर का था।

समीर अपनी फाइलों में उलझा हुआ था। रोहन ने केबिन का दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रखा। कदमों की आहट सुनकर समीर ने जैसे ही सिर उठाया, वह अपनी जगह पर सन्न रह गया।

“पहचाना मुझे?” रोहन बड़ी गर्मजोशी से आगे बढ़ा और समीर के गले मिलते हुए बोला।

समीर के चेहरे पर एक बहुत बड़ी मुस्कान खिल उठी। उसने रोहन को कसकर गले लगाया और अपने विशेष बिंदास अंदाज़ में बोला, “अरे यार! तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ। तुम तो हमारी क्लास के हीरो हुआ करते थे। याद है, जब मेरे पास कॉलेज की फीस भरने के पैसे नहीं थे, तब तुमने अपनी पॉकेट मनी से मेरी मदद की थी? वो अहसान मैं आज तक नहीं भूला। कहो, आजकल क्या कर रहे हो और इतने सालों बाद अपने इस नालायक दोस्त की याद कैसे आई?”

रोहन ने मुस्कुराते हुए समीर को अपनी और अंजलि की पूरी कहानी कह सुनाई। उसने बताया कि कैसे वह अंजलि से बेइंतहा प्यार करता है, लेकिन अंजलि का परिवार, खासकर उसकी बड़ी भाभी, इस रिश्ते के सख्त खिलाफ हैं क्योंकि रोहन के पास दिखाने के लिए कोई बहुत बड़ी दौलत या रुतबा नहीं है। रोहन ने भारी आवाज़ में कहा, “समीर, मैं अंजलि को हर खुशी दे सकता हूँ, लेकिन मेरी सच्चाई और ईमानदारी उनके परिवार के पैमानों पर छोटी पड़ रही है।”

समीर ने रोहन के कंधे पर हाथ रखा और गंभीरता से बोला, “बस इतनी सी बात? प्यार तूने किया है मेरे भाई, तो उसे निभाने की ताकत भी तुझमें है। और जहाँ तक उन पैमानों की बात है, तो इस रास्ते के कांटों को साफ करने का काम अब तेरा यह दोस्त करेगा। तू बस देखता जा।”

समीर की कंपनी शहर की सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों में से एक थी, और इत्तेफाक से अंजलि के बड़े भाई, सुरेश, अपनी छोटी सी फर्म को समीर की कंपनी के साथ जोड़ने के लिए कई महीनों से जद्दोजहद कर रहे थे। समीर ने अगले ही दिन सुरेश को अपने ऑफिस बुलवाया। सुरेश के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था। मीटिंग के दौरान समीर ने सुरेश के सामने एक बहुत बड़ी पार्टनरशिप का प्रस्ताव रखा।

“सुरेश जी, मैं यह डील आपके साथ करने को तैयार हूँ,” समीर ने कहा, “लेकिन मेरी कंपनी का सारा काम मेरा सबसे भरोसेमंद और होनहार प्रोजेक्ट हेड देखता है। अगर उसे आपका काम और विचार पसंद आए, तभी हम इस डील पर पक्की मोहर लगाएंगे।” सुरेश ने तुरंत हामी भर दी और समीर तथा उनके उस ‘खास प्रोजेक्ट हेड’ को अपने घर पर शानदार डिनर के लिए आमंत्रित किया।

उस शाम अंजलि के घर में गज़ब की चहल-पहल थी। बड़ी भाभी ने खुद अपनी निगरानी में कई तरह के पकवान बनवाए थे। वे चाहती थीं कि इस बड़े व्यापारी पर उनके परिवार का गहरा प्रभाव पड़े। अंजलि उदास मन से अपने कमरे में बैठी थी।

रात को ठीक आठ बजे घर की घंटी बजी। सुरेश और भाभी ने दौड़कर दरवाज़ा खोला। सामने समीर सूट पहने खड़ा था और उसके ठीक पीछे उसका ‘खास प्रोजेक्ट हेड’ खड़ा था। जैसे ही उस शख्स ने आगे बढ़कर कमरे की रोशनी में कदम रखा, सुरेश और भाभी के होश उड़ गए। अंजलि, जो पानी का गिलास लेकर बाहर आ रही थी, वहीं ठिठक गई।

वह शख्स रोहन था। वह बेहद सलीके से तैयार होकर आया था। रोहन ने आते ही सबसे पहले झुककर सुरेश और बड़ी भाभी के पैर छुए। उसकी इस शालीनता ने पल भर में घर के माहौल को शांत कर दिया।

समीर ने मुस्कुराते हुए सुरेश और भाभी की ओर देखकर कहा, “यह रोहन है। मेरे कॉलेज का सबसे होनहार छात्र और आज मेरी कंपनी का बैकबोन। इसने अपनी मेहनत से वह मुकाम हासिल किया है जो हर किसी के बस की बात नहीं। पर इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पैसा नहीं, बल्कि इसके संस्कार हैं। यह रिश्तों की कद्र करना जानता है।”

रोहन ने हाथ जोड़कर भाभी से कहा, “भाभी जी, मैं जानता हूँ कि आप अंजलि के लिए एक ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उसे हर सुख दे सके और समाज में आपका सिर ऊँचा रखे। मैं आज यहाँ एक बिजनेस पार्टनर बनकर नहीं, बल्कि आपसे आपके परिवार का आशीर्वाद मांगने आया हूँ। मैं वादा करता हूँ कि अंजलि की आँखों में कभी आँसू नहीं आने दूँगा और आपके परिवार का सम्मान हमेशा अपनी पलकों पर बिठाकर रखूँगा।”

बड़ी भाभी, जो हमेशा पैसे को अहमियत देती थीं, आज रोहन का यह सम्मानजनक व्यवहार और समीर जैसे बड़े इंसान के मुँह से रोहन की इतनी तारीफ सुनकर निशब्द रह गईं। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ कि जिसे वे एक मामूली लड़का समझ रही थीं, वह असल में एक हीरा है जो परिवार को साथ लेकर चलना जानता है। सुरेश ने आगे बढ़कर रोहन को गले लगा लिया। अंजलि की आँखों में फिर से आँसू थे, लेकिन इस बार ये खुशी के आँसू थे। कॉलेज के दिनों की एक सच्ची दोस्ती ने आज एक प्यार करने वाले जोड़े की पूरी दुनिया बसा दी थी।

दोस्तों, क्या आपको भी लगता है कि रुतबे और दौलत से ज्यादा इंसान के संस्कार और उसका स्वभाव मायने रखता है? क्या सच्चे प्यार के रास्ते में आने वाली रुकावटों को एक अच्छा दोस्त सच में दूर कर सकता है? अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं!

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