रागिनी एक मिलनसार लड़की थी जरूरत पर सबके काम आना और आगे बढ़कर मदद करना उसकी आदत मैं शामिल था उसकी सहेली कहती आजकल ज़माना नहीं है बिना मतलब मदद करने का तू क्यूँ लगी रहती अपने काम से काम रख, पर रागिनी पर कुछ असर नहीं होता।
रागिनी के घर मैं बड़ा भाई और मम्मी पापा है रागिनी के सारे रिश्तेदार रागिनी से बहुत खुश थे जब भी वो आते रागिनी उनकी खूब खातिरदारी करती और उनको घुमाने मैं सामान दिलाने मैं मदद करती समय गुजर रहा था
इसी बीच भाई राहुल की शादी तय हो गई रागिनी पूरी लगन से शादी की तैयारी मैं लग गई वो खुश थी कि घर मैं उसकी भाभी नहीं सहेली आ रही है। उसकी तैयारी और बात करने के अंदाज से नेहा के घर मैं भी सब
तारीफ करते। जिसे सुन नेहा को चिंता होने लगी, नेहा भी संस्कारी थी और उसे भी परिवार को जोड़े रखनी की चाह थी । लेकिन रागिनी जैसा स्वभाव नहीं था।
नेहा शादी हो कर ससुराल आ गयी लेकिन वो अधिकतर अपने कमरे मैं ही रहती और सबके बीच रह कर भी शांत रहती शुरू मैं सबको लगा नया माहौल है धीरे धीरे घुलमिल जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ, एक दिन रागिनी ने देखा नेहा कमरे मैं रो रही थी रागिनी कमरे मैं आई बोली क्या हुआ भाभी रो क्यूँ रही हो यहां क्या कुछ तकलीफ है आपको, नेहा बोली नहीं
फिर क्या बात है बताओ मुझे मैं आपकी नंद ही नहीं सहेली भी हूँ।
नेहा बोली रागिनी तुम सब काम मैं होशियार हो और सबकी कितनी मदद करती हो सब तुम्हारी कितनी तारीफ करते है पर मुझे तो कुछ भी नहीं आता
यहां तक कि मुझे तो सबसे बात करने में भी झिझक लगती सब रिश्तेदार से कैसे बात करूंगी वो समझेंगे बहू घमंडी है नहीं मम्मी जी मुझे अपनाएगी यहां नहीं, कहीं मुझे अलग तो नहीं कर देंगी मुझे परिवार के साथ ही रहना है।
सुनकर रागिनी बोली अरे इतनी सी बात पर आप इतना परेशान हो रही ये तो अच्छी बात है कि आपके विचार इतने अच्छे है और परिवार को जोड़े रखने की इच्छा ही परिवार को जोड़े रखती है रही काम या स्वभाव तो उसका तरीका सबका अलग होता है पर अपनी चाह है तो आप धीरे धीरे सीख जाओगी मैं हूँ ना, और मम्मी ऐसा कुछ नहीं करेंगी
उन्होंने आपको बेटी माना है वो भी आपकी मदद ही करेगी पहले तो आप खुश रहो, परिवार बही बना रहता है जहां सब एक दूसरे को जोड़े रखने के लिए सहयोग करे ना कि तोड़ने के लिए।
नेहा बोली आप वास्तव मैं बहुत अच्छी हो तभी सब इतनी तारीफ करते हैं आपने मेरे दिल का बोझ हल्का कर दिया फिर दोनों ढेर सारी बातें करने लगी।
नेहा दिल से कोशिश करने लगी काम सीखने की अपने घर मैं वो ज्यादा काम करती नहीं थी उसे तो खाना बनाना भी नहीं आता था उसकी लगन देख घर मैं सब खुश थे
हाँ लेकिन बात अभी भी कम ही करती जिस वज़ह से रिश्तेदार बोल ही देते अपनी रागिनी की बात अलग है, नेहा भी बोलती हाँ ये बात तो बिल्कुल सही है।
धीरे धीरे नेहा रागिनी की तरह ढ़लने लगी थी और दो साल बाद रागिनी की शादी पक्की हो गई नेहा सारी जिम्मेदारी रागिनी की तरह निभा रही थी रिश्तेदार नेहा की तारीफ कर रहे थे जिसे सुनकर रागिनी बोली भाभी आपने तो सबका दिल जीत लिया रागिनी मन ही मन खुश थी कि मेरा परिवार हमेशा जुड़ा रहेगा जहां सबके विचार जुड़े रहने के है। ।
स्वरचित
अंजना ठाकुर