बड़ा सा बोर्ड लगा था और उस पर लिखा था बच्चों का अपना घर। उद्घाटन के बाद जब सब घर जाने को थे तो मिन्नी ने सविता मैडम को रोकते हुए कहा, आप कहीं नहीं जाएंगे आपका कमरा तो यहां ही बना हुआ है अब इस अपना घर का काम आपको ही संभालना है।
मैडम की आंखों से आंसू छलक पड़े और उनकी सारी पुरानी यादें क्रमवार याद आने लगी। अपने भाई के बीमार होने पर जब वह सरकारी अस्पताल में गई थी तो कई बार वह सुबह से शाम तक अस्पताल में ही बैठी रहती थी। उस समय तक उनका विवाह भी नहीं हुआ था। वहां बहुत छोटी सी लड़की मिन्नी,वॉकर में घूमा करती थी। सभी उस मिन्नी को बहुत प्यार करते थे वह किसी भी पेशेंट के साथ एवं सहायक और मेहमानों के साथ खेलती रहती थी। अस्पताल के उसी रूम में वह घूमती रहती थी। पूछने पर पता चला कि मिन्नी का जन्म इस सरकारी अस्पताल में हुआ था और उसक जन्म के बाद उसकी मां उसे अस्पताल में ही छोड़कर चली गई थी। तबसे अस्पताल की नर्सें उसका पालन पोषण कर रही है सुबह और शाम की नर्स उसका ख्याल रखती है। इस तरह अस्पताल से ही नर्स दूध पिला देती थी। रात में वह अस्पताल के ही रेस्ट रूम में किसी नर्स के साथ सो जाती थी। ऐसे ही किसी पेशेंट के मेहमान ने उसके लिए वाकर ला दिया था और कोई भी उसे खिलौने इत्यादि भी भेंट करते ही रहते थे। मिन्नी थी ही इतनी प्यारी की अनायास ही सबका उसको खिलाने को मन कर जाता था।
भाई के ठीक होने के बाद सविता अपने घर चली गई थी क्योंकि भाई 2 महीना अस्पताल में ठहरा था तो वहां की नर्स इत्यादि से भी उसकी अच्छी जान पहचान हो गई थी। कुछ समय पश्चात सविता की दिल्ली सरकार में नौकरी भी लग गई और उसका विवाह भी हो गया था। कुछ समय बाद जब उसका तबादला समाज कल्याण विभाग में हुआ तो उसने वहां पर बाल देखभाल स्थान आश्रय गृह में मिन्नी को देखा तो पता चला कि अस्पताल की मेट्रन ने उसे वहां पर दाखिल तो करवा दिया था परंतु फिर भी सारी नर्स उसका ध्यान रखती थी और उससे मिलने के लिए आती रहती थी।
मिनी भी सविता को आंटी कहने लगी थी और सविता भी मिन्नी को प्यार करने लगी। नियमानुसार कुछ समय बाद दिल्ली सरकार में तबादले होते रहते हैं और इसी के अंतर्गत सविता का भी हो गया था और फिर सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले वह दोबारा सोशल वेलफेयर के महिलाओं और लड़कियों के आश्रय स्थल में तबादला होकर आ गई थी। वहां पर उसकी मुलाकात पुनः मिन्नी से हुई। अब वह काफी बड़ी हो गई थी और पता चला वह बहुत अच्छे से पढ़ भी रही थी।
सेवानिवृत्ति के उपरांत उसका मिन्नी से काफी समय से मिलना नहीं हुआ। सविता जी का बेटा सनी भी इंजीनियरिंग करके अमेरिका चला गया था और वहां ही सेटल भी हो गया था। सविता जी एक बार अपने भाई की बेटी (भतीजी) के विवाह के समय जब अमृतसर गई तो विवाह के समय आए बरातियों में मिनी भी अपने पति के साथ आई थी। उसने देखते ही सविता जी को पहचान लिया था। मिन्नी के पति को देखकर सविता जी को बहुत खुशी हुई तब मिन्नी ने बताया कि उसके पति का ट्रांसपोर्ट का बहुत अच्छा बिजनेस है उनकी बहुत सी बसें चलती है। मिन्नी ने भी पढ़ने के बाद टूरिज्म का डिप्लोमा किया था और नौकरी के सिलसिले में ही उसकी मुलाकात उसके पति गुरबख्श सिंह से हुई थी। गुरबख्श सिंह की एक छोटी बहन थी उसके भी माता-पिता बहुत पहले दुनिया से चले गए थे और गुरबख्श सिंह ने सब कुछ जानते हुए भी मिन्नी से विवाह कर लिया था। एक अनाथ लड़की से प्यार और विवाह करना बहुत बड़ी बात थी। मिनी को अब सारे संसार की खुशियां मानो मिल गई थी। वह गुरबख्श सिंह की छोटी बहन को बहुत प्यार करती थी बस गुरबख्श सिंह इसके लिए ही मिनी का बहुत धन्यवाद करता था कि रब ने उसकी इतनी अच्छी पत्नी दी है कि अगर वह अमृतसर से बाहर भी रहता है तो उसे उसकी बहन की चिंता नहीं होती। कुछ समय पहले उसकी बहन की भी शादी हो गई थी और मिन्नी के दो बच्चे भी थे।
सविता जी को मिन्नी से मिलकर बहुत अच्छा लगा और वापस दिल्ली आते हुए उन्होंने मिन्नी से वादा किया था कि जब भी कभी अपने भाई के पास अमृतसर आएंगे तो मिन्नी से जरूर मिलेंगे मिलेंगी। वहां रहते सविता जी जब एक बार मिन्नी
के घर भी गई थी तो मिनी ने गुरबख्श जी से और अपने आसपास के सब लोगों से सविता जी को मिलवाते हुए कहा था यही मेरी मैडम है यही मेरी मां है। मातृत्व भाव सविता जी में भी उमड़ उमड़कर आ रहा था। दिल्ली जाने के कुछ सालों बाद ही सविता जी के पति भी हृदय गति के रुक जाने से मृत्यु हो गई थी। सनी को भी अमेरिका में सूचित किया गया परंतु सनी के आने से पहले ही मिन्नी सविता जी के पास आ गई थी और उसने सविता जी का बहुत ख्याल रखा। सविता जी अपने बेटे के साथ अमेरिका भी गई थी परंतु वहां भी उनका मन नहीं लगा या कोई वीजा इत्यादि कारण रहा होगा कि उन्हें वापस दिल्ली आना पड़ा।
अपने अकेलेपन के कारण वह अपने भाई भाभी के पास अमृतसर चली गई थी, अकेलेपन और अवसाद के कारण उनकी भी तबीयत ज्यादा ठीक नहीं रहती थी। कुछ समय पहले ही अमृतसर में कच्ची शराब पीने से बहुत से लोगों की मृत्यु हुई थी। सुनने में आया था की मिन्नी ने मरने वालों के बहुत से बच्चों को गोद भी लिया है।
इसी संदर्भ में ही उसने सविता जी को बच्चों का घर (अनाथालय) बनाकर उसके उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया था। जब वह जाने लगी तो मिन्नी ने उन्हें रोकते हुए कहा मैडम आप जैसी अनुभवी मैडम अगर हमको मिल जाए तो हमारी भी सारी परेशानियां दूर हो जाएगी और हम बच्चों का अपना घर को और अच्छा बना पाएंगे। इन बच्चों को भी एक परिवार मिल जाएगा।आप यहां ही रहिए इधर एक कमरा आपका भी है। सविता जी समझ नहीं पा रही थी कि मिन्नी ऐसा करके उनको अवसादमुक्त करके उनका ख्याल रखना चाहती है यह वास्तव में ही उनकी सहायता चाहती है । परंतु कुछ भी हो मिनी भले ही अनाथ हो पर आज उसके कारण कई परिवार है और उसने सविता जी को भी एक ऐसे परिवार का हिस्सा बनाया जो कि सदा उनके पास ही रहेगा
मिनी का पति गुरबख्श सिंह भी उसके हर कार्य में उसका साथ देता था। अब भले ही सविता जी का बेटा दूर रहता हूं और वह उनके पास ना आवारा हो परंतु सविता की अपने परिवार में सुरक्षित थी।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा