भरोसा – खुशी

सुलेखा अमीर मां बाप की इकलौती बेटी थी।घर में लक्ष्मी पानी भरती थी।उसे माता पिता ने बैंगलोर जैसे शहर में पढ़ने भेजा ।पढ़ने में होशियार,सुंदर समझदार  ऐसी थी सुलेखा कॉलेज में आई तो उसकी पहचान जतिन से हुई।जतिन का परिवार बड़ा था। माता पिता श्याम लाल और रज्जो दो भाई बहन सुनील और पूजा ।

चाचा चाची।जतिन एक महत्वकांक्षी लड़का था वो हमेशा ऊंचाई पर जाने के ख्वाब देखता था।जतिन और सुलेखा की दोस्ती हो गई और वो कब प्यार  में बदली पता ही नहीं चला।सुलेखा ने अपने परिवार में जतिन के बारे में बताया ।उसके पिताजी राम कुमार बोले बेटा पहले पढ़ाई पूरी करो फिर सोचना पर सुलेखा पर तो जतिन का भूत सवार था ।

उसने भाग के जतिन के साथ शादी कर ली।पैसों की कोई कमी नहीं थी क्योंकि उसने घर पर बताया ही नहीं था शादी का अब जतिन और वो दोनों सुलेखा के फ्लैट पर रहते।जतिन और सुलेखा के पेपर हो गए।सुलेखा अपने घर आई सुलेखा को गौर से देख मां को शक हुआ।

सुलेखा को उल्टियां हो रही थी।मां उसे डॉक्टर के पास ले गई तो पता चला वो गर्भ से है।माता सरला का रो कर बुरा हाल था ।सुलेखा ने सब कुछ सच बता दिया कि मैने शादी कर ली है।जतिन को फोन कर सुलेखा ने बताया जतिन बोला अभी तो मेरे पास नौकरी भी नहीं है।

मै ये जिम्मेदारी कैसे संभालूंगा।रामनाथ बोले घबराओ नहीं तुम पढ़ाई जारी रखो और मेरा बिजनेस संभालों। कल हम बैंगलोर आ रहे हैं तुम्हारे माता पिता से मिलने।जतिन बोला अंकल मेरा परिवार बैंगलोर में नहीं रहता वो लोग पटना रहते है ।आप लोग वही आए 5 दिन बाद मै  पहुंच जाऊंगा।

जतिन अपने घर आया एक मध्यमवर्गीय परिवार जिसमें हर जरूरत के लिए सोचना पड़ता।जतिन को देख सब खुश हुए और बोले तुम को नौकरी मिलेगी तो हमारा भी भाग्य सुधरेगा।जतिन बोला नौकरी और लौटरी सब लगी है।दिन फिर गये हमारे फिर उसने सारी बात बताई कि कैसे मैने सुलेखा से शादी कर ली ताकि वो मुझे छोड़ ना सके ।

अब 5-6 दिन चाचा जी वाले घर  चलते हैं। ताकि सुलेखा के घर वाले आए तो कुछ इज्जत रहे।ठीक है मैं तेरे चाचा मोहन को फोन किए देता हूं कि तेरे रिश्ते के लिए लड़की वाले आ रहे है तो हम उसके घर जा रहे है वरना इस झोपड़ी में कहा लाएंगे किसी को।

मोहन अपने बेटे के पास गए हुए थे इसलिए उनका घर बंद था।उनकी नौकरी भी सरकारी थी तो घर वर भी अच्छा था सब सुविधाएं थी।इधर श्यामलाल की एक परचून की दुकान थीं जिससे गुज़र बसर होती थी।जतिन ने सबको समझा दिया था।सुलेखा के माता पिता आए तो श्यामलाल ने बताया हमारी बाजार में बहुत बड़ी दुकान है।

घर भी हमारा अपना है पुस्तैनी घर जमीन सब है ।बेटा तो शहर में ही रहता है नौकरी देख रहा है।अब सुलेखा की ऐसी हालत के कारण जल्दी की तारीख रख शादी करनी पड़ी।शादी के बाद जतिन ने रामकुमार का व्यापार संभाल लिया।जतिन शुरू से ही महत्वाकांक्षी था और इतना पैसा देख तो उसकी आंखें चमक गई उसने अपने सास ससुर का दिल जीत लिया।

सुलेखा तो उसके प्यार में पागल ही थी।धीरे धीरे रामकुमार बीमार रहने लगे सारा बिजनेस जतिन देखता बिज़नेस बढ़ रहा था।जतिन का लालच भी जतिन ने अपने भाई बहन को पढ़ा लिखा दिया ।मां बाप को दूसरे शहर में बड़ा घर दिलवा दिया।

अब वो दो बच्चों का पिता था इसलिए उसकी दिलचस्पी सुलेखा में भी खत्म हो गई थी।धीरे धीरे उसने कागजो पर हस्ताक्षर के बहाने सारे कागज़ अपने नाम करवा लिए और वो मालिक बन बैठा।जैसे राम कुमार की तबीयत खराब हुई ऐसे ही उनकी पत्नी उमा की भी रहने लगी और एक रात राम कुमार चल बसे।

अब तो जतिन घर आता ही नहीं था।उसका बाहर किसी से चक्कर था और वो उससे शादी करना चाहता था।तो उसने सुलेखा पर भी वही प्रयोग किया जो उसने राम कुमार  और उमा को दिया था।कुछ दिनों में उमा का भी देहांत हो गया।अब सुलेखा भी बीमार रहने लगी थी इसी कारण बच्चों को हॉस्टल डाल दिया गया।

ये कहे कि पाप का घड़ा कभी तो भरता है ऐसा ही जतिन के साथ भी हुआ।सुलेखा की मौसी गौरी और उनका बेटा मयंक उनके घर मौसी की मृत्यु का अफसोस करने आए।मयंक सीबीआई ऑफिसर था।उसे घर में आते ही घर का माहोल अजीब सा लगा।

मौसी बोली अरे सुलेखा तुमने महाराज बदल लिये ।दीदी को तो विमल के आलावा किसी का खाना समझ नहीं आता था हा अभी 6 महीने पहले ही सब बदले है।क्यों मयंक बोला अरे विमल काका बीमार हुए तो गांव चले गए फिर दूसरा कुक रखना पड़ा।चाय नाश्ता हुआ

फिर सुलेखा खाने का बता । मौसी से बोली मैं दवाई ले लूँ।क्यों तुझे क्या हुआ पता नहीं अक्सर पेट में दर्द रहता हैं।उल्टी होती हैं पापा को भी यही होता था और मां को भी डॉक्टर को दिखाया।हा ट्रीटमेंट चल रहा है।तुम्हारे फैमिली डॉक्टर से नहीं जतिन के भाई से वो डॉक्टर है ना।

तुम्हारी शादी को कितने साल हुए सुलेखा मयंक बोला 10 साल ।और तुमने डॉक्टर क्यों बदला अरे बताया ना जतिन का भाई है।  चलो खाना लग गया।कुक बोला मैडम ये आपका खाना।तुम्हारा खाना अलग क्यों? मै बीमार हूं इसलिए पता नहीं मयंक जबसे यहाँ आया था उसे कुछ अटपटा लग रहा था और जतिन का फोटो देख तो उसे कुछ सहज नहीं लगा।

सुलेखा हाथ धोने गई तो उसकी सब्जी उसने एक डब्बे में डाल  ली जो वो साथ लाए थे और सुलेखा को वही सब्जी दी जो सबके लिए बनी थी।खाना खा कर सुलेखा और मौसी बात करने लगे।सुलेखा बोली आज कितने दिनों बाद नींद नहीं आ रही पेट नहीं दुख रहा।

अच्छा आप लोग बाते करो मैं आता हूं।मयंक वो सब्जी ले अपने दोस्त के पास गया जो फॉरेंसिक में था देख यार इसमें कुछ है क्या।नहीं ऐसा क्यों पूछ रहा है।

मयंक ने उसे सारी बात बताई कि कैसे 6 महीने में उसके मौसा मौसी की डेथ हो गई और वही सिम्पटम मेरी बहन मै भी आ रहे है। अच्छा तो ऐसा कर कल उन्हें लैब ले आ।मै उनके भी टेस्ट करूंगा और ये खाना भी टेस्ट करवाता हूं।शाम को मयंक जान कर बाहर से काफी सारी चीजें ले आया तब तक जतिन भी आ गया था

परंतु मयंक ने सुलेखा को ये पहले ही कहा था कि घर वालों के सामने मै क्या काम करता हूं ये गोपनीय रहे इसीलिए जैसे ही जतिन ने पूछा आप क्या काम करते हैं तो मयंक बोला सेल्स मैन हु इलेक्ट्रॉनिक शॉप में अरे आप ये सब क्या ले आए।सुलेखा को तो सब खाना मना है।

दिन में कैसी थी दर्द हुआ होगा ना।नहीं जतिन आज नाही मुझे नींद आई और दर्द भी नहीं हुआ।अच्छा जतिन का मुंह कुछ उतर गया था जो मयंक से छिपा नहीं।मयंक बोला जीजाजी आज खाने दो फिर कल परसो हम चले ही जाएंगे। ठीक है मैं कुक को प्लेट्स और चाय के लिए बोलता हूं ये सब सर्व करेगा।

जतिन उठा दो मिनट में मयंक भी उठा वॉशरूम जा कर आता हूं वो किचेन के पास गया ।जतिन की आवाज़ आ रही थी मेडिसिन नहीं डाली तुमने भईया डाली थी दीदी ने खाया भी था ।फिर रमेश को पूछ डोज बढ़ाता हूं।सुन अब जो ये इसका भाई लाया है सर्व कर दो।

कल देखेंगे मयंक जल्दी से आकर बैठ गया इधर उधर की बाते होती रही ।फिर जतिन को एक कॉल आया और वो बाहर चला गया।मयंक ने सुलेखा से डॉक्टर का नाम हॉस्पिटल सब पूछ लिया ।डॉक्टर का नाम रमेश था जो जतिन का छोटा भाई था।अंदर  आकर जतिन बोला आप लोग कब तक है यहां।

परसो तक मौसी बोली अच्छा मुझे एक जरूरी काम आ गया है और मैं शहर से बाहर जा रहा हूं आप लोग हो तो तसल्ली रहेगी।जी जीजाजी आप चिंता ही ना करो जी।सुलेखा जतिन की पैकिंग करने चली गई।और मयंक ने अपनी टीम को चुप चाप रमेश को उठाने के लिए बोल दिया उधर निकलते हुए

जतिन कुक को बोल गया एक दो दिन कुछ मत करना मै आऊंगा फिर देखेंगे।जी सर ।मयंक ने पूछा कैसे जाएंगे जीजाजी अरे गाड़ी से एयरपोर्ट फिर पटना अच्छा ।हा वहां हमारा ससुराल है सुलेखा बोली ओह अच्छा मयंक ने मैसेज कर दिया कि दो लोग जतिन के पीछे ।जतिन एयर पोर्ट आया पर वो पटना की नहीं भोपाल की फ्लाइट में बैठा वहां से वो अपने घर आया जहां उसके माता पिता रहते थे।

क्यों इतना अर्जेंट बुलाया आप लोगों ने अरे तेरी बहन को नई गाड़ी देनी है इसलिए तो ये काम तो मै फोन पर भी कर देता अरे तेरी बहन और दामाद ना माने इसलिए अच्छा कल चलेंगे। उधर रमेश और कुक विपिन को उठा लिया गया।पटना के पते पर भी लोग गए उन्होंने जो बताया सबके होश उड़ गयें।चाचा बोले भैया की तो एक छोटी सी परचून की दुकान थी

गरीबी सो अलग ।मुझसे कर्ज लेकर बेटे को पढ़ने भेजा जो महागुरु था पता नहीं किस बच्ची को फसाया मेरा घर इस्तेमाल किया मुझे ही शादी में नहीं बुलाया और रातों रात सब बेच कर भाग गए कहा गए कुछ पता नहीं मेरे नाम पर कर्ज़ा भी ले रखा था जो मैने चुकाया था।सारी बातें जब मयंक को पता चली तो उसका तो खून ही खोल गया।अगले दिन सुबह सुबह उसने कहा दीदी आज शहर घूमने चलते है।

विनीत बोला सर मना करते हैं मैडम की तबीयत की वजह से अरे जीजाजी से पूछ लिया है मैने चाहो तो तुम भी पूछ लो।विनीत ने फोन लगाया सर ये घूमने जाने को कह रहे हैं हा जाने दे ।मयंक अपनी मां और बहन को ले सीधे हॉस्पिटल पहुंचा सारे टेस्ट हुए खाने का टेस्ट हो चुका था।रमेश को पकड़ कर सच  उगलवा लिया गया ।उधर भोपाल में जतिन के घर छापा मार उसके परिवार को भी दिल्ली लाया गया।सब सीबीआई ऑफिस में बैठे थे

जतिन के चाचा सहित।रमेश और विपिन ने जहर वाली बात कबूल की कि उन्होंने जतिन के कहने पर ऐसा किया था।जतिन को जब दो थप्पड़ लगे तो उसकी अक्ल ठिकाने आई और पता चला कि मयंक सीबीआई ऑफिसर है।तुम पर तो मेरी निगाह थी  अंकल की डेथ से कुछ दिन पहले की बात है उनके वकील दोस्त का मेरे पास फोन आया था कि कल राम कुमार तुमसे मिलना चाहते हैं। मैं अगले दिन पहुंचा तो वो मुझे घर नहीं ले गए

एक होटल में मिले और उन्होंने सारी बातें बताई जो मार्केट से उनके कानों में आ रही थी अपनी गिरती सेहत के बारे मे भी बताया।और बोले मुझसे धोखा कर जतिन सब अपने नाम करवा रहा था पर मेरे वकील ने एक क्लॉज़ उसमें जोड़ दिया था कि वो टेंपररी काम देख रहा है

वरना सब मेरी बेटी का है ये चीज़ उसे पता ही नहीं थी।सुलेखा यह सुन टूट गई मैने तुम पर भरोसा किया तुमने मेरा मान तोड़ दिया मेरे माता पिता को मार मुझे मारने चले थे।यही नहीं इनकी प्रेमिका तो आपकी सखी निशि थी आपको तो मतलब के लिए इस्तिमाल किया गया था।

तुम नीच हो भरोसे के काबिल नहीं हो मेरा प्यार शब्द से भरोसा उठ गया है। मयंक इस आदमी को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाओ। मैं अपने बच्चों पर इसकी परछाईं भी नहीं पड़ने दूंगी।वकील अंकल डाइवोर्स पेपर भी रेडी करवाइये ।इनका परिवार जेल में सड़ना चाहिये।हमे माफ कर दो जतिन बोल रहा था बेटा अब तू तेरा परिवार और तेरी पत्नी निशि जेल की हवा खाओ।

सुलेखा बोली मयंक तुमने मुझे बचा लिया वरना मेरे बच्चे अनाथ हो जाते। ऐसे कैसे बहन मुझे इस आदमी पर पहले ही शक हुआ था जब तेरी शादी हुई थी पर मां बोली ऐसा नहीं होता फिर अंकल का फोन आना उनकी और मौसी की मृत्य बहुत सारे सवाल थे।इसीलिये मैं साये की तरह इसके पीछे था  सुलेखा बोली इसने मेरा और मेरे भोले माता पिता का भरोसा तोड़ दिया है।शायद अब में किसी पर भरोसा ना कर पाऊं और वो गाड़ी में बैठ बच्चों के हॉस्टल चल दी।उधर जतिन,विनीत और रमेश को 20 साल सजा हुई और उसके माता पिता को 5 साल ।निशि को 10 साल आज सब जेल में बैठे है और जतिन सोच रहा है मैने ग़लत किया मै जीवन से क्या चाहता था और क्या मिल गया।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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