“आज फिर से सारा मोहल्ला अपनी अपनी छतों पर जमा होकर रामलाल के घर होने वाले हंगामे को चटखारे लेकर देख रहा था” रामलाल के दोनों बेटे बटवारे को लेकर आपस में हिंसक तरीके से लड़ रहे थे, दोनों की पत्नी और बच्चे भी अपने अपने स्तर पर मोर्चा संभाले हुए थे,
गाली गलौच से बढ़कर दोनों भाई अब हाथापाई पर उतर आये, अपने समय में अच्छे अच्छो पर भारी पड़ने वाला रामलाल आज चुपचाप अपनी इज्ज़त का जनाजा निकलते हुए देख रहा था, कभी पिता की एक आवाज़ पर थर थर कापने वाले दोनों बेटे, उसे भी ताने मारे जा रहे थे,
“अपने सगे भाई की संपति हड़पने और उसके बीवी बच्चो को दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर करने वाले रामलाल ने अपने जीवन में सिर्फ बेईमानी और धोख़ाधड़ी से धन संपदा बनाई थी, लालच और जमीन की भूख में अपने बच्चो को भी शामिल रखा, लेकिन ये भूल गया
की अपने कर्मो के फल सब यही भोग कर जाते है, इसलिए आज पूरे मोहल्ले के साथ रामलाल के छोटे भाई की विधवा भी उसका तमाशा बनते हुए देख रही थी…
असहाय रामलाल से जब और नही सहा गया तो वो अपने बूढ़े शरीर को किसी तरह धकेलते हुए झगडा सुलझाने की कोशिश करने लगा की तभी उसके सर से कोई भारी चीज टकराई और सर से गर्म खून का फौवारा छूट पड़ा, दर्द और पीड़ा से उसने मुड़कर देखा की बड़ा बेटा हाथ में खून से नहायी हुई ईंट लेकर खड़ा है….
ये देख एक पल को सब की साँसे थम गयी, यकीं करना मुश्किल हो गया,,, आखिर सगा बेटा अपने ही पिता पर जानलेवा हमला कैसे कर सकता है….
“घोर कलयुग आ गया भाई ” सभी दबी जुबाँ से बड़े बेटे की निंदा करने लगे, …. तभी झगड़े की खबर किसी पड़ोसी के माध्यम से मिलने पर रामलाल की बेटी और दामाद भी वहाँ आ पहुंचे…दोनों एक नंबर के लालची थे, पिताजी उनका हिस्सा भाईयो के नाम ना कर दे इसीलिए वो वहाँ पहुंचे और रामलाल को घायल देख दोनों भाईयो को उल्टा सीधा बोलने लगे…
अब छोटा बेटा आग बगुला होकर अपनी बहन और जीजा को दांत किट किटाते हुए बोलता है की, “तुम दोनों तो बीच में बोलो ही मत, इसी पिता की सीख पर तुम दोनों ने जायदाद के लिए अपनी बहनों से रिश्ता तोड़ लिया था और पिता को मार मार कर बेटी के घर रहने को मजबूर कर दिया,
जिसका मुकदमा तुम लोगो पर आज भी चल रहा है, तो भलाई इसी में है यहाँ से चुपचाप निकल जाओ वरना अगला नंबर तुम दोनों का होगा ” ऐसा कहकर उसने भी एक ईंट उठा ली,,, उन दोनों ने रामलाल की तरफ देखे बिना ही अपनी जान बचाने में भलाई समझी और चुपचाप निकल लिए…..
डगमगाते कदमों से दर्द और अपमान से आहत रामलाल चुपचाप एक कोने में सर पकड़ कर बैठ गया.. कुछ साल पहले अपनी बेटी और दामाद को गलत सीख देकर #जो बोया, वही पाया,…वो भी सूद समेत….
मौलिक रचना
कविता भडाना
#जो बोया,वही पाया…