*बेटा-बहु तो अपने ही होते हैं* – तोषिका

*बेटा – बहु तो अपने ही होते है*। तुम्हारी मां के मुंह से ये वाक्य सुन सुन के मैं थक गया था। लेकिन तुम्हारी मां को अपनी औलाद पर इतना भरोसा था कि उसने मेरी एक ना सुनी। चिल्लाते हुए रमेश अपने बेटे रवि और दूर खड़ी बहु समीना को बोला।

रवि कुछ बोले उस से पहले ही रमेश बोल पड़ा “मुझे तुम्हारे कोई झूठे बहाने नहीं सुनने ना ही कोई दिलासा चाहिए”। ये बोल कर वो वहां से अपने कमरे में चला गया

और रवि वहां बस चुप चाप अपनी आँखें नम लिए खड़ा का खड़ा ही रह गया। उसकी पत्नी समीना, उसके पास आई और बोली “पापा की बात का बुरा मत मानो, जो होना था हो गया”। पर ना जाने रवि को क्या हो गया था, उसने ना कुछ बोला और बस वही का वही खड़ा रहा। इस को देख कर समीना भी वहां से चली गई।

जब सब वहां से चले गए तो रवि घुटनों के बल जमीन पड़ गिरा और आवाज किसी दिल के टूटने से कम नहीं थी। जिस जगह वो था, उस जगह से उसको अपना सारा बचपन, सारी यादें, हँसी, खुशी के पल सबसे बड़े अपनी मां के साथ बिताए हर वो रात की चाय की चुस्की के साथ वाली बातें उसको सब याद आ रही थी।

उसको वो दिन याद आया जब विदेश जाने के बाद उसकी मां का पहली बार उसको कॉल आया था। उसकी मां ने उसको बोला था “बेटा रवि, हमारी फिक्र मत करना हम सब यह संभाल लेंगे, तुम बस अपनी जॉब पर ध्यान देना और मन लगा कर काम करना”।

शुरू शुरू में रवि कैसे भी करके समय निकल कर अपनी मां से सारा दिनचर्या बताता था पर जैसे जैसे समय बड़ा, गाड़ी ने नया मोड़ ले लिया था। रवि ने कॉल करना कम कर दिया और बात तो बस ना के बराबर होने लग गई थी। इधर बैठे रमेश अपनी बीवी को कहते थे “अभी भी वक्त है, मान लो कि तुम्हारे बेटे को विदेश की हवा लग गई है,

अब वो धीरे धीरे हम भी भूल जाएगा”। उस समय रमेश की बीवी ने इतना ध्यान नहीं दिया पर कुछ समय बाद रवि का कॉल आया और उसने बताया कि उसने शादी करने का फैसला कर लिया है, ये सुन कर उसकी मां और रमेश खुश हुए पर विदेश जाने के लिए उनका पासपोर्ट बनने में देर हो गई

जिसके चलते वो अपने एक लौटे बेटे की शादी भी ना देख पाए। इस पर रमेश ने फिर बोला “रवि पूरा बदल गया है, उसने ये भी नहीं सोचा कि उसके मां बाप नहीं आ प रहे है तो शादी के लिए खुद आ जाए, लेकिन नहीं उसको तो शादी वही करवानी थी और अगर करवानी भी थी तो वो थोड़ा और दिन रुक जाता ताकि हम आ जाते लेकिन उसको बस था

कि उसके सास ससुर को बुरा ना लगे।” इस पर रमेश की बीवी बोली “अरे कोई नहीं, जो होना था हो गया। बस दोनों ऐसे ही खुश रहे।” सच में तो बुरा रवि की मां को भी लगा था पर वो रिश्ते खराब नहीं करना चाहती थी।

साल बीत गया था और अब रमेश की बीवी की तबियत खराब रहने लग गई, रमेश ने अपनी बीवी का कहना मान कर रवि को कॉल किया और उसको एक बार आकर मिलने को कहा पर, वो हर बार व्यस्त है ये कह कर फोन काट दिया करता था। जब रमेश अपनी बीवी को गुस्से में बोलता था “देख लो, अब उसको कोई फर्क भी नहीं पड़ता उसके मां बाप ठीक है भी या नहीं, उधर समीना भी रवि को कुछ नहीं बोलती, तुम्हे पता है आज उसने क्या बोला?

उसने बोला कि अभी समीना को कुछ काम है तो वो बाहर जा रही और वो अगली बार उसी के साथ आएगा।” इस पर खांसती हुई रवि की मां बोली अरे कोई नहीं, दफ्तर में ज्यादा काम होते होंगे, आप इतना गुस्सा मत हुआ करो, बेटे बहु तो अपने ही है।”

6 महीने के अंदर रमेश की बीवी का देहांत हो गया। जब रवि ने ये खबर सुनी, तब उसको थोड़ा होश आया कि हा उसके भी मां बाप है, जो उसकी राह देखते रहते थे। खासकर, उसकी मां। ये सब सोचते सोचते वो अपनी यादों से वापिस आया तो उसने देखा कि समीना ने बैग पैक कर लिए थे।

रवि ने सारा सामान देखा और पूछा “कहा जा रही हो तुम?” समीना बोली “वापिस जा रही हू, मेरी कल एक जरूरी मीटिंग है”। इस पर रवि को गुस्सा आया और उसने पूछा “तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता ना, कि मेरी मां मुझे छोड़ कर चली गई है?” इस पर समीना बोली “देखो रवि, जिसको जाना था वो चला गया,

अब उसके लिए मैं अपना करियर थोड़ी ना दाव पर लगा सकती हू।” रवि ने बिना कुछ सोचे बोला “तुम्हे वापिस जाना है ना, जाओ लेकिन मैं अब वापिस नहीं आऊंगा।

साथ में मैं तुम्हे तलाक के कागजात भी भिजवा दूंगा”। ये बोल कर वह रमेश के कमरे में गया और उस से माफी मांगी और बोला “पापा, प्लीज़ मुझे माफ कर दीजिए, अपने सर के ऊपर से मैं वैसे ही मां का हाथ उठवा चुका हू, अब आप मत छोड़िए ना।” ये बोल कर उसने रमेश को गले लगा लिया।

*कुछ महीने बाद*

दरवाजे पर घंटी बजी, रवि ने दरवाजा खोला तो उसने देखा, समीना और उसके मां बाप खड़े थे। रवि ने बोला “तुम यहां?”

इस पर समीना बोली “मुझे माफ करदो रवि, मेरी गलती थी कि मैं समझ ही नहीं पाई। मां और पापा ने मुझे समझाया और अब मैं भी यह तुम्हारे साथ और रमेश पापा के साथ रहूंगी। रवि ये सुन कर हैरान हो गया उसने समीना से पूछा “तुम्हारी जॉब का क्या हुआ?” इस पर समीना ने रवि को गले लगाते हुए बोला “वो मैने छोड़ दी, परिवार के आगे कुछ भी नहीं”। ये सुनते ही रवि ने भी उसको गले लगा लिया।

अब दोनों साथ में इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का बिजनेस चला रहे है जो रवि ने अपनी मां के जाने बाद शुरू किया और कंपनी का नाम अपनी मां के ऊपर रखा “लता इंपोर्ट एक्सपोर्ट बिजनेस”। साथ हीं में उसने कंपनी का मालिक रमेश को बनाया।

लेखिका

तोषिका

error: Content is protected !!