निधि शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी की बेटी थी बचपन से ही हर मांग पूरी होने पर उसके मन में यही बस गया कि खुशी सिर्फ पैसों से मिलती है रिश्तों की कद्र करना सीखा नहीं और ना देखा क्योंकि पापा व्यवसाय बढ़ाने में लगे रहते और मां सामाजिक कार्य और पार्टी में अपना समय गुजारती एक भाई है वो भी अपनी मस्ती में मस्त।
निधि की उम्र शादी की हुई तो शहर के ही बड़े व्यवसायी के बेटे से शादी पक्की हो गई ससुराल में लड़का नीरज उसकी दो बहनें और माता पिता थे ।शादी के बाद निधि ने देखा यहां का माहौल बिल्कुल अलग है खाने के लिए नौकर नहीं खुद बनाना पड़ता है सब साथ मिलकर खाते है।और पैसा बहुत होने पर भी सोच समझ कर खर्च किया जाता है
निधि को इस माहौल में बंधन लगने लगा हालांकि ससुराल के लोग बहुत अच्छे थे निधि का बहुत ख्याल रखते लेकिन उसको रिश्तों की जरूरत ही नहीं थी
अब निधि ने ठान लिया कि उसे यहां नहीं रहना उसने नीरज से साफ कह दिया कि या तो अलग ही जाओ या में अपने मायके जा रही हूं बेटे का घर ना टूटे इसलिए घर के लोग इसी में राजी हो गए नीरज बहुत दुखी था लेकिन क्या करता मां ने कसम दे दी थी ।
निधि अलग हो कर खुश थी उसने सब नौकर लगा लिए और अपनी मां की तरह क्लब पार्टी में लग गई नीरज बचे समय में अपने घर चला जाता पर निधि ने तो जैस रिश्ता ही तोड़ लिया था पर कहते है वक्त का कोई भरोसा नहीं कब वक्त की मार पड़ जाए कोई नहीं जानता ।
इसी बीच कोरोना का प्रकोप आ गया पहले नीरज इसकी चपेट मैं आया और फिर निधि को बुखार आया जांच करने पर पता चला कोरोना हो गया नौकर चाकर सबका आना बंद हो गया घर में काम कौन करे निधि ने पहले ही घमंड के कारण सबको आने से मना कर दिया क्योंकि उसको तो लगता था
पैसे से सब काम करा लेगी निधि ने अपनी मां को फोन किया कि आप आ जाओ तो उन्होंने कहा वो अपनी जान जोखिम में नहीं डाल सकती ।जब नीरज के घर में पता चला तो उसकी मां का मन नहीं माना वो नीरज के पास आने के लिए तैयारी करने लगी तब उनकी बड़ी बेटी बोली मां आप यहां ध्यान रखो मैं चली जाती हूं
और वो जरूरी सामान ले कर चली गई पहले नीरज ने मना किया पर मीनू बोली में दूसरे कमरे में रह लूंगी आप लोगों को ज्यादा जरूरत है खाना पीना साफसफाई बगैरह ।निधि आश्चर्य में थी कि मेरी सगी मां ने मना कर दिया और इनको इतना अपमानित करने के बाद हमारी चिंता है
उसे रिश्तों का मोल मीनू की सेवा देखकर समझ आ रहा था कोरोना ज्यादा बढ़ा नहीं मीनू की सेवा से पंद्रह दिन में दोनों ठीक हो गए निधि मीनू से माफी मांगती हुई बोली मुझे माफ करना मैने आप लोगों से गलत व्यवहार किया पर आपने मेरा भ्रम तोड़ दिया कि पैसा ही काफी होता है अपनों का साथ कितना जरूरी है ये मुझे समझ आ गया ।
नीरज हम आज अपने घर वापस चलेंगे और सबके साथ रहेंगे मीनू बोली आपको गलती का अहसास हो गया यही काफी है ।
वक्त की मार जब पड़ती है तब इंसान को सही गलत का अहसास होता है लेकिन कुछ बातें जो हमारे लिए सही है उसके लिए बुरे वक्त के आने का इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि कभी कभी ठीक होने के लिए देर भी हो जाती है और सिर्फ पछतावा ही रह जाता है ।।
स्वरचित
अंजना ठाकुर
कहानी प्रतियोगिता – वक्त की मार ।।