*मेरे जैसे बदनसीब इस दुनिया में कोई नहीं* – तोषिका

आज पूरे १० साल हो गए है, दुनिया आगे बढ़ गई है पर मैं वही कि वही रह गई जहां मैं १० साल पहले थी, खिड़की से बाहर ढलते सूरज को देखते हुए मीना बोली।

जैसे जैसे सूरज ढल रहा था, मीणा भी मायूस हो रही थी क्योंकि उसको वो ही १० साल पहले की बातें याद आने लगी थी जिनको वो भूलने की कोशिश कर रही है, पर चाह कर भी नहीं भुला पा रही और आखिर ऐसा होगा भी क्यों ना, उसने उस चक्कर में अपनी आगे की जिंदगी खुल कर नहीं जी और अब उसको इस बुढ़ापे में पछतावा हो रहा था।

आँखें नम हो गई थी और सामने सब धुंधला हो रहा था साथ ही में वो उस समय आ गई जब उसने एक हादसे के बाद ये ठान लिया था कि वो ही बदनसीब है और रोज अपने आप यही बात दोहराती *मेरे जैसे बदनसीब इस दुनिया में कोई नहीं*

ये सब शुरूआत तब से हुई थी जब उसकी कॉम्पटीटिव की परीक्षा पास नहीं कर पाई, उसको लगा कि उसकी दुनिया खत्म हो गई है, क्योंकि उसने उस परीक्षा के लिए दिन रात मेहनत की थी। सबसे ज्यादा झटका उसको इसीलिए लगा था क्योंकि उसने सब कुछ छोड़ दिया था अपने शौक, अपने दोस्त और घूमना फिरना फिर भी उसके नंबर नहीं आए।

उसने फिर दुबारा मेहनत करने की जगह दुनिया का सबसे गलत फैसला लिया जिससे उसकी पूरी दुनिया बदल दी, उसने पढ़ाई छोड़ कर बस अपने आप को कमरे में बंद कर लिया, फिर एक हफ़्ते बाद वो बाहर निकली और बाहर ज्यादा समय रहने लग गई। धीरे धीरे वो गलत संगति में रहने लग गई जिसकी वजह से उसने ध्रूमपान, शराब जैसे बुरी चीजों को अपना सहारा बना लिया।

उसी के ग्रुप में एक लड़का था मनोज, मीना ने उस से शादी करने की इच्छा व्यक्त की पर घर वाले नहीं माने तो उसने भाग कर शादी कर ली जिसके चलते उसके परिवार वालों ने उस से सारे रिश्ते खत्म कर लिए।

शुरू शुरू में सब ठीक चल रहा था पर शादी के एक साल के बाद ही उनकी गृहस्थी में दिक्कतें आने लग गई थी। ना मीना ज्यादा पढ़ी लिखी थी ना ही मनोज जिसके चलते आर्थिक तनाव रहने लग गया था, जिसके चलते उन दोनों के आए दिन झगड़े होते रहते थे।

३-४ साल ऐसे ही चला और इन सालों में मीना को अपने हर एक गलत फैसले पर गुस्सा आ रहा था पर अपनी गलती ना मानते हुए वो अपने आप बदनसीब बोलती थी, कि उसकी किस्मत ही ऐसे है। मीना ने तलाक के लिए अर्जी डाली और उसने वो वाला घर छोड़ दिया।

उसको पता था कि घर जाने का फायदा नहीं है, पर उसने इस बार हार नहीं मानी और मेहनत करके पैसे कमाती थी और अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करी, फिर एक स्कूल में शिक्षक लगी और अब कभी हार नहीं मानी और हर मुसीबत का डट कर सामना किया। इसके बाद उसने घर जाने का सोचा क्योंकि उसको लगा कि अब वो कुछ बन गई है तो घर वाले जरूर खुश होंगे पर जब वो अपने घर गई उसने देखा कि उसका परिवार वहां से वो घर बेच कर कही और चले गए है और अपना फोन नंबर भी बदल लिया है। अचानक से उसको एक आवाज आई “फिर आगे क्या हुआ?” मीना अपने ख्यालों से वापिस आकर बोली “बच्चों उसके बाद कुछ नहीं हुआ, वो अब बस खुद थी और उसकी तन्हाई थी, मैने ये कहानी आप लोगों को इसीलिए बताई ताकि आप इस से कुछ सीखो और बिना हार माने हर मुसीबत का डटकर सामना करो”।

उधर कक्षा में पढ़ रहे सभी बच्चों ने हा में सर हिलाया और वादा किया कि वो कभी भी हार नहीं मानेंगे चाहे जितनी भी मुसीबतें आई। मीना बच्चों की आवाज़ में दम देख कर मुस्कुराई और तभी स्कूल की छुट्टी की घंटी बज गई।

लेखिका

तोषिका

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