“आज ऑफिस से आने में देर क्यों कर दी?”-रिया गैस पर चाय चढ़ाते हुए पति रोहित से बोली।
“अरे,एक कलिग(सहकर्मी) की फेअरवेल पार्टी थी इसलिए देर हो गई।अपने पिता को अकेला छोड़कर विदेश जा रहा है।”
“रोहित,तुम्हारी माँ को तो हमारा एहसानमंद होना चाहिए हमने उन्हें अपने पास रखा हुआ है।अच्छा खाना,कपड़ा और सारी सुविधाएं दे रखी हैं वर्ना आजकल कौन अपने बूढ़े माता-पिता के लिए इतना करता है?”रिया इतराते हुए बोली।
“हाँ.. बात तो तुम सही कह रही हो डार्लिंग।” रिया को गलत बोलने की बजाय उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुए रोहित बोला।
अर्चना पानी लेने किचन की तरफ ही आ रही थी।बहु के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर अर्चना का खून खौल गया।एक तो सुबह से बुखार में तप रही थी दूसरा ये झूठी बात सुनकर कि बहु बेटे उसे अपने पास रखकर उसपर उपकार कर रहें हैं उसके दिमाग का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया।सच तो ये था,
कि वो बहु बेटे के साथ रह जरूर रही थी पर आर्थिक रूप से वो उनपर निर्भर नहीं थी।अपना सारा खर्च स्वयं उठाती थी।उसके पति उसके लिए इतना छोड़ गए थे कि उसे बच्चों के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं थी।बल्कि बेटे ने अभी फ्लेट लिया तो उससे ही पैसे लिए थे।बहु के खर्च तो इतने थे,
कि महीने के अंत में घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता था।वो तो अर्चना सब संभाल लेती थी इसलिए गुजारा हो जाता था।अर्चना धन के साथ साथ तन से भी बच्चों की मदद करती थी।पोते को संभालना हो या रोहित के लिए सुबह उठकर नाश्ता बनाना व ऑफिस के लिए टिफिन बनाकर देना सब अर्चना ही करती थी।
संडे हो या मंडे रिया तो अपने समय से ही उठती थी।कोई रिश्तेदार घर पे आ जाए तो भी रिया के रवैये में कोई अंतर नहीं आता था।अर्चना ही मेहमानों की खातिरदारी करती थी।रोहित भी रिया के सारे नखरे उठाता था।कभी उसको कुछ नहीं कहता।उसे लगता था शांति से जैसा सबकुछ चल रहा है चलने दो…!!
अर्चना को रिश्तेदारों ने बहुत समझाया,कि बहु को थोड़ा जिम्मेदार बना वर्ना आगे चलकर परेशानी होगी।अर्चना मुस्कुराकर कह देती-“बच्ची है..धीरे-धीरे सब सीख जाएगी।”
परिवार वाले तो अर्चना को यहाँ तक कहते थे,कि वो बच्चों पर इतना पैसा ना लुटाया करे अपने भविष्य के लिए भी कुछ संभालकर रखे वर्ना पैसा नहीं होगा तो ये बुढ़ापे में उसे पूछेंगे तक नहीं।अर्चना उनसे यही कहती कि,मेरा जो कुछ भी है इनका ही तो और फिर मुझे अपने बहु बेटे पर पूरा भरोसा है वो मेरे साथ कभी कुछ गलत नहीं करेंगे।
पर आज बहु के मुँह से ये बात सुनकर और बेटे को उसकी हाँ में हाँ मिलाता देख अर्चना के मन को गहरा धक्का लगा।उसने मन में यही निर्णय लिया कि जब सब कुछ खुद ही करना है तो फिर बहु बेटे के साथ क्यों रहना?
अब वो वापिस अपने घर चली जाएगी और आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन जिएगी।उसे किसी के एहसान तले जीवन नहीं गुजारना।जब बच्चे अकेले रहेंगे तब इन्हें माता पिता की अहमियत का पता चलेगा और पता चलेगा कि कौन किसपे उपकार कर रहा है?
अर्चना ने अपने मन को शांत किया और रिया से बोली-“बहु,सच में तुम्हारा मुझपर बड़ा उपकार है जो तुमने मुझे अपने साथ रखा हुआ है।वरना मुझ जैसे लाचार बुजुर्ग या तो वृद्धाश्रम में रहते हैं या फिर अकेले।बुढ़ापा तो सबका आता है,
एक दिन तुम भी बूढ़ी होगी।मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करतीं हूँ,कि तुमको भी तुम्हारे जैसी परोपकारी बहु मिले।जैसे तुम मेरी सेवा करती हो वैसे ही वो भी तुम्हारी सेवा करे।और रोहित सुन.. मेरा बुखार ठीक हो जाए तो मुझे मेरे घर छोड़ आना।मैं बस अब और किसी का एहसान लेना नहीं चाहती।”
अर्चना की बात सुनकर रिया और रोहित को जैसे चक्कर आ गया..एक पल को उन्हें लगा,कि अर्चना के बिना घर का खर्च और काम कैसे चलेगा?खिसिआते हुए दोनों बोले-“वो तो..माँ बस हम ऐसे ही कह रहे थे..प्लीज हमें माफ कर दो और अपने जाने का निर्णय बदल दो।”
बच्चों को माता पिता की अहमियत समझाने के लिए अर्चना अपने निर्णय पर डटी रही।ठीक होने के बाद जब अर्चना अपने घर जाने लगी तो पोता ध्रुव उसका दामन थामकर बोला -“दादी,प्लीज मत जाओ ना।आप चली जाओगी तो कौन मेरे साथ खेलेगा?कौन मुझे कहानियां सुनाएगा?
मम्मी पापा तो अपने में बिजी रहते हैं।मैं मम्मी पापा को कभी आपसे लड़ाई नहीं करने दूंगा।”वो कहते हैं ना मूल से ज्यादा सूद प्यारा होता है…पोते के मोह ने अर्चना के बढ़ते कदमों को रोक दिया।
अपनी गरज को ही सही,उस दिन के बाद से रिया और रोहित ने कभी अर्चना के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया।
दोस्तों अक्सर बच्चे माता पिता को साथ रखकर ये सोचने लगते हैं कि वो उनपर उपकार कर रहें है।जबकि सच तो ये है कि माता पिता का साथ बच्चों के लिए उपकार होता है।बड़ों की छत्र छाया किस्मत वालों को ही नसीब होती है।बच्चों को चाहिए कि यदि उन्हें बड़ों का साथ मिला है तो उस साथ की कद्र करें।
बड़ों को प्यार दें उनके साथ अच्छे से पेश आएं।उन्हें ये महसूस कराएं कि उनका साथ आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है।और फिर बुढ़ापा तो सबका आता है।आज बच्चे जैसा अपने बूढ़े माता पिता के साथ व्यवहार करेंगे कल को जब वो बूढ़े होंगे तो उनके बच्चे भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे।
कमलेश आहूजा
#”बुढ़ापा तो सबका आता है”