बुढ़ापा तो सबका आता है। – दीपा माथुर

दादा जी आप रोज रोज ये गीता सत्र क्यों देखते हो?

डोरेमॉन आपको पसंद नहीं है क्या?

दादा जी शुभ की इस मासूमियत पर खिलखिला दिए बोले

” देख तो सकता हु पर सिर्फ आपके साथ ही आप दिखाते ही नहीं हो?

शुभ ने एक बात गर्दन नीचे झुकाई ओर तुरंत शरारती ढंग से दादा जी को देख कर बोला ;” आप मेरे साथ मोबाइल में गेम

खेलोगे?

दादा जी बोले ;” हा क्यों नहीं आप सीखा दो तो आपके साथ खेलेंगे।

पर आपको भी हमारे हमारी पसंद का गेम खेलना होगा।

बोलो गर मंजूर हो तो….

हा,पर मम्मी डांटती है ना?

मुझे डाट दे तो कोई बात नहीं पर आपको कुछ बोलती है तो मुझे अच्छा नहीं लगता।

दादा जी स्नेह भरी दृष्टि से शुभ को देखते रहे।

फिर बात बदल कर बोले ;” अरे कुछ नहीं थक जाती होंगी ना?

तुम्हारी दादी भी ऐसे ही करती रहती थी।’

पर दादा साहब आप तो अपना काम खुद करते हो? फिर भी?

शुभ ने फिर प्रश्न दाग दिया।

दादा साहब मुस्कुराए;” तुमने ये तो देखा की मम्मी कभी कभी मुझसे कुछ बोल देती है लेकिन ये नहीं देखा वो अपने पापा की तरह मेरा ख्याल रखती है इतना ख्याल तो तुम्हारे पापा भी नहीं रखते।

बात सुनकर शुभ दादा साहब के चिपक गया

पता है मेरा कई बार आपके साथ खेलने का मन करता है पर मम्मी कहती है आप बुजुर्ग हो गए अब खेलोगे तो थक जाओगे।”

दादा साहब न शुभ के बाल सहलाते हुए बोले :” हु बात सही भी है पर मुझे लगता है जब भी तुम्हारा मोबाइल देखने का मन करे मेरे साथ खेल लिया करो मैं भी एक्टिव रहूंगा ओर तुम भी ओर खूब आनंद आयेगा।

एक बात बस लास्ट बात पूछ लूं? शुभ ने कहा

दादा साहब मुस्कुराए और हामी में सिर हिला दिया।

कल नानी का फोन आया था वो रो रही थी मामाजी उन्हें बहुत ताने मारती है बिना मतलब उनकी छोटी छोटी गलतियां ढूंढ कर लड़ती है।

शायद उन्हें नानी के साथ रहना पसंद नहीं है,?

दादा साहब गंभीर हो गए ओर बोले ;” आप अभी छोटे हो इन बातों पर ध्यान मत दिया करो पर हा ये बात जान लो नानी को या मुझे देख कर आपको परेशानी होती है ना?

कल को पापा ,मम्मी का बुढ़ापा आए तो उनके साथ बहुत अच्छा व्यवहार करना।

हा कभी कभी तो कहा सुनी चलती है पर स्वाभिमान तो मत तोड़ना।

जैसे आपके मम्मी ,पापा मेरे स्वाभिमान का ध्यान रखते है ।

शुभ अचानक कूद कर बैठा ओर बोला ;” मेरे मम्मी ,पापा क्यों बुजुर्ग होंगे?”

दादा साहब ,” बुढ़ापा तो सबको आता है?

शुभ ;” हु ….।

मै ध्यान रखूंगा दादा साहब फिर तो मेरी भी शादी हो जाएंगी 

फिर मेरी जिसके साथ शादी होगी वो मम्मी,पापा से लड़े तो?

एक मासूम सा सवाल जो हर घर में घूमता है।

जवाब किसी के पास नहीं।

दादा साहब ने अपने मन के विचार को विराम दिया खड़े होकर बोले चलो बैडमिंटन खेलते है जाओ बेडमिंटन ले आओ”।

शुभ के बाहर जाते ही उन्होंने अपने बेटे को फोन लगाया बात की।

इतने में शुभ भागता हुआ  पी  पी पी हाथ में रैकेट ओर चिड़ि मोटरसाइकिल स्टाइल में भागता हुआ कमरे में आ गया।

चलो दादा साहब सिर्फ 1 घंटा खेलने को मिलेगा फिर होमवर्क करना है।

चलो दादा साहब भी जोर से हल्ला मचाते हुए बोले।

शाम हुई कविता ने दादा साहब के सामने चिंता व्यक्त की :” पापा जी इनके आने का वक्त हो गया अभी तक नहीं आए”

दादा साहब अपने कपड़े समेटते हुए बोले :” अरे मै बताना भूल गया उसने तुम्हे भी फोन किया था पर लगा नहीं कह रहा था आज काम है लेट आयेगा रात  10 भी बज सकते है।

कविता ने मुंह बिचकाया ओर बड़बड़ाती हुई चल दी।

कविता रसोई में काम कर रही थी तभी दादा साहब बोले :” बेटा आज भूख ज्यादा है दो तीन रोटी ज्यादा बनाना ओर सुनो खीर खाने का बहुत मन है थोड़ी खीर ओर सलाद ओर भिंडी की सब्जी थोड़ा नमकीन चावल भी बना लेना।

लाओ भिंडी मुझे दे दो काट देता हु।

आज दोपहर से ही खीर खाने का मन था तो घूमने गया तो दूध भी ले आया जब आप आराम कर रही थी मैने गरम कर दिया।

चावल भी धो कर रख दिए एक तरफ चढ़ा दो।

कविता फिर बड़बड़ाई पर दादा साहब अक्सर इग्नोर मारते रहे।

रात को दो तीन बार कविता ने दादा साहब को खाने के लिए पूछा।

तो बोले शौर्य आ जाए फिर ही खायेंगे।

चिंता में दोनों हाथ पीछे किए घूमते रहे।

करीब साढ़े दस बजे डोर बेल बजी दादा साहब जोर से बोले

:” कविता गेट खोलो शौर्य आ गया होगा।

कविया गेट खोलने गई तो सरप्राइज़ हो गई शौर्य के साथ उसकी मम्मी थो।

चरण स्पर्श कर वो बोली :” पापा जी आपको पता था ना?

शौर्य;” हा पापा ने ही फोन कर के कहा था कविता की मम्मी को यहां ले आना।

कविता चरण स्पर्श करके बोली ;” थैंक यू पापा जी “

दादा साहब  हंसते जोर से बोले :” शुभ तुम्हारी नानी आई है बाहर आओ ।

शुभ ने दादा साहब को देख कर अंगुली जोर से हिलाने लगा मानो कह रहा हो दादा साहब ये आपका ही काम है।”

दादा साहब ने उसको  हस करअंगूठा दिखाया।

# बुढ़ापा तो सबका आता है।

दीपा माथुर

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